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गोआश्रय में लापरवाही पर 16 बीडीओ व 44 सचिव को चेतावनी
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फोटो- 19 - गोंडा में छपिया के तेदुंआ रानी गोशाला स्थल पर खुले में मवेशी। संवाद
- फोटो : GONDA
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गोंडा। गोआश्रय केंद्रों में लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मनकापुर के बैरीपुर रामनाथ गोआश्रय केंद्र पर गोवंश की मौत की जांच के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। वहां के ग्राम सचिव को निलंबित करने के साथ ग्राम प्रधान को नोटिस जारी की गई है। मंगलवार को जिलाधिकारी मार्कंडेय शाही ने स्पष्ट कहा कि जवाब संतोषजनक न रहा तो प्रधान को हटाने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 16 ब्लॉक के बीडीओ के साथ ही 44 सचिवों को चेतावनी दी गई है। गोआश्रय केंद्रों पर ठंड से बचाव के इंतजाम करने के साथ ही अन्य सुविधाओं को दुरुस्त रखने की हिदायत दी गई है। लापरवाही मिलने पर प्रधान और सचिव सीधे जिम्मेदार होंगे। बीडीओ के विरुद्ध भी कार्रवाई होगी।
मनकापुर क्षेत्र के बैरीपुर रामनाथ के गोशाला में 20 गोवंशों के मौत मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच में 11 मौतें होने की बात सामने आई है। मौत होने के बाद गोवंशों का बिना पोस्टमार्टम कराए ही दफना दिया गया था। पूरे मामले में बैरीपुर रामनाथ के सचिव की लापरवाही उजागर हुई है। डीएम ने सचिव को निलंबित कर दिया है। वहीं ग्राम प्रधान के अधिकार सीज करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रधान को नोटिस दिया गया है।
डीएम ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। मामले की जांच डीपीआरओ रोहित भारती, जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र सिंह राठौर, एसडीएम मनकापुर कीर्ति प्रकाश भारती ने किया था। इसकी रिपोर्ट भी प्रशासन को मिल गई है। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने सभी बीडीओ और गोआश्रय केंद्र के संचालन वाले पंचायतों को व्यवस्था दुरुस्त करने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि लापरवाही मिली तो प्रधान और सचिव के विरूद्ध कार्रवाई होगी। सभी गोआश्रय केंद्रों की निगरानी के लिए अधिकारियों को नोडल नामित किया है। साथ ही बीडीओ नियमित गोआश्रय केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देंगे।
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अधूरी है बाउंड्री, ठंड से बचाव के इंतजाम नहीं
बैरीपुर रामनाथ गोशाला वित्तीय वर्ष 2019-20 में बना था। 15 बीघा भूमि पर कार्यदायी संस्था राज्य निर्माण सहकारी संघ ने डेढ़ करोड़ धनराशि की लागत से बनाया था। 