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792 गांवों के साथ छह बाढ़ चौकियां भी घाघरा के आगोश में
Updated Fri, 18 Aug 2017 11:04 PM IST
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छह बाढ़ चौकियां भी घाघरा के आगोश में
अब तक 792 गांव बाढ़ की चपेट में
एनडीआरएफ व पीएसी को लगाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। जिले में बाढ़ से तबाही बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को छह बाढ़ चौकियां नदी में समा गई। वहीं अब तक 792 गांव घाघरा की चपेट में आ चुके हैं। चौकियों के डूबने से राहत कर्मियों को वहां से भागना पड़ा और अन्यत्र बाढ़ चौकी बनानी पड़ी। हालात बेकाबू देख प्रशासन ने बाढ़ क्षेत्र में रेस्क्यू आपरेशन के लिए एनडीआरएफ व पीएसी को लगाया है।
बाढ़ के सैलाब से करनैलगंज व परसपुर इलाके साथ तरबगंज व नवाबगंज का क्षेत्र भी आ गया है। जिले की चार तहसीलों में दो तहसील क्षेत्र का आधा हिस्सा बाढ़ से घिर गई है। परसपुर ब्लाक क्षेत्र की एक दर्जन ग्राम पंचायतों के मजरों को बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया है। बहुअन मदार माझा, जैसिंह पुर सहित कई गांव अब पूरी तरह चपेट में आ गए हैं। नवाबगंज में तुलसीपुर माझा, नकहरा, जैतपुर, पटपरगंज, महंगूपुर, बखिरा, नवाबगंज गिर्द, गोकुला, दत्तनगर सहित एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के सौ मजरे बाढ़ से घिर गए हैं।
घाघरा का पानी लगातार क्षेत्र में फेलने से स्थिति भयावह होती जा रही है। घाघरा भी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर ही टिकी हुई है। कई जगहों पर कटे बांध के हिस्से से पानी का रिसाव होने लगा है। एल्गिन-चरसड़ी बांध के इस तरफ की 98 ग्राम पंचायतें व उनके 792 मजरे बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। वहीं बाढ़ पीड़ितों की सुविधा के लिए बनाई गईं 9 में से 6 बाढ़ चौकियां भी बाढ़ की जद में आ गई हैं। जिनमें पाल्हापुर बाढ़ राहत केंद्र को बरगदी में स्थानान्तरित कर दिया गया है। गौरासिंहपुर को ग्राम प्रहलादगंज में ले जाया गया है। शाहपुर, चरसड़ी एवं भटपुरवा को भौरीगंज में स्थानान्तरित कर दिया गया है। इसके अलावा पसका, भौरीगंज एवं भंभुवा अपनी जगह पर हैं। इन बाढ़ राहत केंद्रों में करीब 5 फिट से ऊपर बाढ़ का पानी भरा हुआ है। कई गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीणों ने नाव की खुद व्यवस्था की है या फिर सरकारी नावों को बाहर ले जाने के लिए अपने लोगों की निगरानी में कर दिया है। दूसरी ओर सरकारी मशीनरी के कर्मचारी बाढ़ का पानी अधिक होने एवं सभी रास्ते बंद होने की दशा में उनकी पहुंच गावों में नहीं हो पा रही है। जिससे राहत सामग्री भी पहुंचना मुश्किल हो गया है। बाढ़ से निपटने के लिए अब प्रशासन के पास महज एनडीआरएफ एवं पीएसी का ही सहारा है। जिसे कमान सौंपी जा चुकी है।
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इनसेट-
प्रशासन की नजर में 434 मजरे ही बाढ़ से प्रभावित
आंकड़ों की बाजीगरी में प्रशासन की सरकारी फाइलों में अभी बाढ़ का दायरा बेहद कम है। संसाधनों के अभाव की पोल ख्ुालने के डर से आंकड़ों में सरकारी महकमा उलझा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 67 राजस्व ग्राम के 434 मजरों में ही बाढ़ है तथा 84 हजार 810 की आबादी मात्र प्रभावित हुई है। यदि सरकारी आंकड़ों को ही सही माना जाय तो अब तक के मात्र 290 नावें एवं एनडीआरएफ व पीएसी की 22 मोटरबोट बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगाई गई हैं, जो प्रभावित मजरों की तुलना काफी कम हैं।
इनसेट-
बाढ़ प्रभावित गांवों में फैली बीमारी
