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उपभोक्ताओं पर हर माह छह करोड़ रुपये की बकाया
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2015 11:28 PM IST
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बिजली तो सब चाहते हैं, लेकिन उसके बिल की अदायगी सिर्फ कुछ ही लोग
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करते हैं। शायद तभी तो पावर कॉर्पोरेशन को महीने के अंत में एक-एक पैसे की
बकाएदारी के लिए लोगों के घरों में झांकना पड़ता है। गोंडा शहर में बिजली
के वैसे तो कुल 31 हजार उपभोक्ता हैं, लेकिन इनमें से बिल केवल तीन हजार
लोग ही जमा करते हैं। जबकि 28 हजार उपभोक्ताओं का छह करोड़ रुपये बिजली का
बिल हर महीने बकाएदारी में चला जाता हैं।
बकाएदारों की इस सूची में जहां बड़े-बड़े व्यापारियों से लेकर तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों के मालिकों का नाम शामिल है, तो वहीं सरकारी विभागों पर भी लाखों-करोड़ों का बकाया है।
बजाय इन लोगों से वसूली के पावर कॉर्पोरेशन का चाबुक हमेशा से आम उपभोक्ताओं पर ही चलता आ रहा है। जिसे लेकर इधर कुछ दिनों से कॉर्पोरेशन ने घर-घर चेकिंग अभियान छेड़ रखा है। वहीं, जिले में 4646 उपभोक्ता ऐसे हैं, जो एक लाख से ऊपर के बकाएदार हैं। इन लोगों पर 10 करोड़ से ऊपर की बकाएदारी बीते कई वर्षों से चली आ रही है।
शहरी क्षेत्र के 31 हजार उपभोक्ताओं से बिल वसूली के लिए बिजली अभियंता अपने क्षेत्रों में अनाउंसमेंट के जरिए लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर उन्होने 31 दिसंबर के पहले बकाया बिजली का बिल नहीं जमा किया तो उनका कनेक्शन लेकर काट दिया जाएगा।
जिसके बाद उन्हें दोबारा से कनेक्शन जुड़वाने के लिए आरसी-डीसी (रि-कनेक्शन-डिस्कनेक्शन) का साढ़े तीन सौ रुपये बिल के अतिरिक्त देना होगा।
शहर में हर महीने 18 मिलियन यूनिट बिजली की खपत होती है। बावजूद इसके 9 करोड़ रुपये कीमत की 18 मिलियन यूनिट बिजली में से केवल 3 करोड़ रुपये ही राजस्व विभाग को मिल पाता है।
वह भी सिर्फ उन तीन हजार उपभोक्ताओं से, जो अपना बिल समय से जमा करते हैं। जबकि 6 करोड़ रुपये हर महीने के हिसाब से कॉर्पोरेशन का राजस्व बकाएदारी में चला जाता है।
अधिशाषी अभियंता विद्युत राधेश्याम भाष्कर ने कहा कि यह सही है कि गोंडा शहर में बिजली के 31 हजार उपभोक्ताओं में से केवल तीन हजार लोग ही समय से अपने बिल का भुगतान करते है। जबकि बाकी बचे 28 हजार उपभोक्ता अपना बिल ही नहीं जमा करते।
इससे उन्हें हर महीने छह करोड़ रुपये का घाटा अकेले गोंडा शहर से रेवेन्यू को लेकर उठाना पड़ता है। जिसे लेकर पूरे शहर में अनाउंसमेंट करवाया जा रहा है। बकाया न जमा करने वाले चाहे घरेलू उपभोक्ता हों या कामर्शियल के, सभी का कनेक्शन काट दिया जाएगा।
सरकारी विभागों पर बकाया
विभाग का नाम बकाएदारी
प्राथमिक हेल्थ सेंटर पंतनगर 98 लाख
सीडीओ सिविल लाइन 45 लाख
सीएमओ जिला अस्पताल 30 लाख
एक्सईएन ड्राइंग जलनिगम 25 लाख
संभागीय कृषि परिसर अधिकारी 16 लाख
