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Gonda News: ऑडिट टीम ने पकड़ी 1.94 करोड़ की अनियमितता
Thu, 19 Jun 2025 11:38 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 19 Jun 2025 11:38 PM IST
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गोंडा। लेखा परीक्षा टीम ने ऑडिट के दौरान चार साल पहले पंडरी कृपाल ब्लाॅक में कराए गए विकास कार्यों में 1.94 करोड़ रुपये का गोलमाल पकड़ा है। विकास के लिए क्षेत्र पंचायत को आवंटित धनराशि को लेखाकार व अफसरों ने खर्च दिखा दिया, लेकिन व्यय अभिलेख नहीं उपलब्ध करा पाए। लेखा परीक्षा अधिकारी ने लेखाकार चंद्रिका प्रसाद जायसवाल, छह बीडीओ पुष्पा, कुलदीप, ओम प्रकाश सिंह, एनबी सविता, शेर बहादुर सिंह, आत्रेय मिश्रा, जेई राम नयन व कार्य प्रभारी सुधीर कुमार सिंह को दोषी ठहराते हुए सभी से बराबर हिस्सों में धनराशि वसूली करने को कहा है।
क्षेत्र में विकास के लिए पंचायतों को मिलने वाली धनराशि का ऑडिट जिला लेखा परीक्षाधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायत द्वारा किया जाता है। पंडरी कृपाल में ऑडिट के दौरान पता चला कि वित्तीय साल 2021-22 में क्षेत्र पंचायत ने सामग्री मद में एक करोड़ 92 लाख 83 हजार 125 रुपये खर्च किया। निर्माण पत्रावलियों की जांच में पता चला कि यह भुगतान केवल सामग्री मद में ही किया।
किसी भी पत्रावली में न तो मस्टर रोल मिला और न ही मजदूरी के मद में भुगतान पाया गया। क्षेत्र पंचायत निर्माण कार्य नियमावली 1984 में मस्टर रोल रखने का प्रावधान है। क्रय सामग्री के संबंध में कोई स्टाॅक पंजिका नहीं मिली। क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत बजट एवं लेखा नियमावली 1986 में दी गई व्यवस्था के अनुसार इसे धन का दुरुपयोग माना गया।
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ऑडिट टीम ने तत्कालीन लेखाकार चंद्रिका प्रसाद जायसवाल, छह खंड विकास अधिकारियों पुष्पा, कुलदीप, ओम प्रकाश सिंह, एनबी सविता, शेर बहादुर सिंह, आत्रेय मिश्रा, जेई राम नयन व कार्य प्रभारी सुधीर कुमार सिंह से धनराशि वसूली करने को कहा है।
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क्षेत्र में विकास के लिए पंचायतों को मिलने वाली धनराशि का ऑडिट जिला लेखा परीक्षाधिकारी सहकारी समितियां एवं पंचायत द्वारा किया जाता है। पंडरी कृपाल में ऑडिट के दौरान पता चला कि वित्तीय साल 2021-22 में क्षेत्र पंचायत ने सामग्री मद में एक करोड़ 92 लाख 83 हजार 125 रुपये खर्च किया। निर्माण पत्रावलियों की जांच में पता चला कि यह भुगतान केवल सामग्री मद में ही किया।
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किसी भी पत्रावली में न तो मस्टर रोल मिला और न ही मजदूरी के मद में भुगतान पाया गया। क्षेत्र पंचायत निर्माण कार्य नियमावली 1984 में मस्टर रोल रखने का प्रावधान है। क्रय सामग्री के संबंध में कोई स्टाॅक पंजिका नहीं मिली। क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत बजट एवं लेखा नियमावली 1986 में दी गई व्यवस्था के अनुसार इसे धन का दुरुपयोग माना गया।
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ऑडिट टीम ने तत्कालीन लेखाकार चंद्रिका प्रसाद जायसवाल, छह खंड विकास अधिकारियों पुष्पा, कुलदीप, ओम प्रकाश सिंह, एनबी सविता, शेर बहादुर सिंह, आत्रेय मिश्रा, जेई राम नयन व कार्य प्रभारी सुधीर कुमार सिंह से धनराशि वसूली करने को कहा है।