10 अगस्त 2020 से संचालित है। पूरब और उत्तर दिशा में बाउंड्रीवाल अभी भी अधूरा पड़ा है। ठंड से बचाव के इंतजाम न होने के कारण गोवंश की मौत हुई। यही नहीं मरे हुए गोवंशों को आननफानन में गोशाला के पीछे गड्ढा खोद कर मिट्टी से दबा दिया गया है। मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। ग्रामीण राम बहादुर तिवारी ने बताया कि बीती रात बाहर से गाड़ी पर लाद कर भारी संख्या में गोवंश लाए गए थे। काफी नोकझोंक के बाद गांव वालों ने वापस भेज दिया। ग्रामीण रमाकांत ने बताया कि काफी दिनों से बाहरी छुट्टा जानवर इस गोशाला में लाकर छोड़े जाते रहे हैं। विपिन ने बताया कि अधिकतर लोग रात में छुट्टा पशु लाकर गोशाला के बाहर ही छोड़ जाते हैं, जिससे उनके चरने से हम लोगों की फसलों को नुकसान होता है। राजेश कुमार ने बताया कि गोशाला में क्षमता से अधिक गोवंशों के होने से अस्थाई बाउंड्री को छतिग्रस्त कर पशु खेतों में आकर फसलों को चट जाते हैं।
क्षमता से अधिक हैं गोवंश, ठंड से बचाव के कार्य नाकाफी
वजीरगंज(गोंडा)। अयोध्या-गोंडा हाईवे पर स्थित अनभुला गोशाला में 70 गोवंश के स्थान पर 75 गोवंश हैं। ठंड से बचाव के लिए गोवंशों को जूट के बोरे से ढ़का जाता है। लेकिन फिर ठंड अधिक होने से पशुओं को ठंड लगती है। शाम को गर्मी पहुंचाने के लिए आग जलाई जाती है। पशुओं की देखरेख के लिए सूर्य भान सिंह, भानु प्रताप सिंह, पृथ्वी पाल सिंह व राम प्रवेश की नियुक्ति है। वहीं विकास खंड झंझरी के स्थित गो आश्रय केन्द्र विरवा बभनी में 200 गोवंश रखने की क्षमता है, लेकिन यहा पर 398 गोवंश है। संचालक योगेश मिश्रा ने बताया कि आठ लोगों की तैनाती देखभाल के लिए की गई है। गोशाला का निरीक्षण पूर्ति निरीक्षक झंझरी जुगुल किशोर ने किया और कहा कि जूट बोरे उपलब्ध करवाने के लिए कहा है। वहीं गोआश्रय केंद्र खोरहंसा जो एक सप्ताह पूर्व संचालित हुआ है, जिसमें 60 के अपेक्षा 102 पशु मौके पर मौजूद हैं। वहां का निरीक्षण खंड विकास अधिकारी झंझरी ने किया और ग्राम प्रधान परवेज अहमद को सख्त निर्देश दिया कि पर्याप्त मात्रा में भूसा वा पशुआहार रखें। गो आश्रय केंद्र काजीदेवर का निरीक्षण पूर्ति निरीक्षक ने किया। वहां पर 60 के अपेक्षा 55 पशु रहे। बभनजोत ब्लॉक के अलाउद्दीनपुर में 30 की क्षमता वाला गोशाला है, 42 गोवंश मौजूद हैं। सिंगार घाट 30 की क्षमता वाला गोशाला में 37 गाय मौजूद है। ठंड से बचाव के लिए चारों तरफ से तिरपाल लगाए गए हैं। परसपुर के खरगुपुर में अव्यवस्था है, और छपिया के तेंदुआ रानी में कोई इंतजाम नहीं है।
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मनकापुर क्षेत्र के बैरीपुर रामनाथ के गोशाला में 20 गोवंशों के मौत मामले में कार्रवाई शुरू हो गई है। जांच में 11 मौतें होने की बात सामने आई है। मौत होने के बाद गोवंशों का बिना पोस्टमार्टम कराए ही दफना दिया गया था। पूरे मामले में बैरीपुर रामनाथ के सचिव की लापरवाही उजागर हुई है। डीएम ने सचिव को निलंबित कर दिया है। वहीं ग्राम प्रधान के अधिकार सीज करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रधान को नोटिस दिया गया है।
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डीएम ने तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं। मामले की जांच डीपीआरओ रोहित भारती, जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविंद्र सिंह राठौर, एसडीएम मनकापुर कीर्ति प्रकाश भारती ने किया था। इसकी रिपोर्ट भी प्रशासन को मिल गई है। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने सभी बीडीओ और गोआश्रय केंद्र के संचालन वाले पंचायतों को व्यवस्था दुरुस्त करने की हिदायत दी है। उन्होंने कहा कि लापरवाही मिली तो प्रधान और सचिव के विरूद्ध कार्रवाई होगी। सभी गोआश्रय केंद्रों की निगरानी के लिए अधिकारियों को नोडल नामित किया है। साथ ही बीडीओ नियमित गोआश्रय केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देंगे।
