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छह गांव पूरी तरह संपर्क से कटे, गांव-घर सब पानी पानी
Updated Sun, 05 Aug 2018 10:16 PM IST
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34 गांव बने टापू, मुख्यालय से संपर्क कटा
गोंडा। अस्थाई रिंग बांध कटने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की हालत लगातार बदतर होती जा रही है। अब तक 34 गांव बाढ़ के पानी से टापू बन चुके हैं। इसमें करीब एक दर्जन गांव ऐसे हैं जिनका संपर्क पूरी तरह कट चुका है। सभी गांवों में बिजली आदि की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। जलस्तर का बढ़ना जारी है।
जैसे-जैसे घाघरा का पानी करनैलगंज क्षेत्र की ओर आ रहा है वैसे-वैसे नए नए गांव बाढ़ से प्रभावित होते जा रहे हैं। ग्राम नकहरा के सामने स्थित अस्थाई रिंग बांध के शुक्रवार को कट जाने के बाद लगातार घाघरा का पानी क्षेत्र में फैलता जा रहा है।
इसके साथ ही लगातार पानी की आमद भी तेज होती जा रही है। बांध कटने का दायरा 50 मीटर से बढ़कर 200 मीटर से अधिक हो चुका है। अस्थाई बांध पूरी तरह कट कर नदी में समाता जा रहा है।
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वहीं घाघरा नदी के मुहाने पर बसे ग्राम काशीपुर, नकहरा के 11 मजरे तथा माझा रायपुर के 7 मजरे जिनमें करीब 200 घर और छह सौ की आबादी है। उसके साथ ही ग्राम परसावल के 7 मजरे, ग्राम नैपुरा के 6 मजरे एवं बेहटा गांव के दो मजरे के साथ ही गौरा सिंहपुर के 2 मजरे अब तक बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं।
इन गांवों का संपर्क मार्गों से कट चुका है। अब गांव तक पहुंचने के लिए मात्र एक नाव का ही सहारा है। इसके साथ ही घाघरा का जलस्तर घटते-बढ़ते हुए खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है।
रविवार को पानी का डिस्चार्ज करीब 2 लाख 66 हजार क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया है। डिस्चार्ज बढ़ने के साथ ही घाघरा का पानी करनैलगंज क्षेत्र की ओर तेजी से रुख करते हुए ग्रामीण अंचलों को प्रभावित करने में लगा है।
वहीं प्रशासनिक सहायता के नाम पर अब तक करीब आधा दर्जन गांव में नाव की व्यवस्था करने के साथ अन्य कोई भी व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं की गई है। जिससे ग्रामीणों में लगातार रोष बढ़ता जा रहा है।
नैपुरा, परसावल, बेहटा, रायपुर, नकहरा के अधिकांश प्रभावित लोग अपना घर बार छोड़कर एल्गिन चरसड़ी बांध पर आशियाना बनाकर रहने लगे हैं। जहां उनको खुद के सहारे के अतिरिक्त प्रशासन का कोई भी सहारा नहीं मिल रहा है।
जरूरत पड़ने पर लगाई जाएगी फ्लड पीएसी
एसडीएम करनैलगंज गुलाम सरवर बताते हैं कि करनैलगंज क्षेत्र के 3 मजरे शनिवार तक प्रभावित थे। अब बाढ़ से प्रभावित मजरों की बढ़कर 7 हो गई है। किसी भी गांव के घर में बाढ़ का पानी नहीं घुसा है।
जरूरत पड़ने पर जल पीएसी को लगाया जाएगा। जल पीएसी लगातार गौरा मांझा प्राथमिक विद्यालय में कैंप कर रही है। आवश्यकता पड़ी तो एनडीआरएफ की टीम भी बुलाई जाएगी।
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गोंडा। अस्थाई रिंग बांध कटने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों की हालत लगातार बदतर होती जा रही है। अब तक 34 गांव बाढ़ के पानी से टापू बन चुके हैं। इसमें करीब एक दर्जन गांव ऐसे हैं जिनका संपर्क पूरी तरह कट चुका है। सभी गांवों में बिजली आदि की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। जलस्तर का बढ़ना जारी है।
जैसे-जैसे घाघरा का पानी करनैलगंज क्षेत्र की ओर आ रहा है वैसे-वैसे नए नए गांव बाढ़ से प्रभावित होते जा रहे हैं। ग्राम नकहरा के सामने स्थित अस्थाई रिंग बांध के शुक्रवार को कट जाने के बाद लगातार घाघरा का पानी क्षेत्र में फैलता जा रहा है।
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इसके साथ ही लगातार पानी की आमद भी तेज होती जा रही है। बांध कटने का दायरा 50 मीटर से बढ़कर 200 मीटर से अधिक हो चुका है। अस्थाई बांध पूरी तरह कट कर नदी में समाता जा रहा है।
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वहीं घाघरा नदी के मुहाने पर बसे ग्राम काशीपुर, नकहरा के 11 मजरे तथा माझा रायपुर के 7 मजरे जिनमें करीब 200 घर और छह सौ की आबादी है। उसके साथ ही ग्राम परसावल के 7 मजरे, ग्राम नैपुरा के 6 मजरे एवं बेहटा गांव के दो मजरे के साथ ही गौरा सिंहपुर के 2 मजरे अब तक बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं।
इन गांवों का संपर्क मार्गों से कट चुका है। अब गांव तक पहुंचने के लिए मात्र एक नाव का ही सहारा है। इसके साथ ही घाघरा का जलस्तर घटते-बढ़ते हुए खतरे के निशान से करीब 20 सेंटीमीटर ऊपर बना हुआ है।
रविवार को पानी का डिस्चार्ज करीब 2 लाख 66 हजार क्यूसेक रिकॉर्ड किया गया है। डिस्चार्ज बढ़ने के साथ ही घाघरा का पानी करनैलगंज क्षेत्र की ओर तेजी से रुख करते हुए ग्रामीण अंचलों को प्रभावित करने में लगा है।
वहीं प्रशासनिक सहायता के नाम पर अब तक करीब आधा दर्जन गांव में नाव की व्यवस्था करने के साथ अन्य कोई भी व्यवस्था प्रशासन द्वारा नहीं की गई है। जिससे ग्रामीणों में लगातार रोष बढ़ता जा रहा है।
नैपुरा, परसावल, बेहटा, रायपुर, नकहरा के अधिकांश प्रभावित लोग अपना घर बार छोड़कर एल्गिन चरसड़ी बांध पर आशियाना बनाकर रहने लगे हैं। जहां उनको खुद के सहारे के अतिरिक्त प्रशासन का कोई भी सहारा नहीं मिल रहा है।
जरूरत पड़ने पर लगाई जाएगी फ्लड पीएसी
एसडीएम करनैलगंज गुलाम सरवर बताते हैं कि करनैलगंज क्षेत्र के 3 मजरे शनिवार तक प्रभावित थे। अब बाढ़ से प्रभावित मजरों की बढ़कर 7 हो गई है। किसी भी गांव के घर में बाढ़ का पानी नहीं घुसा है।
जरूरत पड़ने पर जल पीएसी को लगाया जाएगा। जल पीएसी लगातार गौरा मांझा प्राथमिक विद्यालय में कैंप कर रही है। आवश्यकता पड़ी तो एनडीआरएफ की टीम भी बुलाई जाएगी।