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माध्यमिक विद्यालयों ने गरीबी के चलते नहीं किया एडमीशन
अमर उजाला/गोंडा
Updated Fri, 15 Apr 2016 10:31 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई में उनकी निर्धनता बाधा बनी हुई है। कक्षा आठ तक की पढ़ाई करने वाले 264 दिव्यांग बच्चे माध्यमिक विद्यालयों में एडमीशन नहीं पा सके। कारण इन बच्चों को निशुल्क प्रवेश देने के साथ उनके किताब आदि का खर्च भी उठाना पड़ता, इसलिए माध्यमिक विद्यालयों ने इन्हें एडमीशन बिना दिए वापस कर दिया।
इतना ही नहीं 937 बालिकाएं जिन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से कक्षा आठ की पढ़ाई की, उन्हें भी प्रवेश नहीं मिला। अब ये क्या कर रही हैं या फिर इनकी पढ़ाई चल रही है, इस बारे में अधिकारी नहीं जानते हैं।
शासन ने यह जिम्मेदारी बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग को सौंपी थी कि निर्धन व दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए और कक्षा आठ पास करने के बाद उनका नामांकन नजदीक के माध्यमिक विद्यालयों में कराया जाए।
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कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में निर्धन व गरीब परिवार के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है, साथ ही कॉपी, किताब, भोजन व रहने के साथ सारी सुविधा दी जाती है। इसलिए शासन की मंशा है कि बालिकाओं की पढ़ाई में अवरोध न हो और उन्हें माध्यमिक की शिक्षा भी नि:शुल्क दी जाए।
जिले में पूर्व माध्यमिक परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में कक्षा आठ उत्तीर्ण करने वाले गरीब बच्चों की आगे की पढ़ाई न रुके, इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से डीआईओएस को सूची भेजी गई, जिससे उनका नामांकन किसी नजदीकी माध्यमिक विद्यालय में कराया जा सके।
इसकी सूची भी भेजी गई, लेकिन इसका अनुपालन आज तक नहीं हुआ कि बच्चे कहां गए। पढ़ रहे हैं या घर बैठ गए। जिले के 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कक्षा आठ उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं का हर हाल में एडमीशन कराना था। वर्ष 2014-15 में 516 गरीब बालिकाओं ने कक्षा आठ उत्तीर्ण किया था।
वर्ष 2015-16 में 421 बालिकाओं ने परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 2015-16 में परीक्षा हो गई है और इनकी सूची भी डीआईओएस कार्यालय को भेजी गई है। इसी तरह 2015-16 में ही परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालयों से कक्षा आठ उत्तीर्ण करने वाले 264 दिव्यांग बच्चों की सूची भी माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन के लिए डीआईओएस को भेजी गई है।
अधिकांश कस्तूरबा विद्यालयों के बच्चे जहां से पढ़कर निकलते हैं, वहां राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय नहीं हैं। ऐसे में वित्त विहीन स्कूलों में इन बच्चों का एडमीशन नहीं हो पा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग से भेजी गई सूची के बारे में माध्यमिक शिक्षा विभाग को जानकारी नहीं है कि बच्चों का एडमीशन हुआ या नहीं।
माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत आईईएसएस (इंटीग्रेटेड एजूकेशन ऑफ सेकेंडरी स्टेज) यानि माध्यमिक स्तर पर एकीकृत शिक्षा के लिए इस बार दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए सात अध्यापकों की नियुक्ति करने का दावा माध्यमिक शिक्षा विभाग कर रहा है।
परिषदीय स्कूलों के अलावा अन्य विद्यालयों के बच्चे जो दिव्यांग होंगे, उन्हें पढ़ाने की पहली बार कोशिश होगी। इससे पहले दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई पर जोर नहीं था। इससे तमाम बच्चे स्कूल छोड़कर घर बैठ गए।
-डॉ. फतेहबहादुर सिंह, बीएसए गोंडा ने बताया कि इस बार कक्षा आठ पास करने वाले 264 दिव्यांग बच्चों की सूची माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन के लिए डीआईओएस के यहां भेजी गई है, लेकिन उसका अभी तक कुछ पता नहीं है। इस बाबत एक पत्र डीआईओएस के यहां फिर भेजा जा रहा है। इसके अलावा हर बार की तरह इस बार कस्तूरबा विद्यालयों की छात्राओं की सूची भी भेजी है।
वीरेंद्र कुमार दूबे, डीआईओएस गोंडा ने कहा कि कक्षा आठ उत्तीर्ण गरीब बच्चों की सूची मिलते ही संबंधित माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को मार्क कर दिया जाता है। इसके बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है। सूची भेजने के बाद अनुपालन नहीं किया। राजकीय व सहायता प्राप्त कॉलेज में तो उनका एडमीशन कराना आसान है, लेकिन यहां अधिकांश विद्यालय वित्त विहीन हैं, जहां बिना फीस जमा किए एडमीशन नहीं हो पाता है। इसके लिए कोई बजट भी नहीं है।
