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अंकित हत्याकांड : पांच दिन बाद भी पुलिस व जीआरपी में सीमा-विवाद

Wed, 31 Jan 2024 12:28 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Wed, 31 Jan 2024 12:28 AM IST
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Ankit murder case: Border dispute between police and GRP even after five days
गोंडा। जीआरपी और नगर कोतवाली पुलिस पांच दिन बाद भी सीमा विवाद में उलझी रहीं। नर्सिंग सहायक अंकित तिवारी (23) की हत्या में केस दर्ज करने के पांच दिन बाद मंगलवार तक आरोपियों को पकड़ना तो दूर पुलिस की जांच भी नहीं शुरू हो सकी। जीआरपी केस नगर कोतवाली को ट्रांसफर करने के लिए जुगत कर रही है। वहीं नगर कोतवाली पुलिस के हाथ भी खाली हैं। इतना ही नहीं पुलिस के रवैये से पीड़ित परिवार निराश है। पीड़ित परिवार को अंदेशा है कि तफ्तीश में देरी का फायदा उठाकर आरोपी साक्ष्य मिटा सकते हैं।
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जीआरपी की ओर से दावा किया गया कि मामले की प्रारंभिक जांच की गई। नगर कोतवाली क्षेत्र का मामला होने का दावा कर केस ट्रांसफर के लिए मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी गई। जीआरपी की ओर से मंगलवार को दावा किया गया कि केस नगर कोतवाली पुलिस को ट्रांसफर हो गया। अब नगर कोतवाली पुलिस नए सिरे से मामले की तफ्तीश करेगी। मृतक अंकित के चाचा सुनील तिवारी का कहना है कि उन्हें पुलिस जांच की अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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बता दें कि 25 जनवरी को सतईपुरवा स्थित रेलवे ट्रैक पर नर्सिंग सहायक अंकित तिवारी (23) का शव जीआरपी को पड़ा मिला था। शरीर पर गहरे चोट के निशान मिले थे। बेरहमी से पीटकर उसकी हत्या की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि के बाद पुलिस ने नारायण हाॅस्पिटल एंड कैंसर रिसर्च सेंटर के डॉ. दीपक सिंह समेत अन्य के खिलाफ हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। जीआरपी कोतवाल अरविंद शर्मा ने बताया कि मुख्यालय से अंकित हत्याकांड के मुकदमे की तफ्तीश जिले की पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई है।
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जांच में सभी को सहयोग करना चाहिए
हत्या से पहले अंकित के पिता अनिल से बात करते हुए एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें आरोपी डॉ. दीपक सिंह और स्वाशाषी राज चिकित्सा महाविद्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. कुलदीप पांडेय की बातचीत हो रही है। डॉ. कुलदीप पांडेय ने बताया कि अंकित बेहद मिलनसार, अच्छा और आज्ञाकारी था। पूर्व में उनके साथ मेडिकल कॉलेज में काम कर चुका है। उनके ही माध्यम से उसे नारायण हाॅस्पिटल एंड कैंसर रिसर्च सेंटर में नौकरी मिली थी। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना तो कभी सोची नहीं जा सकती थी। जो कुछ हुआ ठीक नहीं है। हम सभी को न्याय व्यवस्था में दखल नहीं देना चाहिए। जांच में सहयोग करना चाहिए।

देरी से मिटाए जा सकते हैं साक्ष्य
जानकारों का कहना है कि पुलिस जांच में देरी से साक्ष्य मिटाए जा सकते हैं। आसपास सीसीटीवी कैमरे से हत्या का राजफाश हो सकता है। अभी तक हत्या आरोपियों को पुलिस ने हिरासत में भी लेना मुनासिब नहीं समझा है। ऐसे में मामले में लीपापोती की आशंका है। अंकित का मोबाइल फोन भी बरामद नहीं हो सका है। जानकारों का कहना है कि अंकित के मोबाइल फोन से मामले का खुलासा हो सकता है।
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