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जेल में कैदी की हुई मौत, अस्पताल गेट पर फेंक दिया शव

Tue, 11 May 2021 08:25 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 11 May 2021 08:25 PM IST
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After death, the body of the prisoner thrown at the hospital gate
गोंडा। जिला कारागार में निरुद्घ कैदी की मौत हो गई। उसके शव को अस्पताल के गेट पर लावारिस की तरह फेंक दिया गया। इसकी जानकारी होने पर जिलाधिकारी ने सीएमओ से रिपोर्ट मांगी है।
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सीएमओ डॉ. राधेश्याम केसरी ने कहा कि मामले की जांच शुरू करा दी गई है। जेल प्रशासन से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। इस तरह शव को गेट पर फेंके जाने से लोगों में आक्रोश है। इस घटना से जेल और जिला अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता उजागर हुई है।
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सोमवार रात ही जेल में निरुद्घ बंदी की मौत के बाद उसका शव काफी देर तक लावारिस गेट पर पड़ा रहा। सूचना पर लोग पहुंचे तो आनन फानन में अस्पताल कर्मियों ने शव को उठा कर चीरघर के फर्श पर डाल दिया।
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इसे लेकर काफी देर तक जिला अस्पताल में परिजनों और लोगों ने आक्रोश जताया। मृतक के पुत्र अंकित पांडेय ने डीएम से जेल और अस्पताल प्रशासन के रवैये की शिकायत करते हुए सूचना न देने का भी आरोप लगाया है।
सीएमओ डॉ. राधेश्याम केसरी ने बताया कि डीएम के निर्देश पर जांच की जा रही है जो भी दोषी होगा कार्रवाई की जाएगी। जेल प्रशासन से भी पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।
बताया जा रहा है कि 19 अप्रैल को तरबगंज के घांचा बीकापुर में पंचायत चुनाव में मतदान के दौरान हुई हिंसा में निरुद्ध कैदी राजदत्त पांडेय की मृत्यु 10 मई को जेल में ही हो गई।
जेल पुलिस ने शव को जिला चिकित्सालय में भेज दिया, जो कुछ देर तक हॉस्पिटल गेट पर पड़ा रहा। बाद में उस शव को चीरघर के फर्श पर फेंक दिया गया। बंदी के परिजनों को रात में 10 बजे जब सूचना मिली तब उन्होंने ब्राम्हण महासंघ प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज कुमार पांडेय को सहायता के लिए संपर्क किया।
पंकज ने नगर कोतवाल और जिलाधिकारी को सूचित कर दिया। गंभीर बात यह है कि मृतक के परिजनों को न जेल पुलिस ने सूचित किया न जिला अस्पताल प्रशासन ने। इसे लेकर संदिग्ध स्थिति बनी हुई है।

मृतक के पुत्र अंकित पांडेय ने बताया कि बीमारी आदि की भी कोई सूचना पहले नहीं दी गई। आरोप है कि दो बार मिलने गया लेकिन मुलाकात नहीं करने दी गई। इससे वह पिता की तबीयत के बारे में जान ही नहीं पाए। उन्होंने कहा कि यदि समय से जानकारी होती तो इलाज के लिए प्रयास करते।
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