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इतना ही नहीं 937 बालिकाएं जिन्होंने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय से कक्षा आठ की पढ़ाई की, उन्हें भी प्रवेश नहीं मिला। अब ये क्या कर रही हैं या फिर इनकी पढ़ाई चल रही है, इस बारे में अधिकारी नहीं जानते हैं।
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शासन ने यह जिम्मेदारी बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग को सौंपी थी कि निर्धन व दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए और कक्षा आठ पास करने के बाद उनका नामांकन नजदीक के माध्यमिक विद्यालयों में कराया जाए।
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कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में निर्धन व गरीब परिवार के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है, साथ ही कॉपी, किताब, भोजन व रहने के साथ सारी सुविधा दी जाती है। इसलिए शासन की मंशा है कि बालिकाओं की पढ़ाई में अवरोध न हो और उन्हें माध्यमिक की शिक्षा भी नि:शुल्क दी जाए।
जिले में पूर्व माध्यमिक परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में कक्षा आठ उत्तीर्ण करने वाले गरीब बच्चों की आगे की पढ़ाई न रुके, इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से डीआईओएस को सूची भेजी गई, जिससे उनका नामांकन किसी नजदीकी माध्यमिक विद्यालय में कराया जा सके।
इसकी सूची भी भेजी गई, लेकिन इसका अनुपालन आज तक नहीं हुआ कि बच्चे कहां गए। पढ़ रहे हैं या घर बैठ गए। जिले के 17 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कक्षा आठ उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं का हर हाल में एडमीशन कराना था। वर्ष 2014-15 में 516 गरीब बालिकाओं ने कक्षा आठ उत्तीर्ण किया था।
वर्ष 2015-16 में 421 बालिकाओं ने परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्ष 2015-16 में परीक्षा हो गई है और इनकी सूची भी डीआईओएस कार्यालय को भेजी गई है। इसी तरह 2015-16 में ही परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालयों से कक्षा आठ उत्तीर्ण करने वाले 264 दिव्यांग बच्चों की सूची भी माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन के लिए डीआईओएस को भेजी गई है।
अधिकांश कस्तूरबा विद्यालयों के बच्चे जहां से पढ़कर निकलते हैं, वहां राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय नहीं हैं। ऐसे में वित्त विहीन स्कूलों में इन बच्चों का एडमीशन नहीं हो पा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग से भेजी गई सूची के बारे में माध्यमिक शिक्षा विभाग को जानकारी नहीं है कि बच्चों का एडमीशन हुआ या नहीं।
माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत आईईएसएस (इंटीग्रेटेड एजूकेशन ऑफ सेकेंडरी स्टेज) यानि माध्यमिक स्तर पर एकीकृत शिक्षा के लिए इस बार दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए सात अध्यापकों की नियुक्ति करने का दावा माध्यमिक शिक्षा विभाग कर रहा है।
परिषदीय स्कूलों के अलावा अन्य विद्यालयों के बच्चे जो दिव्यांग होंगे, उन्हें पढ़ाने की पहली बार कोशिश होगी। इससे पहले दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई पर जोर नहीं था। इससे तमाम बच्चे स्कूल छोड़कर घर बैठ गए।
-डॉ. फतेहबहादुर सिंह, बीएसए गोंडा ने बताया कि इस बार कक्षा आठ पास करने वाले 264 दिव्यांग बच्चों की सूची माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन के लिए डीआईओएस के यहां भेजी गई है, लेकिन उसका अभी तक कुछ पता नहीं है। इस बाबत एक पत्र डीआईओएस के यहां फिर भेजा जा रहा है। इसके अलावा हर बार की तरह इस बार कस्तूरबा विद्यालयों की छात्राओं की सूची भी भेजी है।
वीरेंद्र कुमार दूबे, डीआईओएस गोंडा ने कहा कि कक्षा आठ उत्तीर्ण गरीब बच्चों की सूची मिलते ही संबंधित माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को मार्क कर दिया जाता है। इसके बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी नहीं है। सूची भेजने के बाद अनुपालन नहीं किया। राजकीय व सहायता प्राप्त कॉलेज में तो उनका एडमीशन कराना आसान है, लेकिन यहां अधिकांश विद्यालय वित्त विहीन हैं, जहां बिना फीस जमा किए एडमीशन नहीं हो पाता है। इसके लिए कोई बजट भी नहीं है।