फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   Basic school,Primary,book,shorteg

यूक्रेन संकट से परिषदीय स्कूलों के छात्रों की पढ़ाई चौपट

Sun, 21 Aug 2022 11:09 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2022 11:09 PM IST
विज्ञापन
Basic school,Primary,book,shorteg
फोटो- 7- गोंडा के कंपोजिट स्कूल पंतनगर में आईं किताबों को उतारते श्रमिक। संवाद - फोटो : GONDA
गोंडा। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले चार लाख से अधिक छात्रों को किताबें नहीं मिल सकी हैं। जिले को किताबों का पूरी तरह आवंटन नहीं हो सका है। 27 लाख से अधिक किताबों के आने के बाद ही सभी छात्रों को किताबें मिल सकेंगी। अभी तक सिर्फ 11 लाख किताबें ही मिल सकीं हैं। किताबों की आपूर्ति में देरी शासन स्तर से टेंडर होने में देरी से हुआ। साथ ही यूक्रेन में युद्ध की स्थिति से किताबों की छपाई के लिए कागज न मिलने से पूरी तरह किताबें छप ही नहीं पाईं हैं।
विज्ञापन

देवीपाटन मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक विनय मोहन वन ने कहा कि किताबों की आपूर्ति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दरअसल यूक्रेन में युद्ध की स्थिति से कागज की आपूर्ति प्रभावित हुई और छपाई में दिक्कत आई है। फिलहाल आपूर्ति में सुधार हो रहा है, प्रकाशकों ने स्थानीय स्तर से कागजों की व्यवस्था की है।
विज्ञापन

प्रकाशकों के सामने कागज न मिलने से दिक्कत की बात सामने आ रही है। किताबों की आपूर्ति जिले में 4 अगस्त से शुरू ह़ई। जो किताबें आईं उनके आधार पर वितरण की कार्रवाई छह अगस्त से विभाग ने शुरू कर दिया। कक्षा आठ के चार लाख 17 हजार छात्रों को पूरी किताबें देने के लिए 27 लाख किताबों की जरूरत है। इसके सापेक्ष अभी तक जिले को 11 लाख किताबें ही मिल सकीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

विभाग के अधिकारियों की ओर से लगातार प्रकाशकों पर दबाव बनाने के बाद इतनी किताबें मिल सकीं हैं। किताबों की छपाई के लिए प्रकाशक यूक्रेन से कागज की खरीद करते थे, जो सस्ता पड़ता था और पर्याप्त मिल जाता था। किताबों का प्रकाशन करने में देरी नहीं होती थी, लेकिन यूक्रेन युद्ध से प्रभावित है, जिससे कागज की आपूर्ति ही नहीं हो पा रही है। इसलिए छपाई प्रभावित है, इससे आपूर्ति में देरी हो रही है। बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह कहते हैं कि कागज न मिलने की समस्या प्रकाशकों की है। उन्हें जो आपूर्ति मिल रही है उसका आवंटन करके बीआरसी के माध्यम से स्कूलों को आपूर्ति कराई जा रही है। जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
किताबों का वितरण नहीं, बच्चे कैसे परीक्षा देंगे
धानेपुर (गोंडा)। परिषदीय विद्यालयों की परीक्षा नजदीक आ चुकी है, लेकिन अभी तक छात्रों को नि:शुल्क पुस्तक नहीं दी गईं है। बीआरसी परिसर में किताबें ढुलाई के अभाव में डंप हैं। छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है।
मुजेहना ब्लॉक में 93 प्राथमिक विद्यालय, 20 उच्च प्राथमिक विद्यालय व 15 कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इन परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत 21 हजार 327 छात्रों को सत्र प्रारंभ होने के चार माह बाद भी नि:शुल्क पुस्तकें नहीं मिल सकीं। जबकि पुस्तकें बीआरसी परिसर के ट्रेनिंग हाल में रखी वितरण की राह देख रही हैं। चार माह बीतने को हैं, परीक्षा भी सिर पर है, और परिषदीय विद्यालय के छात्रों के हाथों में किताब नहीं पहुंच सकीं जो चिंता का विषय है। बीईओ हेमलता त्रिपाठी ने बताया कि बीआरसी पर थोड़ी किताब आई है। अभी किताबें आनी हैं, लेकिन ढुलाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण परिषदीय विद्यालयों तक किताबें नहीं भेजी गई हैं।
जो किताबें जिले में आ रहीं हैं उसे बीआरसी को भिजवाया जा रहा है। बीआरसी से स्कूलों में किताबों का वितरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही और किताबों का आवंटन मिलेगा। अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए

किताबों की आपूर्ति में देरी हुुई है, प्रकाशक तय होने के बाद शासन स्तर से दबाव बनाने पर आपूर्ति शुरू हो हुई है। यूक्रेन में युद्व के कारण कागजों की आपूर्ति से भी दिक्कत होने की बात प्रकाशकों की ओर से कही जा रही है। फिलहाल तीन माह का समय आपूर्ति का दिया गया है और बीएसए को निर्देश दिए गए हैं कि यदि आपूर्ति में देरी हो तो जिलाधिकारी को अवगत कराएं। विनय मोहन वन, सहायक शिक्षा निदेशक, देवीपाटन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed