{"_id":"609a9a178ebc3e7b511878c5","slug":"administration-will-take-care-of-orphaned-children-in-the-corona-era-gonda-news-lko577698472","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोविड महामारी में अनाथ हुए बच्चों की जिदंगी सवारेंगा विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोविड महामारी में अनाथ हुए बच्चों की जिदंगी सवारेंगा विभाग
विज्ञापन
गोंडा। कोरोना महामारी में माता-पिता की मृत्यु के बाद अनाथ हुए बच्चों की देखभाल करने वाला यदि कोई नहीं है तो महिला कल्याण विभाग चिह्नित कर पुर्नवासित करेगा। मंगलवार को जिला प्रोबेशन अधिकारी जयदीप सिंह ने बताया कि विभिन्न विभागों से समन्वय कर अनाथ या बेघर हुए ऐसे बच्चों का चिन्हांकन कराया जा रहा है।
महिला कल्याण विभाग इन बच्चों को आवश्यक सुविधाएं, सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान करने के लिए नोडल विभाग है। इन परिस्थितियों में ग्रस्त व चिह्नित बच्चों की जीविका, विकास, सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए विभाग द्वारा निर्धारित संचालन प्रक्रिया के अनुरूप कार्य किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बच्चों को बालगृहों में आवासित करना अंतिम उपाय होगा। इसके पूर्व उन्हें गैर संस्थागत देखभाल (रिश्तेदारों की देखरेख में), फास्टर केयर, उपयुक्त व्यक्ति या उपयुक्त सुविधा, कानूनी रूप से गोद देना जैसे परिवार आधारित देखरेख में रखे जाने के प्रयास किए जाएंगे।
विज्ञापन
साथ ही निरंतर उनका फॉलोअप किया जाएगा। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि विभाग के चिन्हीकरण में वहीं बच्चे पात्र होंगे, जिनके माता-पिता की कोविड-19 संक्रमण से मृत्यु हो गई हो।
ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता कोविड पाजिटिव नहीं पाये गये हैं तथा लक्षण कोविड-19 के समान ही थे और उपचार के दौरान/अभाव में उनकी मृत्यु हो गई हो। ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता कोविड-19 या किसी अन्य कारण से अस्पताल में भर्ती हों अथवा माता-पिता कोविड-19/समान लक्षणें से होम आइसोलेशन में हों और उनकी देखरेख के लिए कोई न हो। ऐसे बच्चों को विभाग सुविधा प्रदान किया जाएगा।
विज्ञापन
महिला कल्याण विभाग इन बच्चों को आवश्यक सुविधाएं, सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान करने के लिए नोडल विभाग है। इन परिस्थितियों में ग्रस्त व चिह्नित बच्चों की जीविका, विकास, सुरक्षा तथा संरक्षण के लिए विभाग द्वारा निर्धारित संचालन प्रक्रिया के अनुरूप कार्य किया जाएगा।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि बच्चों को बालगृहों में आवासित करना अंतिम उपाय होगा। इसके पूर्व उन्हें गैर संस्थागत देखभाल (रिश्तेदारों की देखरेख में), फास्टर केयर, उपयुक्त व्यक्ति या उपयुक्त सुविधा, कानूनी रूप से गोद देना जैसे परिवार आधारित देखरेख में रखे जाने के प्रयास किए जाएंगे।
विज्ञापन
साथ ही निरंतर उनका फॉलोअप किया जाएगा। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि विभाग के चिन्हीकरण में वहीं बच्चे पात्र होंगे, जिनके माता-पिता की कोविड-19 संक्रमण से मृत्यु हो गई हो।
ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता कोविड पाजिटिव नहीं पाये गये हैं तथा लक्षण कोविड-19 के समान ही थे और उपचार के दौरान/अभाव में उनकी मृत्यु हो गई हो। ऐसे बच्चे, जिनके माता-पिता कोविड-19 या किसी अन्य कारण से अस्पताल में भर्ती हों अथवा माता-पिता कोविड-19/समान लक्षणें से होम आइसोलेशन में हों और उनकी देखरेख के लिए कोई न हो। ऐसे बच्चों को विभाग सुविधा प्रदान किया जाएगा।