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अब बायो डीजल- गैस बनाने के गावों में लगेंगे प्लांट

Fri, 19 Jul 2019 10:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jul 2019 10:06 PM IST
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Bio diesel and gas making plants to be used in villages
गोंडा के कलेक्ट्रेट सभागार में जैव ऊर्जा की बैठक में मौजूद विभिन्न विभागों के अधिकारी। - फोटो : GONDA
गोंडा। विकास के साथ ही अब गांवों को सशक्त बनाने की मुहिम तेज होगी। बॉयो एनर्जी मिशन से गांवों में बायो डीजल व गैस बनाने के प्लांट लगेंगे। इसके लिए एक बार फिर बॉयोगैस संयंत्र को नए ढंग से तैयार करने की रणनीति तैयार हुई है। पंचायतों की ओर से तैयार किए जाने वाली योजनाओं को मनरेगा और पंचायत के बजट से जोड़कर लागू किए जाने का खाका खींचा जा रहा है। योजना को लागू करने के लिए जिला स्तरीय समिति गठित की गई है, जिसमें कृषि, पशुपालन, नाबार्ड, एलडीएम, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड समेत कई विभागों को जोड़ा गया है। इन विभागों के अधिकारियों को प्लानिंग में सहयोग करने के साथ ही योजना को लागू कराने पर जोर दिया गया है।
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जिले में जैव ऊर्जा विकास बोर्ड समिति अब गावों में बायो एनर्जी से जुड़ी गतिविधियों को रफ्तार देगी। 1054 गावों में योजना को लागू करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ ही युवाओं को भी जोड़ा जाएगा। फसलों के अपशिष्ट का प्रयोग बॉयो एनर्जी मिशन में किया जाना है। इसके लिए बॉयोगैस संयंत्र से बिजली तैयार करने के लिए किसानों को आगे लाने के साथ ही जेट्रोफा से बॉयो डीजल बनाने की पहल होगी। यही नहीं उन किसानों को बैंकों से लिंक करके योजना से जोड़ने का प्रयास होगा। इसके लिए इलाहाबाद के बैंक के मुख्य प्रबंधक को समिति में शामिल किया गया है, जिससे योजना शुरू करने में ऋण के लिए आने वाली कठिनाइयों को दूर किया जा सके।
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समिति ने तय की कार्यों को लेकर रणनीति
जैव ऊर्जा विकास बोर्ड समिति ने योजना को लागू करने की रणनीति तैयार की है। पंचायत राज विभाग के स्वच्छता मिशन और मनरेगा से बायोगैस संयंत्र निर्माण कार्य में प्रयोग होने वाले दो लोहे के सांचे क्रय करने को स्वीकृति दी गई है। सांचे से बायोगैस संयंत्र तैयार करने में मदद मिलेगी। जीवन ज्योति व जीवन शक्ति परियोजनाओं को बोर्ड के माध्यम से लागू करने पर सहमति बनी है। कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए हर महीने की 30 तारीख को समिति की बैठक होगी। जिससे आने वाले प्रस्तावों पर अमल हो सके।
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एक पहल से कई लक्ष्य हासिल करने की तैयारी
जैव विकास एक ऐसी पहल है जिससे कई लक्ष्य एक साथ हासिल किए जाएंगे। बायोगैस संयंत्र से बिजली तैयार करने की योजना में गोबर की जरूरत पड़ेगी। इससे पशुपालकों को जोड़ा जाएगा। करीब 11 हजार रुपये की सहायता दिए जाने की व्यवस्था है और एक प्लांट पर 26 हजार रुपये का खर्च आएगा। इससे बिजली उपलब्ध होने के साथ ही पशुओं को पालने में लोगों की रुचि बढ़ेगी। स्वच्छता मिशन को भी रफ्तार मिलेगी, कूड़े का प्रयोग भी हो सकेगा। इसी तरह बॉयो डीजल से लोगों में आत्म निर्भरता आएगी।

र्जव ऊर्जा विकास समिति गठित
जैव ऊर्जा विकास समिति का गठन कर लिया गया है और इससे योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। हर गांव में योजना को लागू करने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की जा रही है। इससे लोगों को स्थायी रोजगार हासिल हो सकेगा। -आशीष कुमार, सीडीओ
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