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Gonda News: अस्पतालों में डॉक्टरों के 75 पद खाली, बेपटरी हो रहीं स्वास्थ्य सेवाएं
Mon, 24 Feb 2025 10:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 24 Feb 2025 10:58 PM IST
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गोंडा। जिले के अधिकांश अस्पताल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। सीएचसी व पीएचसी में 75 डॉक्टरों की कमी है। कई सीएचसी में विशेषज्ञों की तैनाती ही नहीं है। ऐसे में एमबीबीएस या आयुष चिकित्सक ही मरीजों का उपचार करते हैं या फिर मेडिकल कॉलेज रेफर कर देते हैं। वहीं, सात पीएचसी पर तो एक भी डॉक्टर की तैनाती नहीं है।
जिले में 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। नियमानुसार प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अधीक्षक समेत छह डॉक्टर और पीएचसी पर एक एमबीबीएस व एक आयुष चिकित्सक के पद सृजित हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम समेत विभिन्न कार्यक्रमों के लिए अगल से चिकित्सकों की तैनाती की जाती है, लेकिन जिले के अधिकांश अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। कुल 178 डॉक्टरों के पदों के सापेक्ष 103 पदों पर ही तैनाती है। डॉक्टरों के 75 पद खाली होने की वजह से मरीजों काे स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सीएचसी बेलसर : विशेषज्ञ चिकित्सक ही नहीं, रोज 15-20 मरीज हो रहे रेफर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलसर में महिला रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ व हड्डी रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त हैं। जबकि सीएचसी आने वाले अधिकांश मरीज हड्डी रोग, महिला रोग व बाल रोग के ही होते हैं। करीब दो लाख आबादी की स्वास्थ्य सेवा का जिम्मा लिए यह सीएचसी डॉक्टरों की कमी से जूझ रही है। यहां छह के सापेक्ष सिर्फ दो ही चिकित्सक तैनात हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सतपाल सोनकर के अनुसार प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
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सीएचसी परसपुर : चार के सापेक्ष सिर्फ एक डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसपुर में चार डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष सिर्फ एक डॉक्टर की तैनाती है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. लवकेश शुक्ल ने बताया कि यहां डॉ. रवींद्र कुमार को संबद्ध किया गया है। आयुष चिकित्सक डॉ. रेखा सिंह के सहयोग से काम चलाया जा रहा है। चिकित्सकों के तैनाती के लिए पत्राचार किया गया है।
करनैलगंज सीएचसी : एफआरयू में भी नहीं हो रही सर्जरी
एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) का दर्जा प्राप्त करनैलगंज सीएचसी में भी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां सर्जन का पद वर्षों से रिक्त चल रहा है। ऐसे में मरीजों की सर्जरी नहीं हो पा रही है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि गोंडा-लखनऊ मार्ग दुर्घटना बहुल क्षेत्र होने के कारण हड्डी के मरीजों की संख्या अधिक होती है, लेकिन यहां कई वर्ष से हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इससे प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। यहां चीफ फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय सहित कई स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। इसके लिए कई बार पत्राचार किया गया है।
सात पीएचसी में एक भी डॉक्टर नहीं
जिले में 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इनमें से पीएचसी धनावा, मुड़ेरवा माफी, भोरहा, बैजपुर, खमरिया, बभनान व वीरपुर पीएचसी में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है। यहां फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी ही मरीजों को परामर्श व दवाएं देते हैं।
डॉक्टरों के तैनाती के लिए लिखा गया पत्र
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि जिले में डॉक्टरों के कमी की सूचना अपर निदेशक व शासन को दी गई है। जल्द ही सभी सीएचसी पर पद के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी।
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जिले में 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। नियमानुसार प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अधीक्षक समेत छह डॉक्टर और पीएचसी पर एक एमबीबीएस व एक आयुष चिकित्सक के पद सृजित हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम समेत विभिन्न कार्यक्रमों के लिए अगल से चिकित्सकों की तैनाती की जाती है, लेकिन जिले के अधिकांश अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। कुल 178 डॉक्टरों के पदों के सापेक्ष 103 पदों पर ही तैनाती है। डॉक्टरों के 75 पद खाली होने की वजह से मरीजों काे स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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सीएचसी बेलसर : विशेषज्ञ चिकित्सक ही नहीं, रोज 15-20 मरीज हो रहे रेफर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलसर में महिला रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ व हड्डी रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त हैं। जबकि सीएचसी आने वाले अधिकांश मरीज हड्डी रोग, महिला रोग व बाल रोग के ही होते हैं। करीब दो लाख आबादी की स्वास्थ्य सेवा का जिम्मा लिए यह सीएचसी डॉक्टरों की कमी से जूझ रही है। यहां छह के सापेक्ष सिर्फ दो ही चिकित्सक तैनात हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सतपाल सोनकर के अनुसार प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
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सीएचसी परसपुर : चार के सापेक्ष सिर्फ एक डॉक्टर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परसपुर में चार डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष सिर्फ एक डॉक्टर की तैनाती है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. लवकेश शुक्ल ने बताया कि यहां डॉ. रवींद्र कुमार को संबद्ध किया गया है। आयुष चिकित्सक डॉ. रेखा सिंह के सहयोग से काम चलाया जा रहा है। चिकित्सकों के तैनाती के लिए पत्राचार किया गया है।
करनैलगंज सीएचसी : एफआरयू में भी नहीं हो रही सर्जरी
एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) का दर्जा प्राप्त करनैलगंज सीएचसी में भी सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां सर्जन का पद वर्षों से रिक्त चल रहा है। ऐसे में मरीजों की सर्जरी नहीं हो पा रही है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि गोंडा-लखनऊ मार्ग दुर्घटना बहुल क्षेत्र होने के कारण हड्डी के मरीजों की संख्या अधिक होती है, लेकिन यहां कई वर्ष से हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। इससे प्राथमिक उपचार के बाद मरीज को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। यहां चीफ फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय सहित कई स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है। इसके लिए कई बार पत्राचार किया गया है।
सात पीएचसी में एक भी डॉक्टर नहीं
जिले में 52 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इनमें से पीएचसी धनावा, मुड़ेरवा माफी, भोरहा, बैजपुर, खमरिया, बभनान व वीरपुर पीएचसी में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं है। यहां फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी ही मरीजों को परामर्श व दवाएं देते हैं।
डॉक्टरों के तैनाती के लिए लिखा गया पत्र
सीएमओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि जिले में डॉक्टरों के कमी की सूचना अपर निदेशक व शासन को दी गई है। जल्द ही सभी सीएचसी पर पद के सापेक्ष डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी।