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ग्रीन सब्जी के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी का करें प्रयोग
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मनकापुर (गोंडा)। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मनकापुर के उद्यान अनुभाग द्वारा शुक्रवार को केंद्र पर प्रगतिशील कृषकों को सब्जी पौधशाला प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण दिया गया। केंद्र के वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. रामलखन सिंह ने सब्जी पौधशाला तैयार करने एवं उन्नतशील प्रजाति के चयन पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि सब्जी की उन्नतशील प्रजाति के पौधे तैयार कर खेत में लगाने से फसल की गुणवत्तापूर्ण अच्छी पैदावार मिलती है। पौधशाला तैयार करते समय दोमट या बलुई दोमट मिट्टी वाले ऊंचे खेत का चयन करें । जिससे जल निकास का उत्तम प्रबंध हो। इसके साथ ही जीवांश पदार्थ की अच्छी मात्रा हो। पौधशाला के लिए सवा मीटर चौड़ी एवं आवश्यकतानुसार 8 से 10 मीटर लंबाई की क्यारियां बना लेते हैं। दो क्यारियों के बीच में आधा मीटर की दूरी और सिंचाई आदि कार्य करने के लिए कोई असुविधा न हो। क्यारियों को अच्छी तरह जुताई करके खरपतवार रहित कर दिया जाता है। गोबर की सड़ी खाद, नाडेप कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट अच्छी तरह से मिला देते हैं। साथ ही संस्तुति के अनुसार रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। डॉ मनोज कुमार सिंह उद्यान वैज्ञानिक ने गोभी की उन्नतशील प्रजातियों नरेंद्र गोभी- एक के बारे में बताया कि प्रति एकड़ लगभग 100 कुंटल उपज प्राप्त होती है। इसके साथ ही प्रति फूल का भार लगभग 700 ग्राम होता है।
बताया कि बैंगन की प्रजातियों में नरेंद्र बैंगन एक, नरेंद्र बैगन दो, नरेंद्र बैगन तीन की उपज लगभग 120 से 140 क्विंटल प्रति एकड़ प्राप्त होती है। टमाटर की प्रजातियों में नरेंद्र टमाटर एक, नरेंद्र टमाटर दो, नरेंद्र टमाटर पांच, नरेंद्र टमाटर 7 व नरेंद्र टमाटर 8 की उपज 160 क्विंटल प्रति एकड़ प्राप्त होती है। फूलगोभी की प्रजातियों में पूसा दीपाली, पूसा संकर दो, पूसा शरद पूसा स्नोबॉल एक, पूसा गोभी तीन पात गोभी की प्रजातियों में प्राईड आफ इंडिया, गोल्डन एकर, पूसा अगेती, टमाटर की प्रजातियों में पंजाब छुहारा, अर्का रक्षक, पूसा रोहिणी, काशी अमन तथा मिर्च की प्रजातियों में पूसा सदाबहार, कल्याणपुर, काशी अनमोल, चंचल पंत सी-1, पूसा ज्वाला आदि मुख्य हैं । इस मौके पर प्रगतिशील कृषक अयोध्या प्रसाद वर्मा पलटन यादव आदि दर्जनों लोगों ने प्रतिभाग कर सब्जी पौधशाला प्रबंध की जानकारी प्राप्त की।
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उन्होंने बताया कि सब्जी की उन्नतशील प्रजाति के पौधे तैयार कर खेत में लगाने से फसल की गुणवत्तापूर्ण अच्छी पैदावार मिलती है। पौधशाला तैयार करते समय दोमट या बलुई दोमट मिट्टी वाले ऊंचे खेत का चयन करें । जिससे जल निकास का उत्तम प्रबंध हो। इसके साथ ही जीवांश पदार्थ की अच्छी मात्रा हो। पौधशाला के लिए सवा मीटर चौड़ी एवं आवश्यकतानुसार 8 से 10 मीटर लंबाई की क्यारियां बना लेते हैं। दो क्यारियों के बीच में आधा मीटर की दूरी और सिंचाई आदि कार्य करने के लिए कोई असुविधा न हो। क्यारियों को अच्छी तरह जुताई करके खरपतवार रहित कर दिया जाता है। गोबर की सड़ी खाद, नाडेप कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट अच्छी तरह से मिला देते हैं। साथ ही संस्तुति के अनुसार रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है। डॉ मनोज कुमार सिंह उद्यान वैज्ञानिक ने गोभी की उन्नतशील प्रजातियों नरेंद्र गोभी- एक के बारे में बताया कि प्रति एकड़ लगभग 100 कुंटल उपज प्राप्त होती है। इसके साथ ही प्रति फूल का भार लगभग 700 ग्राम होता है।
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बताया कि बैंगन की प्रजातियों में नरेंद्र बैंगन एक, नरेंद्र बैगन दो, नरेंद्र बैगन तीन की उपज लगभग 120 से 140 क्विंटल प्रति एकड़ प्राप्त होती है। टमाटर की प्रजातियों में नरेंद्र टमाटर एक, नरेंद्र टमाटर दो, नरेंद्र टमाटर पांच, नरेंद्र टमाटर 7 व नरेंद्र टमाटर 8 की उपज 160 क्विंटल प्रति एकड़ प्राप्त होती है। फूलगोभी की प्रजातियों में पूसा दीपाली, पूसा संकर दो, पूसा शरद पूसा स्नोबॉल एक, पूसा गोभी तीन पात गोभी की प्रजातियों में प्राईड आफ इंडिया, गोल्डन एकर, पूसा अगेती, टमाटर की प्रजातियों में पंजाब छुहारा, अर्का रक्षक, पूसा रोहिणी, काशी अमन तथा मिर्च की प्रजातियों में पूसा सदाबहार, कल्याणपुर, काशी अनमोल, चंचल पंत सी-1, पूसा ज्वाला आदि मुख्य हैं । इस मौके पर प्रगतिशील कृषक अयोध्या प्रसाद वर्मा पलटन यादव आदि दर्जनों लोगों ने प्रतिभाग कर सब्जी पौधशाला प्रबंध की जानकारी प्राप्त की।
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