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गोंडा को कृषि विश्वविद्यालय की सौगात
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Feb 2016 11:30 PM IST
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3.46 लाख करोड़ रुपये के बजट में गोंडा को प्रदेश सरकार ने कृषि विश्वविद्यालय व 10 साल पहले मिला इंजीनियरिंग कॉलेज जो वापस हो गया था, उसे सौगात के रूप में वापस कर दिया है। यह सिर्फ गोंडा के लिए ही नहीं, अपितु देवीपाटन मंडल सहित पूर्वांचल के लाखों छात्र-छात्राओं व कृषि वैज्ञानिकों के लिए बड़ी सौगात साबित होगा। शोध व नई तकनीकों के विकास में गोंडा का नाम भी कृषि क्षेत्र में देश के मानचित्र में दर्ज हो जाएगा।
देवीपाटन मंडल मुख्यालय कृषि हब के रूप में विकसित होता जा रहा है। प्रदेश सरकार ने बीते बजट में करनैलगंज में कृषि महाविद्यालय के निर्माण की घोषणा की थी और उसमें कुछ बजट भी आवंटित कर दिया था। इसकी आधार शिला स्वयं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखी थी।
वर्ष 2016-17 के बजट में गोंडा में कृषि विश्वविद्यालय निर्माण की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में केवल दो ही कृषि विश्वविद्यालय हैं। एक तो कानपुर तथा दूसरा कुमारगंज फैजाबाद में है। यदि इसका निर्माण हुआ तो यह प्रदेश का तीसरा कृषि विश्वविद्यालय होगा जो अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण है।
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कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र सिंह का कहना है कि यह तो बहुत ही सुखद है। किसी शोध या किसानों को नई तकनीक के बारे में जानकारी देने के लिए कुमारगंज या कानपुर ले जाना पड़ता है या फिर यूपी में अधिकांश बीजों व अन्य कृषि उत्पादों के लिए पंतनगर उत्तराखंड पर निर्भर रहना पड़ता था।
गोंडा में कृषि विश्वविद्यालय बनने से बहुत सहूलियत मिलेगी। कृषि विषय से एमएससी कर रहे छात्र नरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि अब शोध के लिए दूर-दूर तक भटकना नहीं पड़ेगा।
संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. आरसी शुक्ल, उपनिदेशक श्रवण कुमार ने भी इसके लिए प्रदेश सरकार की सराहना की। उधर, डीएम अजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि बजट में प्रावधान किया गया है। इसके लिए शासन से निर्देश मिलते ही जमीन की व्यवस्था की जाएगी।
वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने गोंडा में आईटी बेस इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण की घोषणा की थी। 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस इंजीनियरिंग कॉलेज को बसपा शासनकाल में वर्ष 2007 में वापस कर लिया गया। इसमें बजट भी एक किश्त दी गई थी।
2012 के विधानसभा चुनाव में सदर विधायक विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह ने वादा किया था कि सरकार बनने पर इंजीनियरिंग कॉलेज वापस लाया जाएगा। पांचवें बजट में यह प्रयास सफल रहा और प्रदेश सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया है।
यह इंजीनियरिंग कॉलेज यदि पुराने स्थान पर निर्मित होगा तो इसमें जमीन की समस्या भी नहीं होगी। राजकीय पॉलीटेकिभनक परिसर में जमीन का चिन्हांकन भी किया गया था।
जिले के 389 वित्त विहीन विद्यालयों के करीब चार हजार शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों को पांच हजार रुपये मानदेय देने की घोषणा की थी। इसके बाद से लगातार शिक्षक धरना-प्रदर्शन कर मांग रखते रहे।
अंतिम बजट में भले ही यह चुनावी बजट कहा जाए, लेकिन यहां मानदेय का प्रावधान होते ही चार हजार शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। शिक्षकों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
