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दो घंटे तक मानमनौव्वल पर माने ग्रामीण, वोट बहिष्कार की जिद छोड़ी 17-16-51
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एसडीएम और तहसीलदार ने दो घंटे मनाया तब छोड़ी चुनाव बहिष्कार की जिद
गोंडा। बिजली, सड़क व आवास की मांग पर अड़े ग्रामीणों द्वारा मतदान बहिष्कार करने की घोषणा के बाद प्रशासन की नींद खुली।
शुक्रवार को लालापुरवा गांव पहुंचे अधिकारियों को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। बहुत मानमनौव्वल के बाद ग्रामीणों ने बात मानी और अपनी जिद छोड़ने को तैयार हुए।
ब्लॉक मुख्यालय से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर लालापुरवा गांव स्थित है। जिसमें करीब 50 घर हैं। आधे से अधिक घर अभी छप्पर व झोपड़ी में हैं तथा आधा दर्जन ऐसे गरीब हैं जो टटिया और पन्नी का छाजन करके जीवन यापन कर रहे हैं।
इस गांव में सभी परिवार मजदूरी पेशा से जुड़े हैं। ग्राम पंचायत कादीपुर का यह बड़ा मजरा होने के बावजूद यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। करनैलगंज बिजली पावर प्लांट व पावर हाउस से मात्र आधा किलोमीटर के फासले पर बसे इस गांव के लोग बिजली की रोशनी के लिए तरस रहे हैं।
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लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए 10 रुपये देकर दुकानदार से चार्ज कराना पड़ता है। गांव के लोगों का कहना है कि गांव में बिजली दौड़ाने के लिए बिजली के खम्भे कई महीना पहले लगा दिए गए तथा कागजों में गांव बिजली की रोशनी से जगमगा रहा है।
मगर हकीकत ये है कि बिजली के तार नह़ी दौड़ाये गए हैं। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए कोई रास्ता नहीं है। बरसात में दो माह तक लोग पानी मे घुसकर गांव तक आते जाते हैं। पूरे गांव में एक भी गरीब को आवास का लाभ नही दिया गया।
जिससे आक्रोशित होकर गांव के लोगों ने किसी भी प्रत्याशी को गांव में नहीं घुसने देने का फैसला लिया था। शुक्रवार को अधिकारियों की टीम में उपजिलाधिकारी करनैलगंज रमाकांत वर्मा, तहसीलदार मिश्री सिंह चैहान, एसडीओ विजली विभाग, प्रभारी वीडीओ सहित कोतवाल राजेश कुमार सिंह मय पुलिस बल गांव में पहुंचे।
इतने दिनों बाद गांव में अधिकारियों को आया देख गरीब ग्रामीणों में आशा जगी है। एसडीएम ने ग्रामीणों को बताया कि एक सप्ताह के भीतर बिजली गांव में पहुंच जाएगी। बाकी सड़क और आवास का काम चुनाव के बाद कराया जाएगा।
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गोंडा। बिजली, सड़क व आवास की मांग पर अड़े ग्रामीणों द्वारा मतदान बहिष्कार करने की घोषणा के बाद प्रशासन की नींद खुली।
शुक्रवार को लालापुरवा गांव पहुंचे अधिकारियों को ग्रामीणों के गुस्से का सामना करना पड़ा। बहुत मानमनौव्वल के बाद ग्रामीणों ने बात मानी और अपनी जिद छोड़ने को तैयार हुए।
ब्लॉक मुख्यालय से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर लालापुरवा गांव स्थित है। जिसमें करीब 50 घर हैं। आधे से अधिक घर अभी छप्पर व झोपड़ी में हैं तथा आधा दर्जन ऐसे गरीब हैं जो टटिया और पन्नी का छाजन करके जीवन यापन कर रहे हैं।
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इस गांव में सभी परिवार मजदूरी पेशा से जुड़े हैं। ग्राम पंचायत कादीपुर का यह बड़ा मजरा होने के बावजूद यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। करनैलगंज बिजली पावर प्लांट व पावर हाउस से मात्र आधा किलोमीटर के फासले पर बसे इस गांव के लोग बिजली की रोशनी के लिए तरस रहे हैं।
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लोगों को मोबाइल चार्ज करने के लिए 10 रुपये देकर दुकानदार से चार्ज कराना पड़ता है। गांव के लोगों का कहना है कि गांव में बिजली दौड़ाने के लिए बिजली के खम्भे कई महीना पहले लगा दिए गए तथा कागजों में गांव बिजली की रोशनी से जगमगा रहा है।
मगर हकीकत ये है कि बिजली के तार नह़ी दौड़ाये गए हैं। गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए कोई रास्ता नहीं है। बरसात में दो माह तक लोग पानी मे घुसकर गांव तक आते जाते हैं। पूरे गांव में एक भी गरीब को आवास का लाभ नही दिया गया।
जिससे आक्रोशित होकर गांव के लोगों ने किसी भी प्रत्याशी को गांव में नहीं घुसने देने का फैसला लिया था। शुक्रवार को अधिकारियों की टीम में उपजिलाधिकारी करनैलगंज रमाकांत वर्मा, तहसीलदार मिश्री सिंह चैहान, एसडीओ विजली विभाग, प्रभारी वीडीओ सहित कोतवाल राजेश कुमार सिंह मय पुलिस बल गांव में पहुंचे।
इतने दिनों बाद गांव में अधिकारियों को आया देख गरीब ग्रामीणों में आशा जगी है। एसडीएम ने ग्रामीणों को बताया कि एक सप्ताह के भीतर बिजली गांव में पहुंच जाएगी। बाकी सड़क और आवास का काम चुनाव के बाद कराया जाएगा।