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Gonda News: झोलाछाप के इलाज से बालक की मौत, हंगामा
Sat, 15 Jun 2024 11:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 15 Jun 2024 11:54 PM IST
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गोंडा। मेडिकल स्टोर की आड़ में संचालित अवैध क्लीनिक में झोलाछाप के इलाज से बालक की मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा काटा। बाद में पुलिस पर तहरीर बदलवाने का आरोप लगाते हुए बालक के परिजनों ने थाने में भी प्रदर्शन किया। खास बात ये है कि इस मेडिकल स्टोर को 15 दिन पहले ही खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने सील किया था।
त्रिभुवननगर ग्रंट के सौरहवा निवासी अजीत कुमार चौहान ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उनके बेटे जसवंत (12) के पेट में दर्द था। वह बृहस्पतिवार को अपनी मां विमला देवी के साथ कुतुबगंज बाजार स्थित राजेश यादव के क्लीनिक पर उपचार कराने गए थे। जहां अल्ट्रासाउंड व खून की जांच कराने के बाद भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। लेकिन शुक्रवार शाम को तबीयत बिगड़ने लगी। जिस पर जसवंत को जिला मुख्यालय ले जाने की सलाह दी गई। मुख्यालय ले जाते समय रास्ते में जसवंत की मौत हो गई।
परिजनों ने क्लीनिक पर जाकर गलत इलाज का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। लोगों के समझाने के बाद शव लेकर घर चले गए। इसके बाद शनिवार को अजीत ने परिजनों के साथ धानेपुर थाने पहुंचकर थानाध्यक्ष को तहरीर दी। इसके बाद पुलिस पर तहरीर बदलवाने का आरोप लगाकर परिजनों ने थाने में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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थानाध्यक्ष सुनील सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही मौत के कारणों का पता चलेगा। इसके बाद मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
जिस क्लीनिक पर इलाज में लापरवाही से जसवंत की मौत का आरोप लगाया जा रहा है, उसे गत 29 मई को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की गोंडा व बलरामपुर की संयुक्त टीम ने सील करके एक लाख रुपये की दवाएं जब्त की थीं। लेकिन फिर क्लीनिक का संचालन शुरू कर दिया गया और झोलाछाप के इलाज से बालक की मौत हो गई। क्लीनिक का फिर से संचालन शुरू होने से स्थानीय पुलिस व औषधि प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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त्रिभुवननगर ग्रंट के सौरहवा निवासी अजीत कुमार चौहान ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि उनके बेटे जसवंत (12) के पेट में दर्द था। वह बृहस्पतिवार को अपनी मां विमला देवी के साथ कुतुबगंज बाजार स्थित राजेश यादव के क्लीनिक पर उपचार कराने गए थे। जहां अल्ट्रासाउंड व खून की जांच कराने के बाद भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। लेकिन शुक्रवार शाम को तबीयत बिगड़ने लगी। जिस पर जसवंत को जिला मुख्यालय ले जाने की सलाह दी गई। मुख्यालय ले जाते समय रास्ते में जसवंत की मौत हो गई।
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परिजनों ने क्लीनिक पर जाकर गलत इलाज का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। लोगों के समझाने के बाद शव लेकर घर चले गए। इसके बाद शनिवार को अजीत ने परिजनों के साथ धानेपुर थाने पहुंचकर थानाध्यक्ष को तहरीर दी। इसके बाद पुलिस पर तहरीर बदलवाने का आरोप लगाकर परिजनों ने थाने में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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थानाध्यक्ष सुनील सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही मौत के कारणों का पता चलेगा। इसके बाद मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
जिस क्लीनिक पर इलाज में लापरवाही से जसवंत की मौत का आरोप लगाया जा रहा है, उसे गत 29 मई को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की गोंडा व बलरामपुर की संयुक्त टीम ने सील करके एक लाख रुपये की दवाएं जब्त की थीं। लेकिन फिर क्लीनिक का संचालन शुरू कर दिया गया और झोलाछाप के इलाज से बालक की मौत हो गई। क्लीनिक का फिर से संचालन शुरू होने से स्थानीय पुलिस व औषधि प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।