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भंडारे का बचा भोजन खाने से एक दर्जन मवेशी मरे
गोंडा
Updated Fri, 09 Sep 2016 11:56 PM IST
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गोंडा के खरगूपुर में भंडारे के बाद पडे़ पत्तल
- फोटो : अमर उजाला
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पृथ्वीनाथ मंदिर में भंडारे का विषाक्त भोजन खाने से एक दर्जन मवेशियों की मौत हो गई। चार दिन के भीतर अंदर हुई मौतों के बाद पशुओं के शवों से निकलने वाली दुर्गंध से बीमारी फैलने की आशंका बनी है।
बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर परिसर में कजरी तीज पर 4 सितंबर को स्वयं सेवी संगठनों ने कांवरियों व अन्य भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया था। भंडारे के बाद बचे भोजन चावल, पूरी, कचौरी, सब्जी व जूठे पत्तलों को कार्यकर्ताओं ने मंदिर के आसपास फेक दिया।
मंदिर परिसर के समीप फेंका गया भोजन विषाक्त हो गया। जिसे गाय-बछड़ों के साथ लावारिस पशुओं ने खा लिया। जिससे एक दर्जन मवेशियों की मौत हो गई। मंदिर परिसर के आसपास विषाक्त भोजन खाने से पशुओं की मौत के बाद उनके शवों से निकले वाली दुर्गंध आसपास फैली हुई है।
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इससे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं व यहां रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गंध के चलते लोगों का घर से निकलना दुश्वार हो गया है। साथ ही महामारी फैलने की आशंका बनी है। मंदिर के पुजारी जगदम्बा प्रसाद का कहना है कि विषाक्त भोजन खाने से मवेशियों की मौत की जानकारी उन्हें नहीं है।
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बाबा पृथ्वीनाथ मंदिर परिसर में कजरी तीज पर 4 सितंबर को स्वयं सेवी संगठनों ने कांवरियों व अन्य भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया था। भंडारे के बाद बचे भोजन चावल, पूरी, कचौरी, सब्जी व जूठे पत्तलों को कार्यकर्ताओं ने मंदिर के आसपास फेक दिया।
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मंदिर परिसर के समीप फेंका गया भोजन विषाक्त हो गया। जिसे गाय-बछड़ों के साथ लावारिस पशुओं ने खा लिया। जिससे एक दर्जन मवेशियों की मौत हो गई। मंदिर परिसर के आसपास विषाक्त भोजन खाने से पशुओं की मौत के बाद उनके शवों से निकले वाली दुर्गंध आसपास फैली हुई है।
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इससे मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं व यहां रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दुर्गंध के चलते लोगों का घर से निकलना दुश्वार हो गया है। साथ ही महामारी फैलने की आशंका बनी है। मंदिर के पुजारी जगदम्बा प्रसाद का कहना है कि विषाक्त भोजन खाने से मवेशियों की मौत की जानकारी उन्हें नहीं है।