मंगुरा बाजार के दयानंद शिक्षण संस्थान इंटर कॉलेज व बालपुर राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों ने प्रसन्नता जताई। वित्तविहीन शिक्षक गंगा प्रसाद शुक्ल, राम चरण, अनिल उपाध्याय व संतोष शुक्ल ने कहा कि जिले के चार हजार वित्तविहीन शिक्षकों का भाग्य आज उदय हो गया। मानदेय के बजट में शामिल हो जाने से वित्तविहीन शिक्षकों की दीन-हीन दशा में सुधार आ जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता कायदे आजम लारी की मानें तो इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले गोंडा-जरवल के बीच बनने वाली 46 किलोमीटर फोर लेन रोड के लिए सरकार से उन्हें पैसा मिल जाएगा।
गोंडा-जरवल के बीच 46 किलोमीटर दूरी में बनने वाली इस फोर लेन सड़क की कुल लागत 400 करोड़ रुपये है। जिसका निर्माण बजाय किसी बाहरी एजेंसी के खुद पीडब्ल्यूडी ही कराएगा।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की मानें तो प्रदेश सरकार ने जिस 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान जिला मुख्यालयों को फोरलेन सड़क से जोड़ने के लिए किया है, उसमें गोंडा भी शामिल है।
वहीं शुक्रवार को पेश हुए बजट में जिले में चल रहे सड़क निर्माण के तमाम अधूरे कार्यों के लिए भी बजट की व्यवस्था की गई है।
वहीं गोंडा से मसकनवा जाने वाली रोड पर पड़ने वाले भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली स्वामीनाथ छपिया मंदिर तक जाने वाले रास्ते के निर्माण की भी व्यवस्था सरकार ने इस बजट में की है।
सरकार के अनुपूरक बजट में आपदा प्रभावित किसानों को राहत पैकेज की व्यवस्था किये जाने से आपदा के मारे किसानों में मदद मिलने की आस जगी है। जिले के करीब दो लाख से अधिक ऐसे किसान हैं, जिनकी पिछले रबी सीजन में बेमौसम बारिश से तबाह हो गई थीं।
इस प्राकृतिक आपदा से सूखे से करीब 2.50 लाख किसानों की कमर ही टूट गई। अनुपूरक बजट में सरकार ने ऐसे किसानों को राहत देने के लिए बजट में प्रावधान किया है।
बजट की रकम बहुत तो नहीं है, लेकिन कुछ किसानों को इसका फायदा मिलने का रास्ता दिखा है। जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह का कहना है कि विभाग की ओर से आपदा प्रभावित किसानों के लिए बजट की मांग की गई थी। पैसा आते ही किसानों में बांटा जाएगा।
नये बजट से गन्ना किसानों का बकाया गन्ना मूल्य जल्द मिल सकेगा। जिले की चीनी मिलों के अलावा जिले के किसानों से पड़ोस के जिलों की चीनी मिलों के गन्ना खरीद करने वाली चीनी मिलें किसानों का करीब एक अरब रुपये दबाए हैं। जिसमें 70 करोड़ रुपये अकेले कुंदुरखी चीनी मिल ने दबा रखा है।
चीनी मिलें अपने मजबूरी का रोना रो रही हैं। प्रदेश सरकार के अपने बजट में 1366 करोड़ रु पये का प्रावधान करने से अब जिले के किसानों को चीनी मिलें जल्द गन्ना मूल्य भुगतान करेंगी।
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि चीनी मिलों से किसानों के बकाये का भुगतान कराने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में सरकार के चीनी मिलों को राहत मिलने से किसानों के बकाए का भुगतान जल्द हो सकेगा।
समाजवादी व वृद्धावस्था पेंशन योजना के आवेदकों को अब योजना का लाभ मिलेगा। सरकार ने अपने अनुपूरक बजट में गरीबों को समाजवादी पेंशन व वृद्धजनों को पेंशन योजना का लाभ दिलाने के लिये व्यवस्था की है।
जिले में समाजवादी पेंशन के करीब एक लाख व वृद्धावस्था पेंशन के लिए करीब 30 हजार आवेदक कतार में खड़े हैं। बजट व सरकार की ओर से लक्ष्य न मिलने से इन गरीबों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लेकिन अब ऐसे आवेदकों को उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि जिला समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह का कहना है कि अभी उनके पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है कि कितने लोगों को लाभ दिया जाना है। सरकार की ओर से बजट मिलने लक्ष्य का निर्धारण कर सर्वे कराने के बाद नये आवेदकों को शामिल किया जाएगा।
