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पेट में भूख की चुभन से प्रभावित हो रही 1700 बेटियों की पढ़ाई
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गोंडा में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय।
- फोटो : GONDA
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गोंडा। लॉकडाउन के दौरान कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में सप्लाई के नाम पर हुए 56 लाख के घोटाले का खामियाजा यहां पढ़ने वाली करीब 17 सौ बालिकाओं को भुगतना पड़ रहा है।
घोटाले के बाद कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में बंद हुई सामग्री की सप्लाई के बाद बेटियां को या तो घर से टिफिन लाना पड़ रहा अथवा भूखे पेट ही पढ़ाई को विवश होना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी इन छात्राओं की परेशानी दूर कराने को लेकर उदासीन बने हुए हैं हालांकि सभी वार्डन इस समस्या के बारे में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को अवगत करा चुकी हैं।
जिले में 17 कस्तूरबा स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। मौजूदा समय में किसी भी स्कूल में खाद्य सामग्री नहीं मिल रही है। फरवरी व मार्च माह में हुई दाल, चावल, सूजी व आटा सहित अन्य खाद्य सामग्री की आपूर्ति कोरोना काल में स्कूल बंद रहने से खराब हो चुकी है।
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फरवरी व मार्च 2021 में स्कूल बंद थे। इसके बाद 42 दिनों के लिए खुले स्कूलों में 98 लाख की खाद्य सामग्री की खरीदी की गयी। खरीद के एक दिन बाद से ही स्कूल पुन: बंद करने का आदेश हो गया और सभी छात्राएं अपने घर चली गईं। जब सामग्री की आपूर्ति की गई उस समय केवल 38 प्रतिशत छात्राएं ही स्कूलों में उपस्थिति थी। इसके बावजूद 100 प्रतिशत उपस्थिति पर आपूर्ति करना दिखाया गया।
इस मामले की जांच सीडीओ, डीआईओएस व वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा की टीम ने किया। जांच में सामने आया कि 96 लाख में केवल 40 लाख रुपए की ही सामग्री आपूर्ति की गई है।
इस खेल में करीब 56 लाख का घपला उजागर हुआ। बीती 24 अगस्त को पुन: सभी विद्यालयों को खोलने का आदेश हुआ तो सारे बच्चे स्कूल आने लगे लेकिन खाद्य सामग्री न मिलने के कारण स्कूलों में खाना पकाने का काम ठप पड़ा है।
जिन बच्चों के घर स्कूल के नजदीक हैं वह तो सुबह अपने घर से टिफिन ले आते हैं और जिन बच्चों का घर दूर है उन्हें भूखे पेट ही पढ़ने को विवश होना पड़ता है। करनैलगंज स्कूल का संचालन करने वाली वार्डन सरिता सिंह ने 26 अगस्त को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर इस समस्या से अवगत कराया लेकिन विभाग अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका।
जिले के 17 स्कूलों में तरबगंज, छपिया व नवाबगंज में बच्चों को भोजन देने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वार्डनों को आश्वासन दिया गया है कि वह किसी भी तरह भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित कराए।
इसका भुगतान बाद में कर दिया जाएगा। तीन स्कूलों को छोड़कर अन्य सभी स्कूलों ने नयी व्यवस्था को अपनाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। वार्डनों का कहना है कि तीन दिन में ही एक सिलेंडर लगता है। एक हजार रुपया में सिलिंडर की रिफिल होती है। 100 बेटियों का भोजन दस हजार रुपया में कतई नहीं तैयार हो सकता।
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घोटाले के बाद कस्तूरबा बालिका विद्यालयों में बंद हुई सामग्री की सप्लाई के बाद बेटियां को या तो घर से टिफिन लाना पड़ रहा अथवा भूखे पेट ही पढ़ाई को विवश होना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी इन छात्राओं की परेशानी दूर कराने को लेकर उदासीन बने हुए हैं हालांकि सभी वार्डन इस समस्या के बारे में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को अवगत करा चुकी हैं।
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जिले में 17 कस्तूरबा स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। मौजूदा समय में किसी भी स्कूल में खाद्य सामग्री नहीं मिल रही है। फरवरी व मार्च माह में हुई दाल, चावल, सूजी व आटा सहित अन्य खाद्य सामग्री की आपूर्ति कोरोना काल में स्कूल बंद रहने से खराब हो चुकी है।
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फरवरी व मार्च 2021 में स्कूल बंद थे। इसके बाद 42 दिनों के लिए खुले स्कूलों में 98 लाख की खाद्य सामग्री की खरीदी की गयी। खरीद के एक दिन बाद से ही स्कूल पुन: बंद करने का आदेश हो गया और सभी छात्राएं अपने घर चली गईं। जब सामग्री की आपूर्ति की गई उस समय केवल 38 प्रतिशत छात्राएं ही स्कूलों में उपस्थिति थी। इसके बावजूद 100 प्रतिशत उपस्थिति पर आपूर्ति करना दिखाया गया।
इस मामले की जांच सीडीओ, डीआईओएस व वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा की टीम ने किया। जांच में सामने आया कि 96 लाख में केवल 40 लाख रुपए की ही सामग्री आपूर्ति की गई है।
इस खेल में करीब 56 लाख का घपला उजागर हुआ। बीती 24 अगस्त को पुन: सभी विद्यालयों को खोलने का आदेश हुआ तो सारे बच्चे स्कूल आने लगे लेकिन खाद्य सामग्री न मिलने के कारण स्कूलों में खाना पकाने का काम ठप पड़ा है।
जिन बच्चों के घर स्कूल के नजदीक हैं वह तो सुबह अपने घर से टिफिन ले आते हैं और जिन बच्चों का घर दूर है उन्हें भूखे पेट ही पढ़ने को विवश होना पड़ता है। करनैलगंज स्कूल का संचालन करने वाली वार्डन सरिता सिंह ने 26 अगस्त को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर इस समस्या से अवगत कराया लेकिन विभाग अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका।
जिले के 17 स्कूलों में तरबगंज, छपिया व नवाबगंज में बच्चों को भोजन देने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वार्डनों को आश्वासन दिया गया है कि वह किसी भी तरह भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित कराए।
इसका भुगतान बाद में कर दिया जाएगा। तीन स्कूलों को छोड़कर अन्य सभी स्कूलों ने नयी व्यवस्था को अपनाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। वार्डनों का कहना है कि तीन दिन में ही एक सिलेंडर लगता है। एक हजार रुपया में सिलिंडर की रिफिल होती है। 100 बेटियों का भोजन दस हजार रुपया में कतई नहीं तैयार हो सकता।