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कोरोना के कहर में बाजार गया ठहर, 20 करोड़ की लगी चपत
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09द्दस्रड्डश्च1- गोंडा के वी-मार्ट में खरीदारी करते हुए।
- फोटो : GONDA
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गोंडा। तीन माह तक चले लॉकडाउन में कोरोना का कहर बाजारों पर अधिक रहा। बंदी के कारण माल, मार्ट सहित बाजार में खाद्य सहित अन्य करोड़ों की वस्तुएं या तो सड़ गईं या फिर उनकी मियाद खत्म हो गई। मार्ट में लगे कर्मचारियों का वेतन भी बैठा कर देना पड़ा, बिजली बिल की बकाएदारी बढ़ी और किराये का भी भुगतान करना पड़ा। बड़े शॉपिंग कांपलेक्स के अलावा बाजार में करोड़ों के सामानों का नुकसान हुआ। बिक्री ठप रही और खर्च पहले जैसे ही उठाने पड़े। केवल पांच बड़े मार्ट के संचालकों को ही करीब 20 करोड़ की चपत लगी। जिले में संचालित माल, मार्ट सहित अन्य दुकानों पर हुए नुकसान की भरपाई तो नहीं हो सकती पर नए सिरे से सभी लोग फिर उठने को तैयार हैं।
शहर के मध्य जिला महिला अस्पताल के सामने स्थित वी-मार्ट को तीन माह में करीब 3.5 करोड़ रुपये की चपत लगी। मार्ट में रखी खाद्य वस्तुएं सड़ गईं या फिर उनकी डेट एक्सपायर हो गई। वी-मार्ट के असिस्टेंट स्टोर मैनेजर लक्ष्मी प्रसाद का कहना है कि तीन माह से कांपलेक्स बंद था। तीन माह में बिना बिक्री के करीब नौ लाख रुपये यानि तीन लाख रुपये प्रतिमाह की दर से किराये का भुगतान देना पड़ा। दो लाख रुपये बिजली बिल, मार्ट में काम करने वाले 32 स्टाफ को 40 लाख रुपये मानदेय का भुगतान करना पड़ा। किसी भी स्टाफ को निकाला नहीं गया। इसके अलावा सामान का नुकसान हुआ। कुल करीब 3.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
मार्च माह में होली की खरीदारी व बिक्री के बाद 14 मार्च को वी-बाजार बंद हो गया। परिवहन निगम डिपो के सामने वी बाजार के प्रबंधक अंकुर राठी व सहायक मैनेजर स्टोर कुलभूषण पांडेय ने बताया कि तीन माह की बंदी में तीन करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। 32 स्टाफ को करीब 40 लाख रुपये का मानदेय भुगतान देना पड़ा। ढाई लाख रुपये प्रति माह किराया, बिजली बिल भी चुकाना पड़ा। बंदी के दौरान तमाम खाद्य व ब्यूटी प्रोडक्ट एक्सपायर हो गए। लेकिन अब नए सिरे बाजार को नए ढर्रे पर लाने की कोशिश हो रही है। कोरोना के डर से अभी ग्राहक भी कम आते हैं इसलिए सामान की आपूर्ति भी उस मात्रा में नहीं हो पा रहा है।
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रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित सिटी कार्ट मॉल के संचालक को करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान तीन माह में उठाना पड़ा। यहां के प्रबंधक दीपेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि 23 मार्च से मार्ट पूरी तरह से बंद है। 28 स्टाफ को सैलरी, बिजली बिल, सहित अन्य भुगतान करना पड़ा। श्रीवास्तव कहते हैं ईद त्योहार में करीब डेढ़ से दो करोड़ की बिक्री हो जाती थी। इस बार बंदी के कारण करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। बंदी के बाद मार्ट तो खुल गया लेकिन बिक्री जिस तरह से होनी चाहिए नहीं हो रही है। बाजार को गति पकड़ने में अभी छह माह लगेंगे। कोरोना का डर लोगों को सता रहा है। अस्पताल के निकट होने के कारण और भी समस्या आ रही है।
