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कम सजा वाले मामलों में किया जा सकता है समझौता
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गोंडा। गुरुवार को जिला कारागार में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोंडा के सचिव ने जेल का निरीक्षण भी किया। शिविर में सचिव ने प्ली बार्गेनिंग विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय संसद द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता में एक नया अध्याय जोड़कर दांडिक प्रकरणों को शीघ्रता से निपटाने का प्रावधान किया गया है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोंडा के सचिव कृष्ण प्रताप सिंह ने आगे बताया कि इसके तहत अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपस में सामंजस्य पूर्ण तरीके से मामले को निपटाने के लिए न्यायालय की अनुमति से सरल व सुगम रास्ता निकालते हैं। इसमें आरोपी द्वारा अपराध स्वीकार कर लेने पर उसे कम सजा से दंडित किया जाता है।
उन्होंने बताया कि प्ली बार्गेनिंग का लाभ गंभीर अपराधों में नहीं मिलता है। यह सात साल से कम की सजा वाले मामलों में लाभ देता है। ऐसे मामलों में आरोपी यदि अपराध स्वीकार करते हुए पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा देने के लिए तैयार हो जाता है तो उसे कम से कम सजा दी जाती है। इससे न्यायालय के समय की बचत होती है और पीड़ित व्यक्ति को त्वरित उपचार भी प्राप्त हो जाता है।
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विधिक साक्षरता शिविर में सचिव द्वारा निशुल्क विधिक सहायता के संदर्भ में सांविधानिक उपबंध, दंड प्रक्रिया संहिता में वर्णित उपबंध व सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये अद्यतन निर्णयों पर भी विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। सचिव द्वारा कारागार अस्पताल का निरीक्षण करते समय इलाज के लिए भर्ती बंदीगण के स्वास्थ्य आदि के बारे में पूछताछ की गई। बंदियों के समुचित इलाज के लिए संबंधित को निर्देशित किया गया। भोजनालय का निरीक्षण कर साफ-सफाई के लिए आवश्यक निर्देश दिया गया।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गोंडा के सचिव कृष्ण प्रताप सिंह ने आगे बताया कि इसके तहत अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपस में सामंजस्य पूर्ण तरीके से मामले को निपटाने के लिए न्यायालय की अनुमति से सरल व सुगम रास्ता निकालते हैं। इसमें आरोपी द्वारा अपराध स्वीकार कर लेने पर उसे कम सजा से दंडित किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि प्ली बार्गेनिंग का लाभ गंभीर अपराधों में नहीं मिलता है। यह सात साल से कम की सजा वाले मामलों में लाभ देता है। ऐसे मामलों में आरोपी यदि अपराध स्वीकार करते हुए पीड़ित व्यक्ति को मुआवजा देने के लिए तैयार हो जाता है तो उसे कम से कम सजा दी जाती है। इससे न्यायालय के समय की बचत होती है और पीड़ित व्यक्ति को त्वरित उपचार भी प्राप्त हो जाता है।
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विधिक साक्षरता शिविर में सचिव द्वारा निशुल्क विधिक सहायता के संदर्भ में सांविधानिक उपबंध, दंड प्रक्रिया संहिता में वर्णित उपबंध व सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये अद्यतन निर्णयों पर भी विस्तृत रूप से जानकारी दी गई। सचिव द्वारा कारागार अस्पताल का निरीक्षण करते समय इलाज के लिए भर्ती बंदीगण के स्वास्थ्य आदि के बारे में पूछताछ की गई। बंदियों के समुचित इलाज के लिए संबंधित को निर्देशित किया गया। भोजनालय का निरीक्षण कर साफ-सफाई के लिए आवश्यक निर्देश दिया गया।