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देवीपाटन मंडल मुख्यालय कृषि हब के रूप में विकसित होता जा रहा है। प्रदेश सरकार ने बीते बजट में करनैलगंज में कृषि महाविद्यालय के निर्माण की घोषणा की थी और उसमें कुछ बजट भी आवंटित कर दिया था। इसकी आधार शिला स्वयं मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रखी थी।
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वर्ष 2016-17 के बजट में गोंडा में कृषि विश्वविद्यालय निर्माण की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में केवल दो ही कृषि विश्वविद्यालय हैं। एक तो कानपुर तथा दूसरा कुमारगंज फैजाबाद में है। यदि इसका निर्माण हुआ तो यह प्रदेश का तीसरा कृषि विश्वविद्यालय होगा जो अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण है।
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कृषि विज्ञान केंद्र गोपाल ग्राम के वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र सिंह का कहना है कि यह तो बहुत ही सुखद है। किसी शोध या किसानों को नई तकनीक के बारे में जानकारी देने के लिए कुमारगंज या कानपुर ले जाना पड़ता है या फिर यूपी में अधिकांश बीजों व अन्य कृषि उत्पादों के लिए पंतनगर उत्तराखंड पर निर्भर रहना पड़ता था।
गोंडा में कृषि विश्वविद्यालय बनने से बहुत सहूलियत मिलेगी। कृषि विषय से एमएससी कर रहे छात्र नरेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि अब शोध के लिए दूर-दूर तक भटकना नहीं पड़ेगा।
संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. आरसी शुक्ल, उपनिदेशक श्रवण कुमार ने भी इसके लिए प्रदेश सरकार की सराहना की। उधर, डीएम अजय कुमार उपाध्याय ने कहा कि बजट में प्रावधान किया गया है। इसके लिए शासन से निर्देश मिलते ही जमीन की व्यवस्था की जाएगी।
वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने गोंडा में आईटी बेस इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण की घोषणा की थी। 100 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस इंजीनियरिंग कॉलेज को बसपा शासनकाल में वर्ष 2007 में वापस कर लिया गया। इसमें बजट भी एक किश्त दी गई थी।
2012 के विधानसभा चुनाव में सदर विधायक विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह ने वादा किया था कि सरकार बनने पर इंजीनियरिंग कॉलेज वापस लाया जाएगा। पांचवें बजट में यह प्रयास सफल रहा और प्रदेश सरकार ने इंजीनियरिंग कॉलेज निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया है।
यह इंजीनियरिंग कॉलेज यदि पुराने स्थान पर निर्मित होगा तो इसमें जमीन की समस्या भी नहीं होगी। राजकीय पॉलीटेकिभनक परिसर में जमीन का चिन्हांकन भी किया गया था।
जिले के 389 वित्त विहीन विद्यालयों के करीब चार हजार शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बीते विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने वित्त विहीन विद्यालयों के शिक्षकों को पांच हजार रुपये मानदेय देने की घोषणा की थी। इसके बाद से लगातार शिक्षक धरना-प्रदर्शन कर मांग रखते रहे।
अंतिम बजट में भले ही यह चुनावी बजट कहा जाए, लेकिन यहां मानदेय का प्रावधान होते ही चार हजार शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। शिक्षकों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
