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चीनी मिलों का गन्ना रकबा घटाया
अमर उजाला/गोंडा
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:16 PM IST
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चीनी मिल
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गन्ना किसानों को उनके ही पैसे के लिए खून के आंसू रुलाने वाली देवीपाटन मंडल की बजाज कुन्दरखी व चिलवरिया चीनी मिलों से शासन ने 18 हजार 71 हेक्टेयर गन्ना रकबा छीन लिया है। इन मिलों के किसानों के गन्ना मूल्य भुगतान में फिसड्डी होने और गन्ना रिजर्वेशन की बैठक में भुक्तभोगी किसानों के इन चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई देने से हाथ खड़े कर दिये जाने को लेकर प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने ऐसी मिलों पर तगड़ा चाबुक चलाया है। उन्होंने बेलगाम होती मिलों से न सिर्फ गन्ना रकबा छीना बल्कि इनसे 47 क्रय केंद्र भी ले लिया।
देवीपाटन मंडल में एक सहकारी नानपारा चीनी मिल समेत निजी क्षेत्र की कुल 10 चीनी मिलें संचालित हैं। देश के नेपाल सीमा की कछार से जुड़े देवीपाटन मंडल में 2.58 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की जाती है।
गन्ना बेल्ट होने के नाते गन्ना किसानों की प्रमुख नगदी फसल है। गन्ने के रक म से ही मंडल के 20 लाख से अधिक किसानों की साल भर न सिर्फ अजीविका चलती है बल्कि इसी के पैसे पर ही उनके रोजमर्रा व बड़े काम भी निर्भर हैं।
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गन्ना खरीद अधिनियम के तहत गन्ना खरीद करने के 14 दिन के अंदर किसानों को मिलों की ओर से भुगतान कर दिया जाना चाहिए। देवीपाटन मंडल में पेराई सत्र 2015-16 में चीनी मिलों ने भुगतान में खूब मनमानी की। चीनी मिलें बाजार में चीनी क ा मूल्य कम होने की दुहाई देकर किसानों का भुगतान सात से आठ महीने तक रोके रखा।
इस मामले में बजाज व चीनी मिल के अधिकारियों पर प्रशासन ने केस भी दर्ज कराया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इस बार जब गन्ना आयुक्त ने देवीपाटन मंडल के गन्ना सुरक्षण की बैठक की तो उसमें गाेंडा की बजाज चीनी मिल व बहराइच की चिलवरिया चीनी मिल समेत दो अन्य चीनी मिलों की भुगतान की कमी उजागर हुई।
बैठक में किसानों ने भुगतान में मनमानी व दबंगई करने वाली चीनी मिलों की जोरदार मुखालफत कर उन्हें दोबारा गन्ना देने से मना कर दिया। इस मामले की रिपोर्ट शासन व सीएम को भी भेजी गई।
शासन ने मनमानी करने वाली बजाज चिलवरिया, इटईमैदा व नानपारा चीनी मिल क्षेत्रों से न सिर्फ कई हजार हेक्टेयर गन्ना रकबा छीना व बल्कि उनके क्रय केंद्र भी हटाने की कार्रवाई कर दी है।
देवीपाटन मंडल के उप गन्ना आयुक्त अमर सिंह ने बताया कि पेराई सत्र 2016-17 के लिए शासन की ओर से मिलवार गन्ना क्षेत्र का आवंटन कर दिया गया है। पिछले पेराई सत्र में जिन चीनी मिलों के प्रदर्शन खराब थे यानी जिनका खरीद भुगतान की स्थिति ठीक नही थी उनके क्षेत्र का गन्ना रकबा व क्रय केंद्र घटा दिया गया है। चीनी मिलें नये निर्धारित क्रय केंद्र पर गन्ने की खरीद करेंगी।
किसानों को गन्ना मूल्य में झेलाने वाली मिलों की कतार में देवीपाटन मंडल की इटईमैदा व सहकारी नानपारा चीनी मिल भी है। गन्ना रिजर्वेशन के समय भुगतान की स्थिति की समीक्षा में दोनों मिलों की स्थिति अच्छी नहीं पाई गई।
