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Gonda News: जमानत याचिकाएं दो सप्ताह में होंगी निस्तारित
Sat, 06 May 2023 11:10 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sat, 06 May 2023 11:10 PM IST
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जिला जज ब्रजेंद्रमणि त्रिपाठी। - संवाद
गोंडा। सर्वोच्च न्यायालय की तल्ख टिप्पणी के बाद शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दो सप्ताह में जमानत अर्जियों के निस्तारण के लिए जिला अदालतों को आदेश जारी किया था। शनिवार को हाईकोर्ट का आदेश गोंडा की अदालतों में फौरी तौर पर लागू कर दिया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश ब्रजेंद्रमणि त्रिपाठी ने सभी अधीनस्थ अदालतों को उच्च न्यायालय के आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार कुछ अपवाद को छोड़कर जमानत आवेदनों को दो सप्ताह की अवधि में निपटाना होगा। अग्रिम जमानत के लिए प्रस्तुत प्रार्थनापत्रों को छह सप्ताह में निपटाए जाने की व्यवस्था दी गई है। अदालत ने कहा कि अधीनस्थ न्याय पालिका के लिए देश के कानून का पालन करना बाध्यकारी कर्तव्य है।
आपराधिक मामलों में तमाम वह आरोपी भी हैं जो किसी रंजिश अथवा भ्रमवश आरोपी बना दिए गए हैं और उनके विरुद्ध कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन पुलिस उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेज देती है और विभिन्न कारणों से उनके जमानत प्रार्थनापत्रों का महीनों तक निस्तारण नहीं हो पाता।
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गोंडा की जिला एवं सत्र न्यायालय की विभिन्न अदालतों में भी सैकड़ों जमानत प्रार्थनापत्र विचाराधीन हैं। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) बसंत कुमार शुक्ल ने कहा कि दो सप्ताह में जमानत अर्जी निस्तारित करने का प्रावधान लागू होने से ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जो किसी पेशबंदी या रंजिश के कारण मुकदमों में फंसा दिए जाते हैं। विधि मामलों के जानकार और वरिष्ठ अधिवक्ता केके द्विवेदी ने जिला जज के इस दिशा-निर्देश को स्वागत योग्य कदम बताया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ब्रजेंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के क्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को दिशा-निर्देश जारी कर दो सप्ताह में जमानत आवेदनों के निस्तारण के लिए कहा है। इसी क्रम में गोंडा की सभी अधीनस्थ न्यायालयों को हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल प्रभाव से अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है।
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उच्च न्यायालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार कुछ अपवाद को छोड़कर जमानत आवेदनों को दो सप्ताह की अवधि में निपटाना होगा। अग्रिम जमानत के लिए प्रस्तुत प्रार्थनापत्रों को छह सप्ताह में निपटाए जाने की व्यवस्था दी गई है। अदालत ने कहा कि अधीनस्थ न्याय पालिका के लिए देश के कानून का पालन करना बाध्यकारी कर्तव्य है।
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आपराधिक मामलों में तमाम वह आरोपी भी हैं जो किसी रंजिश अथवा भ्रमवश आरोपी बना दिए गए हैं और उनके विरुद्ध कोई ठोस सबूत नहीं है, लेकिन पुलिस उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेज देती है और विभिन्न कारणों से उनके जमानत प्रार्थनापत्रों का महीनों तक निस्तारण नहीं हो पाता।
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गोंडा की जिला एवं सत्र न्यायालय की विभिन्न अदालतों में भी सैकड़ों जमानत प्रार्थनापत्र विचाराधीन हैं। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) बसंत कुमार शुक्ल ने कहा कि दो सप्ताह में जमानत अर्जी निस्तारित करने का प्रावधान लागू होने से ऐसे लोगों को राहत मिलेगी जो किसी पेशबंदी या रंजिश के कारण मुकदमों में फंसा दिए जाते हैं। विधि मामलों के जानकार और वरिष्ठ अधिवक्ता केके द्विवेदी ने जिला जज के इस दिशा-निर्देश को स्वागत योग्य कदम बताया है।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश ब्रजेंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के क्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को दिशा-निर्देश जारी कर दो सप्ताह में जमानत आवेदनों के निस्तारण के लिए कहा है। इसी क्रम में गोंडा की सभी अधीनस्थ न्यायालयों को हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल प्रभाव से अनुपालन करने का निर्देश दिया गया है।