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अधूरी है बाउंड्री, ठंड से बचाव के इंतजाम नहीं
बैरीपुर रामनाथ गोशाला वित्तीय वर्ष 2019-20 में बना था। 15 बीघा भूमि पर कार्यदायी संस्था राज्य निर्माण सहकारी संघ ने डेढ़ करोड़ धनराशि की लागत से बनाया था। 10 अगस्त 2020 से संचालित है। पूरब और उत्तर दिशा में बाउंड्रीवाल अभी भी अधूरा पड़ा है। ठंड से बचाव के इंतजाम न होने के कारण गोवंश की मौत हुई। यही नहीं मरे हुए गोवंशों को आननफानन में गोशाला के पीछे गड्ढा खोद कर मिट्टी से दबा दिया गया है। मृत गोवंशों का पोस्टमार्टम नहीं करवाया गया। ग्रामीण राम बहादुर तिवारी ने बताया कि बीती रात बाहर से गाड़ी पर लाद कर भारी संख्या में गोवंश लाए गए थे। काफी नोकझोंक के बाद गांव वालों ने वापस भेज दिया। ग्रामीण रमाकांत ने बताया कि काफी दिनों से बाहरी छुट्टा जानवर इस गोशाला में लाकर छोड़े जाते रहे हैं। विपिन ने बताया कि अधिकतर लोग रात में छुट्टा पशु लाकर गोशाला के बाहर ही छोड़ जाते हैं, जिससे उनके चरने से हम लोगों की फसलों को नुकसान होता है। राजेश कुमार ने बताया कि गोशाला में क्षमता से अधिक गोवंशों के होने से अस्थाई बाउंड्री को छतिग्रस्त कर पशु खेतों में आकर फसलों को चट जाते हैं।
क्षमता से अधिक हैं गोवंश, ठंड से बचाव के कार्य नाकाफी
वजीरगंज(गोंडा)। अयोध्या-गोंडा हाईवे पर स्थित अनभुला गोशाला में 70 गोवंश के स्थान पर 75 गोवंश हैं। ठंड से बचाव के लिए गोवंशों को जूट के बोरे से ढ़का जाता है। लेकिन फिर ठंड अधिक होने से पशुओं को ठंड लगती है। शाम को गर्मी पहुंचाने के लिए आग जलाई जाती है। पशुओं की देखरेख के लिए सूर्य भान सिंह, भानु प्रताप सिंह, पृथ्वी पाल सिंह व राम प्रवेश की नियुक्ति है। वहीं विकास खंड झंझरी के स्थित गो आश्रय केन्द्र विरवा बभनी में 200 गोवंश रखने की क्षमता है, लेकिन यहा पर 398 गोवंश है। संचालक योगेश मिश्रा ने बताया कि आठ लोगों की तैनाती देखभाल के लिए की गई है। गोशाला का निरीक्षण पूर्ति निरीक्षक झंझरी जुगुल किशोर ने किया और कहा कि जूट बोरे उपलब्ध करवाने के लिए कहा है। वहीं गोआश्रय केंद्र खोरहंसा जो एक सप्ताह पूर्व संचालित हुआ है, जिसमें 60 के अपेक्षा 102 पशु मौके पर मौजूद हैं। वहां का निरीक्षण खंड विकास अधिकारी झंझरी ने किया और ग्राम प्रधान परवेज अहमद को सख्त निर्देश दिया कि पर्याप्त मात्रा में भूसा वा पशुआहार रखें। गो आश्रय केंद्र काजीदेवर का निरीक्षण पूर्ति निरीक्षक ने किया। वहां पर 60 के अपेक्षा 55 पशु रहे। बभनजोत ब्लॉक के अलाउद्दीनपुर में 30 की क्षमता वाला गोशाला है, 42 गोवंश मौजूद हैं। सिंगार घाट 30 की क्षमता वाला गोशाला में 37 गाय मौजूद है। ठंड से बचाव के लिए चारों तरफ से तिरपाल लगाए गए हैं। परसपुर के खरगुपुर में अव्यवस्था है, और छपिया के तेंदुआ रानी में कोई इंतजाम नहीं है।