यही नहीं क्षेत्र के गन्ना किसानों ने इन मिलों के खिलाफ आवाज उठाई। यहां तक कई किसानों ने गन्ने की सप्लाई इन मिलों को करने से हाथ खड़े कर दिये इसकी वजह से गन्ना आयुक्त ने इन चीनी मिलों के भी पर कतरने की कार्रवाई करते हुए न सिर्फ इनके गन्ना खरीद केंद्र घटाए बल्कि क्षेत्र का गन्ना रकबा भी लेकर दूसरी चीनी मिलों को दे दिया। इससे किसानों को जहां राहत मिलेगी वहीं इन चीनी मिलों को भी सबक मिलेगा।
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देवीपाटन मंडल में एक सहकारी नानपारा चीनी मिल समेत निजी क्षेत्र की कुल 10 चीनी मिलें संचालित हैं। देश के नेपाल सीमा की कछार से जुड़े देवीपाटन मंडल में 2.58 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की जाती है।
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गन्ना बेल्ट होने के नाते गन्ना किसानों की प्रमुख नगदी फसल है। गन्ने के रक म से ही मंडल के 20 लाख से अधिक किसानों की साल भर न सिर्फ अजीविका चलती है बल्कि इसी के पैसे पर ही उनके रोजमर्रा व बड़े काम भी निर्भर हैं।
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गन्ना खरीद अधिनियम के तहत गन्ना खरीद करने के 14 दिन के अंदर किसानों को मिलों की ओर से भुगतान कर दिया जाना चाहिए। देवीपाटन मंडल में पेराई सत्र 2015-16 में चीनी मिलों ने भुगतान में खूब मनमानी की। चीनी मिलें बाजार में चीनी क ा मूल्य कम होने की दुहाई देकर किसानों का भुगतान सात से आठ महीने तक रोके रखा।
इस मामले में बजाज व चीनी मिल के अधिकारियों पर प्रशासन ने केस भी दर्ज कराया लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इस बार जब गन्ना आयुक्त ने देवीपाटन मंडल के गन्ना सुरक्षण की बैठक की तो उसमें गाेंडा की बजाज चीनी मिल व बहराइच की चिलवरिया चीनी मिल समेत दो अन्य चीनी मिलों की भुगतान की कमी उजागर हुई।
बैठक में किसानों ने भुगतान में मनमानी व दबंगई करने वाली चीनी मिलों की जोरदार मुखालफत कर उन्हें दोबारा गन्ना देने से मना कर दिया। इस मामले की रिपोर्ट शासन व सीएम को भी भेजी गई।
शासन ने मनमानी करने वाली बजाज चिलवरिया, इटईमैदा व नानपारा चीनी मिल क्षेत्रों से न सिर्फ कई हजार हेक्टेयर गन्ना रकबा छीना व बल्कि उनके क्रय केंद्र भी हटाने की कार्रवाई कर दी है।
देवीपाटन मंडल के उप गन्ना आयुक्त अमर सिंह ने बताया कि पेराई सत्र 2016-17 के लिए शासन की ओर से मिलवार गन्ना क्षेत्र का आवंटन कर दिया गया है। पिछले पेराई सत्र में जिन चीनी मिलों के प्रदर्शन खराब थे यानी जिनका खरीद भुगतान की स्थिति ठीक नही थी उनके क्षेत्र का गन्ना रकबा व क्रय केंद्र घटा दिया गया है। चीनी मिलें नये निर्धारित क्रय केंद्र पर गन्ने की खरीद करेंगी।
किसानों को गन्ना मूल्य में झेलाने वाली मिलों की कतार में देवीपाटन मंडल की इटईमैदा व सहकारी नानपारा चीनी मिल भी है। गन्ना रिजर्वेशन के समय भुगतान की स्थिति की समीक्षा में दोनों मिलों की स्थिति अच्छी नहीं पाई गई।
यही नहीं क्षेत्र के गन्ना किसानों ने इन मिलों के खिलाफ आवाज उठाई। यहां तक कई किसानों ने गन्ने की सप्लाई इन मिलों को करने से हाथ खड़े कर दिये इसकी वजह से गन्ना आयुक्त ने इन चीनी मिलों के भी पर कतरने की कार्रवाई करते हुए न सिर्फ इनके गन्ना खरीद केंद्र घटाए बल्कि क्षेत्र का गन्ना रकबा भी लेकर दूसरी चीनी मिलों को दे दिया। इससे किसानों को जहां राहत मिलेगी वहीं इन चीनी मिलों को भी सबक मिलेगा।