शहर के बाहर लखनऊ रोड पर आईटीसी का मॉल चौपाल सागर है। आईटीसी के अपने प्रोडक्ट भी हैं और खाद्य पदार्थ के अलावा अन्य सामान यहां खराब हो गए। यहां करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसी तरह से शहर में सिटी लाइफ मार्ट है जिसे करीब तीन करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई तो नहीं हो सकती पर यहां एक बार फिर बाजार व जिंदगी पटरी पर आने लगी है।
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शहर के मध्य जिला महिला अस्पताल के सामने स्थित वी-मार्ट को तीन माह में करीब 3.5 करोड़ रुपये की चपत लगी। मार्ट में रखी खाद्य वस्तुएं सड़ गईं या फिर उनकी डेट एक्सपायर हो गई। वी-मार्ट के असिस्टेंट स्टोर मैनेजर लक्ष्मी प्रसाद का कहना है कि तीन माह से कांपलेक्स बंद था। तीन माह में बिना बिक्री के करीब नौ लाख रुपये यानि तीन लाख रुपये प्रतिमाह की दर से किराये का भुगतान देना पड़ा। दो लाख रुपये बिजली बिल, मार्ट में काम करने वाले 32 स्टाफ को 40 लाख रुपये मानदेय का भुगतान करना पड़ा। किसी भी स्टाफ को निकाला नहीं गया। इसके अलावा सामान का नुकसान हुआ। कुल करीब 3.5 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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मार्च माह में होली की खरीदारी व बिक्री के बाद 14 मार्च को वी-बाजार बंद हो गया। परिवहन निगम डिपो के सामने वी बाजार के प्रबंधक अंकुर राठी व सहायक मैनेजर स्टोर कुलभूषण पांडेय ने बताया कि तीन माह की बंदी में तीन करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। 32 स्टाफ को करीब 40 लाख रुपये का मानदेय भुगतान देना पड़ा। ढाई लाख रुपये प्रति माह किराया, बिजली बिल भी चुकाना पड़ा। बंदी के दौरान तमाम खाद्य व ब्यूटी प्रोडक्ट एक्सपायर हो गए। लेकिन अब नए सिरे बाजार को नए ढर्रे पर लाने की कोशिश हो रही है। कोरोना के डर से अभी ग्राहक भी कम आते हैं इसलिए सामान की आपूर्ति भी उस मात्रा में नहीं हो पा रहा है।
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रेलवे स्टेशन मार्ग पर स्थित सिटी कार्ट मॉल के संचालक को करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान तीन माह में उठाना पड़ा। यहां के प्रबंधक दीपेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि 23 मार्च से मार्ट पूरी तरह से बंद है। 28 स्टाफ को सैलरी, बिजली बिल, सहित अन्य भुगतान करना पड़ा। श्रीवास्तव कहते हैं ईद त्योहार में करीब डेढ़ से दो करोड़ की बिक्री हो जाती थी। इस बार बंदी के कारण करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। बंदी के बाद मार्ट तो खुल गया लेकिन बिक्री जिस तरह से होनी चाहिए नहीं हो रही है। बाजार को गति पकड़ने में अभी छह माह लगेंगे। कोरोना का डर लोगों को सता रहा है। अस्पताल के निकट होने के कारण और भी समस्या आ रही है।
शहर के बाहर लखनऊ रोड पर आईटीसी का मॉल चौपाल सागर है। आईटीसी के अपने प्रोडक्ट भी हैं और खाद्य पदार्थ के अलावा अन्य सामान यहां खराब हो गए। यहां करीब पांच करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसी तरह से शहर में सिटी लाइफ मार्ट है जिसे करीब तीन करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई तो नहीं हो सकती पर यहां एक बार फिर बाजार व जिंदगी पटरी पर आने लगी है।