मंगुरा बाजार के दयानंद शिक्षण संस्थान इंटर कॉलेज व बालपुर राष्ट्रीय इंटर कॉलेज में शिक्षकों ने प्रसन्नता जताई। वित्तविहीन शिक्षक गंगा प्रसाद शुक्ल, राम चरण, अनिल उपाध्याय व संतोष शुक्ल ने कहा कि जिले के चार हजार वित्तविहीन शिक्षकों का भाग्य आज उदय हो गया। मानदेय के बजट में शामिल हो जाने से वित्तविहीन शिक्षकों की दीन-हीन दशा में सुधार आ जाएगा।
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता कायदे आजम लारी की मानें तो इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले गोंडा-जरवल के बीच बनने वाली 46 किलोमीटर फोर लेन रोड के लिए सरकार से उन्हें पैसा मिल जाएगा।
गोंडा-जरवल के बीच 46 किलोमीटर दूरी में बनने वाली इस फोर लेन सड़क की कुल लागत 400 करोड़ रुपये है। जिसका निर्माण बजाय किसी बाहरी एजेंसी के खुद पीडब्ल्यूडी ही कराएगा।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की मानें तो प्रदेश सरकार ने जिस 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान जिला मुख्यालयों को फोरलेन सड़क से जोड़ने के लिए किया है, उसमें गोंडा भी शामिल है।
वहीं शुक्रवार को पेश हुए बजट में जिले में चल रहे सड़क निर्माण के तमाम अधूरे कार्यों के लिए भी बजट की व्यवस्था की गई है।
वहीं गोंडा से मसकनवा जाने वाली रोड पर पड़ने वाले भगवान घनश्याम महराज की जन्मस्थली स्वामीनाथ छपिया मंदिर तक जाने वाले रास्ते के निर्माण की भी व्यवस्था सरकार ने इस बजट में की है।
सरकार के अनुपूरक बजट में आपदा प्रभावित किसानों को राहत पैकेज की व्यवस्था किये जाने से आपदा के मारे किसानों में मदद मिलने की आस जगी है। जिले के करीब दो लाख से अधिक ऐसे किसान हैं, जिनकी पिछले रबी सीजन में बेमौसम बारिश से तबाह हो गई थीं।
इस प्राकृतिक आपदा से सूखे से करीब 2.50 लाख किसानों की कमर ही टूट गई। अनुपूरक बजट में सरकार ने ऐसे किसानों को राहत देने के लिए बजट में प्रावधान किया है।
बजट की रकम बहुत तो नहीं है, लेकिन कुछ किसानों को इसका फायदा मिलने का रास्ता दिखा है। जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह का कहना है कि विभाग की ओर से आपदा प्रभावित किसानों के लिए बजट की मांग की गई थी। पैसा आते ही किसानों में बांटा जाएगा।
नये बजट से गन्ना किसानों का बकाया गन्ना मूल्य जल्द मिल सकेगा। जिले की चीनी मिलों के अलावा जिले के किसानों से पड़ोस के जिलों की चीनी मिलों के गन्ना खरीद करने वाली चीनी मिलें किसानों का करीब एक अरब रुपये दबाए हैं। जिसमें 70 करोड़ रुपये अकेले कुंदुरखी चीनी मिल ने दबा रखा है।
चीनी मिलें अपने मजबूरी का रोना रो रही हैं। प्रदेश सरकार के अपने बजट में 1366 करोड़ रु पये का प्रावधान करने से अब जिले के किसानों को चीनी मिलें जल्द गन्ना मूल्य भुगतान करेंगी।
जिला गन्ना अधिकारी पीएन सिंह ने बताया कि चीनी मिलों से किसानों के बकाये का भुगतान कराने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में सरकार के चीनी मिलों को राहत मिलने से किसानों के बकाए का भुगतान जल्द हो सकेगा।
समाजवादी व वृद्धावस्था पेंशन योजना के आवेदकों को अब योजना का लाभ मिलेगा। सरकार ने अपने अनुपूरक बजट में गरीबों को समाजवादी पेंशन व वृद्धजनों को पेंशन योजना का लाभ दिलाने के लिये व्यवस्था की है।
जिले में समाजवादी पेंशन के करीब एक लाख व वृद्धावस्था पेंशन के लिए करीब 30 हजार आवेदक कतार में खड़े हैं। बजट व सरकार की ओर से लक्ष्य न मिलने से इन गरीबों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लेकिन अब ऐसे आवेदकों को उम्मीद बढ़ी है।
हालांकि जिला समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह का कहना है कि अभी उनके पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है कि कितने लोगों को लाभ दिया जाना है। सरकार की ओर से बजट मिलने लक्ष्य का निर्धारण कर सर्वे कराने के बाद नये आवेदकों को शामिल किया जाएगा।