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बेसिक स्कूलों में सप्ताह में 45 घंटे होगी पढ़ाई
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गोंडा। कोरोना काल के बाद नियमित रूप से स्कूल खुलने लगे हैं जिससे बच्चों में उत्साह है। अब बेसिक शिक्षा विभाग का पूरा जोर पढ़ाई पर है। इसके लिए स्कूलों में पढ़ाई के तरीकों के साथ ही समय भी तय किया गया है। सप्ताह में 45 घंटे पढ़ाई का चार्ट तैयार किया गया है जिसे स्कूलों में लागू कर दिया गया। पढ़ाई के लिए कार्ययोजना तैयार कर शिक्षा देने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही जिले के 11 हजार के करीब शिक्षकों और शिक्षामित्रों को प्रशिक्षण देकर भी नए तरीके से पढ़ाई के बारे में जानकारी दी गई है।
बेसिक शिक्षा परिषद ने तय किया है कि प्राथमिक विद्यालयों में 200 कार्यदिवस या 800 घंटे पढ़ाई हो। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 220 कार्य दिवस या 1000 घंटे पठन-पाठन हो। इसके लिए तय किया गया है कि सप्ताह में शिक्षण कार्य न्यूनतम 45 घंटे हो। कार्यदिवस या घंटे बढ़ाए जाने के पीछे शासन की मंशा परिषदीय स्कूलों के बच्चों की छूटी हुई पढ़ाई पूरी कराना है।
बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन 2628 विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2022-23 में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम की शर्तों के अनुरूप शिक्षण कार्य कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कार्यदिवस और शैक्षिक घंटे निर्धारित किए गए हैं। इसकी एक वजह कोरोना के कारण सत्र 2019-20 और सत्र 2020-21 में हुए शिक्षा के नुकसान की भरपाई करना भी है।
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विभाग के अनुसार कोरोना महामारी की वजह से शैक्षिक सत्र 2019-20 तथा 2020-21 में विद्यालय बंद होने के कारण शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित रही हैं। शैक्षिक वर्ष 2021-22 में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम में निर्धारित मानक से कम पढ़ाई हो सकी है। इसमें प्राथमिक विद्यालयों में 133 तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 141 शिक्षण दिवस में शिक्षण कार्य हो सका है। इसकी भरपाई के लिए अब नई व्यवस्था से पढ़ाई कराई जाएगी ताकि बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े।
ग्रीष्मावकाश होने तक परिषदीय स्कूलों के संचालन के समय में बदलाव हुआ है। बच्चों को सुबह साढ़े सात बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। इससे समय घटने से पढ़ाई के तय मानक प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में पढ़ाई करने का समय अधिक मिल सके, इसलिए एमडीएम खाने के समय में कटौती की गई है। पहले 45 मिनट के होने वाले मध्यावकाश को अब 15 मिनट कर दिया गया है। इतने ही समय में बच्चों को एमडीएम खिलाना होगा। एक से कक्षा आठ तक के बच्चों की पढ़ाई का समय भी बदला गया है।
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बेसिक शिक्षा परिषद ने तय किया है कि प्राथमिक विद्यालयों में 200 कार्यदिवस या 800 घंटे पढ़ाई हो। इसी प्रकार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 220 कार्य दिवस या 1000 घंटे पठन-पाठन हो। इसके लिए तय किया गया है कि सप्ताह में शिक्षण कार्य न्यूनतम 45 घंटे हो। कार्यदिवस या घंटे बढ़ाए जाने के पीछे शासन की मंशा परिषदीय स्कूलों के बच्चों की छूटी हुई पढ़ाई पूरी कराना है।
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बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन 2628 विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2022-23 में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम की शर्तों के अनुरूप शिक्षण कार्य कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कार्यदिवस और शैक्षिक घंटे निर्धारित किए गए हैं। इसकी एक वजह कोरोना के कारण सत्र 2019-20 और सत्र 2020-21 में हुए शिक्षा के नुकसान की भरपाई करना भी है।
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विभाग के अनुसार कोरोना महामारी की वजह से शैक्षिक सत्र 2019-20 तथा 2020-21 में विद्यालय बंद होने के कारण शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित रही हैं। शैक्षिक वर्ष 2021-22 में निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम में निर्धारित मानक से कम पढ़ाई हो सकी है। इसमें प्राथमिक विद्यालयों में 133 तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 141 शिक्षण दिवस में शिक्षण कार्य हो सका है। इसकी भरपाई के लिए अब नई व्यवस्था से पढ़ाई कराई जाएगी ताकि बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े।
ग्रीष्मावकाश होने तक परिषदीय स्कूलों के संचालन के समय में बदलाव हुआ है। बच्चों को सुबह साढ़े सात बजे से दोपहर साढ़े बारह बजे तक उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है। इससे समय घटने से पढ़ाई के तय मानक प्रभावित हो रहे थे। ऐसे में पढ़ाई करने का समय अधिक मिल सके, इसलिए एमडीएम खाने के समय में कटौती की गई है। पहले 45 मिनट के होने वाले मध्यावकाश को अब 15 मिनट कर दिया गया है। इतने ही समय में बच्चों को एमडीएम खिलाना होगा। एक से कक्षा आठ तक के बच्चों की पढ़ाई का समय भी बदला गया है।