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Gonda News: चार महीने के लिए सभी मांगलिक कार्य बंद
Wed, 17 Jul 2024 10:35 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 17 Jul 2024 10:35 PM IST
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गोंडा। देवशयनी एकादशी पर बुधवार को लोगों ने व्रत रखकर भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना की। इसी के साथ अगले चार महीने के लिए हिंदू धर्म में सभी मांगलिक कार्यक्रम बंद हो गए। तिलक, विवाह, मुंडन व गृह प्रवेश के लिए चार महीने तक इंतजार करना पड़ेगा। सहालग न होने से बाजार पर भी असर पड़ेगा। 11 नवंबर के बाद फिर से बाजार में रौनक बढ़ जाएगी।
आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी को पवित्र देवशयनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस समय को चतुर्मास काल कहा जाता है। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। काजीदेवर निवासी पंडित राकेशदत्त शास्त्री ने बताया कि इस दौरान सूर्य, चंद्रमा व प्रकृति का तेज भी कम हो जाता है। दैव शक्तियां सो जाती हैं, जिससे इस दौरान किया गया शुभ कार्य भी अशुभ हो सकता है। भगवान विष्णु आगामी 11 नवंबर को फिर से लोक कल्याण के लिए जागेंगे।
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चतुर्मास में भगवान शिव की पूजा करना शुभ
देवशयनी एकादशी के बाद जब भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा में चले जाते हैं, तो भगवान शिव जगत का कार्यभार संभालते हैं। इसीलिए चतुर्मास के दौरान भगवान शिव की पूजा का बड़ा महत्व माना गया है। सावन में भगवान शिव की विधि-विधान से आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं। 16 सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करने से योग्य वर या वधू मिलती है।
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चतुर्मास काल में इन चीजों से करें परहेज
चतुर्मास काल में सात्विक भोजन का सेवन करें, मांसाहार से परहेज करें।
शराब व अन्य मादक वस्तुओं के सेवन से बचें, भगवान महादेव की आराधना करें।
आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी को पवित्र देवशयनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस समय को चतुर्मास काल कहा जाता है। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। काजीदेवर निवासी पंडित राकेशदत्त शास्त्री ने बताया कि इस दौरान सूर्य, चंद्रमा व प्रकृति का तेज भी कम हो जाता है। दैव शक्तियां सो जाती हैं, जिससे इस दौरान किया गया शुभ कार्य भी अशुभ हो सकता है। भगवान विष्णु आगामी 11 नवंबर को फिर से लोक कल्याण के लिए जागेंगे।
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चतुर्मास में भगवान शिव की पूजा करना शुभ
देवशयनी एकादशी के बाद जब भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा में चले जाते हैं, तो भगवान शिव जगत का कार्यभार संभालते हैं। इसीलिए चतुर्मास के दौरान भगवान शिव की पूजा का बड़ा महत्व माना गया है। सावन में भगवान शिव की विधि-विधान से आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं। 16 सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करने से योग्य वर या वधू मिलती है।
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चतुर्मास काल में इन चीजों से करें परहेज
चतुर्मास काल में सात्विक भोजन का सेवन करें, मांसाहार से परहेज करें।
शराब व अन्य मादक वस्तुओं के सेवन से बचें, भगवान महादेव की आराधना करें।