परियोजना अधिकारी (एग्रीकल्चर) 15 लाख रुपये
एई पीडब्ल्यूडी जेल रोड 15 लाख
कमांडेंट पीएसी 15 लाख
सरयू नहर खंड 14 लाख
एससीएसटी हास्टल 9 लाख
कस्तूरबा विद्यालय करनैलगंज 7.6 लाख
डीआईजी ऑफिस 6.5 लाख
मत्सियिकी उद्यमिता करनैलगंज 5.5 लाख
कृ षि निदेशक 4 लाख
नोट : सरकारी विभागों पर इन विभागों को मिलाकर कुल बकाएदारी चार करोड़ रुपये के करीब है।
बकाएदारों की इस सूची में जहां बड़े-बड़े व्यापारियों से लेकर तमाम प्रतिष्ठित संस्थानों के मालिकों का नाम शामिल है, तो वहीं सरकारी विभागों पर भी लाखों-करोड़ों का बकाया है।
बजाय इन लोगों से वसूली के पावर कॉर्पोरेशन का चाबुक हमेशा से आम उपभोक्ताओं पर ही चलता आ रहा है। जिसे लेकर इधर कुछ दिनों से कॉर्पोरेशन ने घर-घर चेकिंग अभियान छेड़ रखा है। वहीं, जिले में 4646 उपभोक्ता ऐसे हैं, जो एक लाख से ऊपर के बकाएदार हैं। इन लोगों पर 10 करोड़ से ऊपर की बकाएदारी बीते कई वर्षों से चली आ रही है।
शहरी क्षेत्र के 31 हजार उपभोक्ताओं से बिल वसूली के लिए बिजली अभियंता अपने क्षेत्रों में अनाउंसमेंट के जरिए लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि अगर उन्होने 31 दिसंबर के पहले बकाया बिजली का बिल नहीं जमा किया तो उनका कनेक्शन लेकर काट दिया जाएगा।
जिसके बाद उन्हें दोबारा से कनेक्शन जुड़वाने के लिए आरसी-डीसी (रि-कनेक्शन-डिस्कनेक्शन) का साढ़े तीन सौ रुपये बिल के अतिरिक्त देना होगा।
शहर में हर महीने 18 मिलियन यूनिट बिजली की खपत होती है। बावजूद इसके 9 करोड़ रुपये कीमत की 18 मिलियन यूनिट बिजली में से केवल 3 करोड़ रुपये ही राजस्व विभाग को मिल पाता है।
वह भी सिर्फ उन तीन हजार उपभोक्ताओं से, जो अपना बिल समय से जमा करते हैं। जबकि 6 करोड़ रुपये हर महीने के हिसाब से कॉर्पोरेशन का राजस्व बकाएदारी में चला जाता है।
अधिशाषी अभियंता विद्युत राधेश्याम भाष्कर ने कहा कि यह सही है कि गोंडा शहर में बिजली के 31 हजार उपभोक्ताओं में से केवल तीन हजार लोग ही समय से अपने बिल का भुगतान करते है। जबकि बाकी बचे 28 हजार उपभोक्ता अपना बिल ही नहीं जमा करते।
इससे उन्हें हर महीने छह करोड़ रुपये का घाटा अकेले गोंडा शहर से रेवेन्यू को लेकर उठाना पड़ता है। जिसे लेकर पूरे शहर में अनाउंसमेंट करवाया जा रहा है। बकाया न जमा करने वाले चाहे घरेलू उपभोक्ता हों या कामर्शियल के, सभी का कनेक्शन काट दिया जाएगा।
सरकारी विभागों पर बकाया
विभाग का नाम बकाएदारी
प्राथमिक हेल्थ सेंटर पंतनगर 98 लाख
सीडीओ सिविल लाइन 45 लाख
सीएमओ जिला अस्पताल 30 लाख
एक्सईएन ड्राइंग जलनिगम 25 लाख
संभागीय कृषि परिसर अधिकारी 16 लाख
परियोजना अधिकारी (एग्रीकल्चर) 15 लाख रुपये
एई पीडब्ल्यूडी जेल रोड 15 लाख
कमांडेंट पीएसी 15 लाख
सरयू नहर खंड 14 लाख
एससीएसटी हास्टल 9 लाख
कस्तूरबा विद्यालय करनैलगंज 7.6 लाख
डीआईजी ऑफिस 6.5 लाख
मत्सियिकी उद्यमिता करनैलगंज 5.5 लाख
कृ षि निदेशक 4 लाख
नोट : सरकारी विभागों पर इन विभागों को मिलाकर कुल बकाएदारी चार करोड़ रुपये के करीब है।