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Gonda News: कटियार के बयान के समर्थन में उतरे बृजभूषण
Thu, 18 Jun 2026 11:23 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:23 PM IST
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गोंडा। कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों की उपेक्षा को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन को सफल बनाने में जिन लोगों ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई, मंदिर निर्माण के बाद आज वही लोग सबसे अधिक असुविधा और उपेक्षा महसूस कर रहे हैं।
पूर्व सांसद ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में देवीपाटन मंडल, बस्ती, अयोध्या और बाराबंकी क्षेत्र के लोगों का योगदान सबसे अधिक रहा था। इन क्षेत्रों के हजारों कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने आंदोलन को मजबूत करने के लिए धन, जनशक्ति और हर स्तर पर सहयोग दिया था। आंदोलन के दौरान गांव-गांव से लोग अयोध्या पहुंचते थे और मंदिर निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का काम करते थे।
उन्होंने कहा कि पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से अयोध्या जाकर नागेश्वरनाथ मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन करते थे। कई श्रद्धालुओं की ऐसी आस्था थी कि दर्शन किए बिना वे जल तक ग्रहण नहीं करते थे लेकिन मंदिर निर्माण के बाद लागू सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न स्थानों पर लगाए गए बैरियरों के कारण आम श्रद्धालुओं की पहुंच कठिन हो गई है। इससे आंदोलन से जुड़े लोगों में निराशा और उपेक्षा की भावना बढ़ी है।
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बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय तक लागू रही बैरियर व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई मार्गों के बंद रहने से आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ा। श्रद्धालुओं को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी और आवागमन में समय भी अधिक लगा।
उनका कहना था कि इस व्यवस्था को लेकर अयोध्या, अंबेडकरनगर, बस्ती और बाराबंकी समेत कई क्षेत्रों में लोगों के बीच असंतोष देखने को मिला।
उन्होंने दावा किया कि जनता की नाराजगी का असर चुनावी परिणामों में भी दिखाई दिया और कुछ क्षेत्रों में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ा।
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पूर्व सांसद ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में देवीपाटन मंडल, बस्ती, अयोध्या और बाराबंकी क्षेत्र के लोगों का योगदान सबसे अधिक रहा था। इन क्षेत्रों के हजारों कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने आंदोलन को मजबूत करने के लिए धन, जनशक्ति और हर स्तर पर सहयोग दिया था। आंदोलन के दौरान गांव-गांव से लोग अयोध्या पहुंचते थे और मंदिर निर्माण के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का काम करते थे।
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उन्होंने कहा कि पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से अयोध्या जाकर नागेश्वरनाथ मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन करते थे। कई श्रद्धालुओं की ऐसी आस्था थी कि दर्शन किए बिना वे जल तक ग्रहण नहीं करते थे लेकिन मंदिर निर्माण के बाद लागू सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न स्थानों पर लगाए गए बैरियरों के कारण आम श्रद्धालुओं की पहुंच कठिन हो गई है। इससे आंदोलन से जुड़े लोगों में निराशा और उपेक्षा की भावना बढ़ी है।
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बृजभूषण शरण सिंह ने अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय तक लागू रही बैरियर व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई मार्गों के बंद रहने से आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ा। श्रद्धालुओं को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी और आवागमन में समय भी अधिक लगा।
उनका कहना था कि इस व्यवस्था को लेकर अयोध्या, अंबेडकरनगर, बस्ती और बाराबंकी समेत कई क्षेत्रों में लोगों के बीच असंतोष देखने को मिला।
उन्होंने दावा किया कि जनता की नाराजगी का असर चुनावी परिणामों में भी दिखाई दिया और कुछ क्षेत्रों में पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ा।