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सांड़ से भिड़ा बाइक सवार, सींग घुसने से मौत

Tue, 29 Mar 2022 11:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 11:30 PM IST
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वजीरगंज (गोंडा)। साथी के साथ जिला मुख्यालय से लौट रहे बाइक सवार की टक्कर सड़क पर खड़े सांड़ से हो गयी। भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि सांड़ का सींग बाइक चला रहे राम केवल के सीने में घुस गया। इससे उसकी अस्थि-पंजर टूटकर बाहर निकल आई। बाइक पर पीछे बैठा साथी संतोष भी गंभीर रूप से घायल हो गया। दोनों को गंभीर हालत में जिला चिकित्सालय भेजा गया। जहां परीक्षण के बाद डाक्टरों ने बाइक चला रहे राम केवल को मृत घोषित कर दिया जबकि दूसरे सवार का इलाज चल रहा है। हादसे की खबर से मृतक के परिवार में कोहराम मच गया।
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घटना मंगलवार की रात लगभग नौ बजे की है। वजीरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम सभा अचलपुर के मजरे गोपालीपुर निवासी राम केवल (30) पुत्र रामशरन व संतोष (40) पुत्र शिव प्रसाद किसी कार्य से जिला मुख्यालय गए थे। वापस घर लौटते समय रात लगभग नौ बजे दर्जीकुआं-डुमरियाडीह के बीच बनघुसरा पेट्रोल पंप के पास पहुंचने पर उनकी बाइक अनियंत्रित होकर बीच सड़क पर खड़े एक सांड़ से जा टकरायी। भिड़ंत इतनी तेज थी कि सांड़ का सींग राम केवल के सीने में घुस गया। इससे बाइक चला रहे राम केवल की छाती के अस्थि-पंजर टूटकर बाहर आ गए। बाइक पर पीछे बैठा संतोष भी गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर जुटे स्थानीय लोगों ने पुलिस को हादसे की जानकारी दी। पुलिस ने दोनों घायलों को इलाज के लिए मुख्यालय अस्पताल भिजवाया। जहां परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने राम केवल को मृत घोषित कर दिया जबकि घायल संतोष अभी भी जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है।
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इस हादसे की खबर से मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। सन्नाटे में डूबे गांव में मृतक के घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक रामकेवल खाना बनाने का काम करता था। उसी से उसके परिवार का भरण पोषण होता था। अब वह भी सहारा खत्म हो गया।
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जानलेवा बना छुट्टा मवेशियों का कहर
सड़क पर घूम रहे छुट्टा जानवरों की चपेट में अब तक पता नहीं कितने लोग आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। रोकथाम न होने से छुट्टा मवेशियों का कहर अब जानलेवा बनता जा रहा है। इन मवेशियों से हुई टक्कर के बाद कई लोगों को जीवनभर की दिव्यांगता का दंश भी झेलना पड़ रहा है। दूसरी तरफ गो आश्रय केंद्रों के संचालन का दंभ प्रशासन भर रहा है, मगर इनके पास छुट्टा जानवरों को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं है। छुट्टा जानवर इधर-घूमते रहते हैं। इसकी शिकायत के बाद कागजों में अभियान चलाकर धरपकड़ की खानापूर्ति कर दी जाती है। मगर धरातल पर काम न होने से लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
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