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Gonda News: दो वर्षों से अंग्रेजी दवा लिख रहे 75 आयुष चिकित्सक
Wed, 15 Jan 2025 11:00 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 15 Jan 2025 11:00 PM IST
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गोंडा। आयुर्वेद व होम्योपैथ की पढ़ाई कर स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात आयुष चिकित्सक पिछले दो वर्षों से अंग्रेजी (ऐलोपैथ) की दवाएं लिख रहे हैं। वजह पिछले दो साल से सीएचसी व पीएचसी पर आयुष की दवाएं नहीं भेजी गईं हैं। अमर उजाला की पड़ताल में पता चला है कि जिले में 75 डॉक्टर उस पैथी की दवाएं लिख रहे हैं, जिसकी उन्होंने पढ़ाई ही नहीं की।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 71 आयुष चिकित्सकों की संविदा पर नियुक्ति हुई है। इन्हें विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किया गया है। चार नियमित आयुष के चिकित्सक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात हैं। प्रति वर्ष आयुष की औषधियों की खरीद के लिए 16.50 लाख रुपये का बजट मिलता है। लेकिन पिछले दो वर्षों से सीएचसी पर दवाएं नहीं पहुंचीं।
आयुष दवाएं नहीं मिलीं, ऐलोपैथ से कर रहे इलाज
परसपुर सीएचसी पर इलाज कराने आईं ऊषा देवी को आयुष डॉक्टर ने अंग्रेजी दवा लिखकर उपचार की खानापूर्ति कर दी। मरीज को भी नहीं पता था कि डॉक्टर साहब किस पद्धति के चिकित्सक हैं। यहां तैनात आयुष चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि दो वर्ष से सीएचसी पर आयुर्वेदिक दवाएं भेजी ही नहीं गईं तो मजबूरी में अंग्रेजी दवाएं लिखनी पड़ती हैं। ड्यूटी तो करनी ही है। होम्योपैथिक की पढ़ाई करने वाली आयुष चिकित्सक डॉ. रेखा सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्ष से कोई दवा आई ही नहीं। डिमांड भेजी गई है। मजबूरी में अंग्रेजी दवा लिखनी पड़ती है।
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आयुष चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि दवाएं नहीं मिल रही हैं, वह ओपीडी के साथ स्कूलों में भ्रमण कर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। इसी प्रकार मुख्यालय पर सीएमओ कार्यालय के पीछे बने आयुष विंग में भी मरीजों को ऐलोपैथ की दवाएं लिखी गईं। अस्पताल के आयुष विंग में इलाज कराने आए अमित वर्मा, अनिल सहित एक दर्जन से अधिक मरीजों को अंग्रेजी दवाएं लिखी गईं।
दवाएं आ गई हैं, इंडेंट कर स्टोर से ले जाएं डॉक्टर
आयुष की दवाएं आ गईं हैं। डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि इंडेंट कर मुख्यालय के स्टोर से दवाएं ले जाएं। बजट न होने से समस्या हुई थी, लेकिन अब दवाएं न होने की बहानेबाजी नहीं चलेगी।
-- डॉ. रश्मि वर्मा, सीएमओ
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 71 आयुष चिकित्सकों की संविदा पर नियुक्ति हुई है। इन्हें विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात किया गया है। चार नियमित आयुष के चिकित्सक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात हैं। प्रति वर्ष आयुष की औषधियों की खरीद के लिए 16.50 लाख रुपये का बजट मिलता है। लेकिन पिछले दो वर्षों से सीएचसी पर दवाएं नहीं पहुंचीं।
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आयुष दवाएं नहीं मिलीं, ऐलोपैथ से कर रहे इलाज
परसपुर सीएचसी पर इलाज कराने आईं ऊषा देवी को आयुष डॉक्टर ने अंग्रेजी दवा लिखकर उपचार की खानापूर्ति कर दी। मरीज को भी नहीं पता था कि डॉक्टर साहब किस पद्धति के चिकित्सक हैं। यहां तैनात आयुष चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि दो वर्ष से सीएचसी पर आयुर्वेदिक दवाएं भेजी ही नहीं गईं तो मजबूरी में अंग्रेजी दवाएं लिखनी पड़ती हैं। ड्यूटी तो करनी ही है। होम्योपैथिक की पढ़ाई करने वाली आयुष चिकित्सक डॉ. रेखा सिंह ने कहा कि पिछले तीन वर्ष से कोई दवा आई ही नहीं। डिमांड भेजी गई है। मजबूरी में अंग्रेजी दवा लिखनी पड़ती है।
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आयुष चिकित्सक डॉ. दीपक कुमार ने बताया कि दवाएं नहीं मिल रही हैं, वह ओपीडी के साथ स्कूलों में भ्रमण कर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। इसी प्रकार मुख्यालय पर सीएमओ कार्यालय के पीछे बने आयुष विंग में भी मरीजों को ऐलोपैथ की दवाएं लिखी गईं। अस्पताल के आयुष विंग में इलाज कराने आए अमित वर्मा, अनिल सहित एक दर्जन से अधिक मरीजों को अंग्रेजी दवाएं लिखी गईं।
दवाएं आ गई हैं, इंडेंट कर स्टोर से ले जाएं डॉक्टर
आयुष की दवाएं आ गईं हैं। डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि इंडेंट कर मुख्यालय के स्टोर से दवाएं ले जाएं। बजट न होने से समस्या हुई थी, लेकिन अब दवाएं न होने की बहानेबाजी नहीं चलेगी।