शुक्रवार को सीएचसी करनैलगंज में बाढ़ क्षेत्र के सर्दी, खांसी, बुखार, चकत्ते, दाने, खुजली, आखों के लाल होने वाले मरीजों की संख्या अधिक हो गई तो चिकित्सकों की कमी के चलते अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गये। उसके बाद अमर उजाला ने मामले से मंडलायुक्त को अवगत कराया तो आयुक्त ने तत्काल सीएमओ से बात करके सीएचसी एवं बाढ़ क्षेत्र में चिकित्सकों की तैनाती कराने का आश्वासन दिया। वहीं बाढ़ क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा भी भगवान भरोसे है। बाढ़ चौकियों के हटाये जाने के बाद अब बाढ़ पीड़ितों को पांच से सात किलोमीटर दूरी तय करके इलाज के लिए जाना होगा। गावों में जाने के लिए व्यवस्था नहीं है तो स्वास्थ्य टीम को बाढ़ चौकियों के साथ स्थानान्तरित करके दूर कर दिया गया है।
इनसेट-
ग्रामीणों ने बनाया राहत केंद्र
एक गांव ऐसा भी है जहां ग्रामीणों ने बाढ़ राहत केंद्र की खुद स्थापना कराया है। ग्राम पंचायत मुडेंरवा में बीते दो दिनों से बाढ़ का पानी लगातार मजरों को प्रभावित करते हुए 20 से अधिक मजरों के करीब 200 घरों की 6 हजार आबादी को घेर लिया। करीब 6 कच्चे मकान गिर गये। कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन को अवगत कराया मगर न तो नाव मिली न ही कोई सुविधा मिली। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विशाल सिंह एवं आदर्श शिक्षक रविप्रताप सिंह ने बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित निकालने के साथ ही राहत केंद्रं बनाया जिसमें बिस्तर, दवायें, टार्च एवं खाने की सामग्री के साथ ही नाव की व्यक्तिगत पैसे से व्यवस्था कराई है।
इनसेट
पशु चारे का कराया वितरण
परसपुर। पुलिस की मौजूदगी में भौरीगंज बाढ़ केंद्र पर ग्रामीणों को पशु चारे का वितरण किया गया। बाढ़ में सब कुछ गवां चुके ग्रामीणों के सामने अपने परिवार के भरण पोषण के साथ पशुओं के चारे का सबसे बड़ा संकट है। भौरीगंज केंद्र पर बाढ़ पीड़ितों को बुलाकर उनके मवेशियों के लिए भूसे का वितरण कराया गया।
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अब तक 792 गांव बाढ़ की चपेट में
एनडीआरएफ व पीएसी को लगाया गया
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। जिले में बाढ़ से तबाही बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को छह बाढ़ चौकियां नदी में समा गई। वहीं अब तक 792 गांव घाघरा की चपेट में आ चुके हैं। चौकियों के डूबने से राहत कर्मियों को वहां से भागना पड़ा और अन्यत्र बाढ़ चौकी बनानी पड़ी। हालात बेकाबू देख प्रशासन ने बाढ़ क्षेत्र में रेस्क्यू आपरेशन के लिए एनडीआरएफ व पीएसी को लगाया है।
बाढ़ के सैलाब से करनैलगंज व परसपुर इलाके साथ तरबगंज व नवाबगंज का क्षेत्र भी आ गया है। जिले की चार तहसीलों में दो तहसील क्षेत्र का आधा हिस्सा बाढ़ से घिर गई है। परसपुर ब्लाक क्षेत्र की एक दर्जन ग्राम पंचायतों के मजरों को बाढ़ ने अपनी चपेट में ले लिया है। बहुअन मदार माझा, जैसिंह पुर सहित कई गांव अब पूरी तरह चपेट में आ गए हैं। नवाबगंज में तुलसीपुर माझा, नकहरा, जैतपुर, पटपरगंज, महंगूपुर, बखिरा, नवाबगंज गिर्द, गोकुला, दत्तनगर सहित एक दर्जन से अधिक ग्राम पंचायतों के सौ मजरे बाढ़ से घिर गए हैं।
