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चुनाव ड्यूटी के बाद मृत 37 कर्मियों के परिजन पाएंगे 11.10 करोड़
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गोंडा। कोरोना संकट के बीच पंचायत चुनाव होने से बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारी ड्यूटी के दौरान संक्रमित हो गए थे। चुनाव के दिन तो किसी की मौत नहीं हुई लेकिन एक माह में 37 लोगों की मौत हो गई थी। अमर उजाला ने इसकी खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेकर रिपोर्ट मांगी थी। जांच में पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने से शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अन्य विभागों के कर्मचारियों के मौत की पुष्टि हुई। शासन ने ड्यूटी के दौरान ही मौत पर सहायता देने का आदेश जारी किया तो एक लेखपाल ही पात्रता की सूची में शामिल हो सका। जिससे सहायता भी दे दी गई। अब अन्य लोगों को आर्थिक सहायता का आदेश हुआ है जिससे 37 लोगों को 11 करोड़ 10 लाख की मदद मिलेगी।
अमर उजाला ने इसके बाद भी अभियान जारी रखा। शासन ने फैसले में परिवर्तन करते हुए पंचायत चुनाव की ड्यूटी के एक माह में मरने वालों को आर्थिक सहायता देने का आदेश किया और नए सिरे से रिपोर्ट तैयार हुई। जिसमें 37 कर्मियों की सूची भेजी गई। शासन ने सहमति दे दी है और प्रत्येक मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये की मदद देने का आदेश दिया है। शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष अवधेश मणि मिश्र ने कहा कि अमर उजाला ने मुद्दे को उठाया तो कर्मचारियों के परिजनों के साथ न्याय हुआ है। कहा कि शासन से जारी सूची में 9 शिक्षामित्रों को भी शामिल किया गया है। पूरे जिले में 37 कर्मियों को आर्थिक मदद के रूप में 30- 30 लाख रुपये मिलेंगे। इसके लिए प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।
मृतक आश्रितों की नियुक्ति में हो रही है ढिलाई
पंचायत चुनाव या ड्यूटी के दौरान मौत हुई हो या फिर किसी अन्य कारणों से कई विभागों की ओर से ढिलाई बरती जा रही है। कुछ विभागों की ओर से तो नियुक्ति मृतक आश्रित के किए गए हैं लेकिन कई विभागों में फाइलें लंबित चल रही है। कर्मचारी संगठनों ने मांग किया है कि कोरोना से मौत मामले में मृतक आश्रितों की नियुक्ति के साथ ही अन्य कारणों से मौतों के मामलों में जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए। मामलों को लटकाए रखने से पीड़ित परिवार को आर्थिक संकट के साथ सेवा में देरी का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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अमर उजाला ने इसके बाद भी अभियान जारी रखा। शासन ने फैसले में परिवर्तन करते हुए पंचायत चुनाव की ड्यूटी के एक माह में मरने वालों को आर्थिक सहायता देने का आदेश किया और नए सिरे से रिपोर्ट तैयार हुई। जिसमें 37 कर्मियों की सूची भेजी गई। शासन ने सहमति दे दी है और प्रत्येक मृतक के परिजनों को 30 लाख रुपये की मदद देने का आदेश दिया है। शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष अवधेश मणि मिश्र ने कहा कि अमर उजाला ने मुद्दे को उठाया तो कर्मचारियों के परिजनों के साथ न्याय हुआ है। कहा कि शासन से जारी सूची में 9 शिक्षामित्रों को भी शामिल किया गया है। पूरे जिले में 37 कर्मियों को आर्थिक मदद के रूप में 30- 30 लाख रुपये मिलेंगे। इसके लिए प्रक्रिया जल्द ही पूरी हो जाएगी।
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मृतक आश्रितों की नियुक्ति में हो रही है ढिलाई
पंचायत चुनाव या ड्यूटी के दौरान मौत हुई हो या फिर किसी अन्य कारणों से कई विभागों की ओर से ढिलाई बरती जा रही है। कुछ विभागों की ओर से तो नियुक्ति मृतक आश्रित के किए गए हैं लेकिन कई विभागों में फाइलें लंबित चल रही है। कर्मचारी संगठनों ने मांग किया है कि कोरोना से मौत मामले में मृतक आश्रितों की नियुक्ति के साथ ही अन्य कारणों से मौतों के मामलों में जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए। मामलों को लटकाए रखने से पीड़ित परिवार को आर्थिक संकट के साथ सेवा में देरी का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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