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Gonda News: 95 फीसदी युवाओं ने माना, गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक

Thu, 01 Oct 2026 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Thu, 01 Oct 2026 11:45 PM IST
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95 percent of youth believe Gandhi's ideas remain relevant today
एलबीएस पीजी कॉलेज में सत्याग्रह पर छात्रों से राय जानतीं प्रो. चमन कौर। स्रोत: महाविद्यालय
गोंडा। गांधीजी का नाम आज भी युवा जानते हैं लेकिन उनके विचारों को लेकर उनकी समझ कितनी गहरी है? गांधी जयंती पर इसका जवाब तलाशने के लिए एलबीएस पीजी कॉलेज, मां पाटेश्वरी देवी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज (एमपीडीआरईसी) और आईटीआई गोंडा के 16 से 25 वर्ष आयु वर्ग के करीब एक हजार विद्यार्थियों के बीच सर्वे कराया गया। ऑनलाइन और प्रश्नावली के माध्यम से सत्याग्रह, अहिंसा, सत्य, सामाजिक समानता, स्वावलंबन और गांधीजी के विचारों की वर्तमान उपयोगिता से जुड़े सवाल पूछे गए।
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सर्वे में एमपीडीआरईसी के 477, एलबीएस पीजी कॉलेज के करीब 500 और आईटीआई के 23 विद्यार्थी शामिल हुए। 90 फीसदी विद्यार्थियों ने सत्याग्रह और अहिंसा की अवधारणा को सही समझने की बात कही। 95 फीसदी ने गांधीजी के विचारों को आज भी प्रासंगिक माना। करीब 99 फीसदी विद्यार्थियों ने माना कि गांधीवादी विचार सामाजिक भेदभाव, हिंसा और अन्य समस्याओं को कम करने में योगदान दे सकते हैं।
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सिर्फ नाम नहीं, विचारों की भी समझ
विद्यार्थियों ने गांधीजी के विचारों की जानकारी के स्रोत के रूप में किताबों, पाठ्यक्रम, टेलीविजन और समाचार पत्रों का उल्लेख किया। सत्याग्रह को उन्होंने केवल विरोध नहीं, बल्कि सत्य और न्याय के लिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का माध्यम बताया। अभिषेक मिश्र ने कहा कि सत्याग्रह सत्य और न्याय के लिए शांतिपूर्ण एवं दृढ़ तरीके से अपनी बात रखने का माध्यम है। पिंकी गुप्ता ने अहिंसा और समानता को महत्वपूर्ण बताया। सुगंधराज ने गांधीजी के विचारों को व्यवहार में उतारने की जरूरत बताई।
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बेरोजगारी, भेदभाव और हिंसा पर भी सवाल
सर्वे में विद्यार्थियों से बेरोजगारी, सामाजिक भेदभाव, हिंसा और असमानता जैसे मुद्दों पर राय ली गई। उन्होंने सत्य, अहिंसा, संवाद, समानता, अनुशासन और स्वावलंबन को इन चुनौतियों से निपटने में उपयोगी बताया। बीटेक छात्र सौरभ शुक्ल ने समाज के लिए उपयोगी कार्य करने पर जोर दिया। तनय पांडेय ने सत्य, अनुशासन और जिम्मेदारी को व्यवहार का हिस्सा बनाने की बात कही।


शिक्षकों ने बताया सत्याग्रह का अर्थ
एलबीएस पीजी कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. अमन चंद्रा ने सत्याग्रह को सत्य, अहिंसा और आत्मबल पर आधारित नैतिक संघर्ष बताया। प्रो. वंदना भारतीय ने हिंसा और सामाजिक तनाव के बीच अहिंसा व संवाद की उपयोगिता बताई। डॉ. परवेज आलम ने सत्याग्रह को अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष की पद्धति बताया। एमपीडीआरईसी के निदेशक प्रो. भारतेंदु नाथ मिश्र ने कहा कि गांधी जयंती सत्य, अहिंसा, नैतिकता और सामाजिक समानता जैसे मूल्यों पर चिंतन का अवसर है। सर्वे में प्रो. चमन कौर, प्रो. संतोष कुमार श्रीवास्तव, प्रो. मारुत नंदन त्रिपाठी और कार्यदेशक विजय कुमार ने सहयोग किया।
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