फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   aganwadi

आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला, नौनिहालों के भविष्य पर संकट

Fri, 17 Dec 2021 11:36 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 11:36 PM IST
विज्ञापन
aganwadi
रूपईडीह (गोंडा)। बाल विकास के आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहालों की शिक्षा-दीक्षा कागजों तक ही सीमित रह गई है। ब्लॉक की 106 ग्राम पंचायतों में 184 आंगनबाड़ी केंद्रों और 22 मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। जिसमें करीब डेढ़ सौ केंद्र तो कभीकभार ही खुलते हैं। इसके अलावा 50 केंद्रों पर तो ताला ही लगा रहता है। ऐसे में ब्लॉक के करीब पांच हजार से अधिक नौनिहालों के भविष्य पर संकट है।
विज्ञापन

प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश से पहले बच्चों को अक्षर ज्ञान व स्कूल जाने की आदत डालने के लिए केंद्रों को शुरू किया गया है, इसके साथ ही बच्चों के साथ ही गर्भवती व धात्री महिलाओं के पोषण की योजनाओं का संचालन होना है। लेकिन केंद्रों के बंद रहने से हजारों बच्चों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन

शिक्षा के साथ ही पोषण से जुड़े आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। चार से सात लाख रुपये खर्च करके केंद्रों का पक्का निर्माण भी हुआ है। 54 के करीब केंद्रों का निर्माण हो चुका है। इसके बाद भी केंद्रों का संचालन न होने से गांवों के बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं गांवों के लोगों की मानें तो कई कार्यकर्त्ता ऐसे हैं जो दूसरे जिलों में निवास करती हैं। जबकि नियुक्ति उनकी ब्लॉक के केंद्रों पर है। ऐसे में वह महीने में सिर्फ सामग्री का वितरण करने ही आती हैं। इसी तरह कई केंद्र तो ऐसे हैं जिनका ताला भी नहीं खुलता है। ब्लॉक के निरीक्षण होने पर सिर्फ नोटिस जारी करके मामले को रफादफा कर दिया जाता है। इससे ब्लॉक की एक हजार से अधिक गर्भवती व धात्री महिलाओं को भी पोषण सामग्री नही मिल पाती है।
इस तरह की योजनाओं का होता संचालन
आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का नामांकन करने पर उन्हें हर तरह की सुविधा दी जाती है। इसमें तीन से छह साल तक के बच्चों को प्री प्राइमरी शिक्षा दी जानी है। इनको आधा किलो दलिया और आधा किलो दाल दिया जाता है।

वहीं सात माह से तीन वर्ष से कम के बच्चों को एक किलो दाल, एक किलो दलिया और 455 ग्राम तेल दिया जाता है। धात्री व गर्भवती महिलाओं को डेढ़ किलो दलिया, एक किलो दाल और 455 ग्राम तेल दिया जाता है। इसके लिए महिलाओं का समूह वितरण का कार्य कार्यकर्त्ताओं के सामने करना होता है। यह कार्य भी प्रभावित है।
केंद्रों के संचालन पर पूरा जोर दिया जा रहा है। जहां की शिकायतें आती हैं, वहां कार्रवाई की जाती है। योजनाओं की ब्लाक स्तर से समीक्षा की जाती है।
-नीतू रावत, सीडीपीओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed