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9 खंड शिक्षा अधिकारियों की ढिलाई से ड्रेस का 7 करोड़ फंसा

Thu, 05 Dec 2019 10:27 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Dec 2019 10:27 PM IST
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7 crores of dress trapped due to laxity of 9 block education officers
गोंडा। बेसिक शिक्षा में अधिकारियों की ढिलाई नौनिहालों के बजट पर भारी पड़ रहा है। जिले के नौ खंड शिक्षा अधिकारियों की ढिलाई से ड्रेस के बजट का उपभोग ही नहीं हो पा रहा है। ऐसा तब है जब जिले के 3139 परिषदीय स्कूलों के 3.36 नौनिहालों के ड्रेस वितरण का कार्य एक महीने पहले ही पूरा होना बता दिया है। अब पहली किश्त के बजट का उपभोग न देने से दूसरी किश्त नहीं मिल पा रही है। ड्रेस वितरण के बजट का 7 करोड़ रुपए फंसा हुआ है। बजट समय से न आने के कारण जिले के तीन हजार शिक्षक ड्रेस देने वालों से आंखें चुरा रहे हैं। इसमें 100 से अधिक स्कूलों में ड्रेस वितरण करने वाले स्वयं सहायता समूह के लोग भी हैं जो ड्रेस देने के बाद पैसा मांग रहे हैं।
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प्रदेश सरकार ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों को ड्रेस देने के लिए सितंबर में ही बजट की पहली किश्त दे दी थी। अक्तूबर से पहले ही ड्रेस वितरित करा दिया गया। जिले के ग्रामीण आजीविका मिशन के समूहों से ड्रेस लेने के लिए 100 से अधिक स्कूलों को चिन्हित करके दिया गया था। ड्रेस मिलने के बाद से इस मद में मिले 07 करोड़ रुपये को विभाग दबाए बैठा है। माना जा रहा है कि निदेशालय को ड्रेस वितरण के बारे में स्पष्ट सूचना ही नहीं दी गई है। इसमें 9 ब्लॉकों के खंड शिक्षा अधिकारियों की मनमानी बताई जा रही है। जिन्होंने अभी तक पहले किश्त के प्रयोग की जानकारी ही नहीं दी है।
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करीब 5 करोड़ के हिसाब की रिपोर्ट ब्लॉकों में फंसी हुई है। इससे ड्रेस देने वाले समूहों और स्थानीय दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जिले के हलधरमऊ, झंझरी, करनैलगंज, रुपईडीह, बेलसर, इंटियाथोक, वजीरगंज, नगर क्षेत्र समेत 9 ब्लॉकों से ड्रेस के खर्च हुए बजट का हिसाब नहीं मिला है। इन ब्लॉकों के कारण पूरे जिले के 16 ब्लॉकों और नगर क्षेत्रों के 3139 स्कूलों के ड्रेस वितरण का बजट नहीं जारी हो सका है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शासन से ही बजट नहीं आया है। वहीं ब्लॉकों से रिपोर्ट न आने से भी कार्य फंसा है।
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स्वेटर वितरण में हांफ रही फर्म, कांप रहे स्कूल के बच्चे
स्वेटर वितरण का कार्य इस बार फर्म के माध्यम से हो रहा है। स्थिति यह है कि अभी स्वेटर का सत्यापन ही ब्लाकों पर पूरा नही हो पाया है। 3.36 लाख बच्चों में भी दो लाख से अधिक बच्चों तक स्वेटर नहीं पहुंच पाया है। माना जा रहा है कि स्वेटर की साइज में भी काफी अंतर मिल रहा है। एक एसडीएम ने गुणवत्ता पर आंशिक सवाल खड़ा किया है। फिलहाल स्वेटर की आपूर्ति स्कूलों करने के बजाए बीआरसी तक की जा रही है। इसके पहले स्वेटर स्कूल तक जाता था। विभाग के अधिकारी भी स्वेटर वितरण के लिए गंभीर नही दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि 8 दिसंबर को अधिकारियों से शिक्षा महानिदेशक स्वेटर वितरण की समीक्षा करेंगे।
ड्रेस वितरण का कार्य शिक्षकों की तरफ से कराया जा चुका है। ब्लॉकों से रिपोर्ट न आने से बजट फंसा है यह दुखद है। विभाग को ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी चाहिए जो समय से उपभोग नही दे रहे हैं। शिक्षक के स्तर से देर होता तो अधिकारी कार्रवाई कर देते। ड्रेस का अवशेष भुगतान तत्काल किया जाए। -विनय तिवारी, अध्यक्ष शिक्षक संघ

ड्रेस वितरण के लिए तय बजट की दूसरी किश्त अभी शासन से प्राप्त नहीं हुई है। उपभोग न देने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों को चेतावनी दी गई है और रिपोर्ट मांगी गई है। शासन से बजट मिलते ही अवशेष का भुगतान कर दिया जाएगा। -मनिराम सिंह, बीएसए
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