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घाघरा का पानी लगातार क्षेत्र में फेलने से स्थिति भयावह होती जा रही है। घाघरा भी खतरे के निशान से करीब एक मीटर ऊपर ही टिकी हुई है। कई जगहों पर कटे बांध के हिस्से से पानी का रिसाव होने लगा है। एल्गिन-चरसड़ी बांध के इस तरफ की 98 ग्राम पंचायतें व उनके 792 मजरे बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। वहीं बाढ़ पीड़ितों की सुविधा के लिए बनाई गईं 9 में से 6 बाढ़ चौकियां भी बाढ़ की जद में आ गई हैं। जिनमें पाल्हापुर बाढ़ राहत केंद्र को बरगदी में स्थानान्तरित कर दिया गया है। गौरासिंहपुर को ग्राम प्रहलादगंज में ले जाया गया है। शाहपुर, चरसड़ी एवं भटपुरवा को भौरीगंज में स्थानान्तरित कर दिया गया है। इसके अलावा पसका, भौरीगंज एवं भंभुवा अपनी जगह पर हैं। इन बाढ़ राहत केंद्रों में करीब 5 फिट से ऊपर बाढ़ का पानी भरा हुआ है। कई गांव ऐसे हैं जहां ग्रामीणों ने नाव की खुद व्यवस्था की है या फिर सरकारी नावों को बाहर ले जाने के लिए अपने लोगों की निगरानी में कर दिया है। दूसरी ओर सरकारी मशीनरी के कर्मचारी बाढ़ का पानी अधिक होने एवं सभी रास्ते बंद होने की दशा में उनकी पहुंच गावों में नहीं हो पा रही है। जिससे राहत सामग्री भी पहुंचना मुश्किल हो गया है। बाढ़ से निपटने के लिए अब प्रशासन के पास महज एनडीआरएफ एवं पीएसी का ही सहारा है। जिसे कमान सौंपी जा चुकी है।
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प्रशासन की नजर में 434 मजरे ही बाढ़ से प्रभावित
आंकड़ों की बाजीगरी में प्रशासन की सरकारी फाइलों में अभी बाढ़ का दायरा बेहद कम है। संसाधनों के अभाव की पोल ख्ुालने के डर से आंकड़ों में सरकारी महकमा उलझा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 67 राजस्व ग्राम के 434 मजरों में ही बाढ़ है तथा 84 हजार 810 की आबादी मात्र प्रभावित हुई है। यदि सरकारी आंकड़ों को ही सही माना जाय तो अब तक के मात्र 290 नावें एवं एनडीआरएफ व पीएसी की 22 मोटरबोट बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगाई गई हैं, जो प्रभावित मजरों की तुलना काफी कम हैं।
इनसेट-
बाढ़ प्रभावित गांवों में फैली बीमारी
शुक्रवार को सीएचसी करनैलगंज में बाढ़ क्षेत्र के सर्दी, खांसी, बुखार, चकत्ते, दाने, खुजली, आखों के लाल होने वाले मरीजों की संख्या अधिक हो गई तो चिकित्सकों की कमी के चलते अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गये। उसके बाद अमर उजाला ने मामले से मंडलायुक्त को अवगत कराया तो आयुक्त ने तत्काल सीएमओ से बात करके सीएचसी एवं बाढ़ क्षेत्र में चिकित्सकों की तैनाती कराने का आश्वासन दिया। वहीं बाढ़ क्षेत्र में चिकित्सा सुविधा भी भगवान भरोसे है। बाढ़ चौकियों के हटाये जाने के बाद अब बाढ़ पीड़ितों को पांच से सात किलोमीटर दूरी तय करके इलाज के लिए जाना होगा। गावों में जाने के लिए व्यवस्था नहीं है तो स्वास्थ्य टीम को बाढ़ चौकियों के साथ स्थानान्तरित करके दूर कर दिया गया है।
इनसेट-
ग्रामीणों ने बनाया राहत केंद्र
एक गांव ऐसा भी है जहां ग्रामीणों ने बाढ़ राहत केंद्र की खुद स्थापना कराया है। ग्राम पंचायत मुडेंरवा में बीते दो दिनों से बाढ़ का पानी लगातार मजरों को प्रभावित करते हुए 20 से अधिक मजरों के करीब 200 घरों की 6 हजार आबादी को घेर लिया। करीब 6 कच्चे मकान गिर गये। कई बार ग्रामीणों ने प्रशासन को अवगत कराया मगर न तो नाव मिली न ही कोई सुविधा मिली। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि विशाल सिंह एवं आदर्श शिक्षक रविप्रताप सिंह ने बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित निकालने के साथ ही राहत केंद्रं बनाया जिसमें बिस्तर, दवायें, टार्च एवं खाने की सामग्री के साथ ही नाव की व्यक्तिगत पैसे से व्यवस्था कराई है।
इनसेट
पशु चारे का कराया वितरण
परसपुर। पुलिस की मौजूदगी में भौरीगंज बाढ़ केंद्र पर ग्रामीणों को पशु चारे का वितरण किया गया। बाढ़ में सब कुछ गवां चुके ग्रामीणों के सामने अपने परिवार के भरण पोषण के साथ पशुओं के चारे का सबसे बड़ा संकट है। भौरीगंज केंद्र पर बाढ़ पीड़ितों को बुलाकर उनके मवेशियों के लिए भूसे का वितरण कराया गया।