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बिना पीओएस मशीन वाले दुकानदारों का रद्द होगा लाईसेंस 157
Updated Sun, 28 Jan 2018 11:05 PM IST
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बिना पीओएस मशीन वाले दुकानदारों का रद्द होगा लाइसेंस 157
गोंडा। जिले में अब सभी खाद की दुकानों पर प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) के जरिये ही उर्वरकों की बिक्री की जाएगी। सभी दुकानदारों को पीओएस मशीन में 31 जनवरी तक अपने दुकान गोदाम के पूरे खाद के स्टाक को पीओएस मशीन में अपलोड करना होगा।
जिले में अभी 157 पंजीकृत खाद विक्रेताओं की ओर से पीओएस मशीन नही लिया गया है। इसके अलावा कुल 1450 दुकानदारों में से अभी तक मात्र 450 दुकानदारों ने ही अपने स्टाक को पीओएस मशीन में अपलोड किया है। नियमों के पालन में मनमानी करने वाले इन दुकानदारों पर कार्रवाई हो सकती है।
जिले में रबी, खरीफ, जायद सीजन के अलावा गन्ना, मेन्था, केला जैसी कुछ नकदी फसलों की खेती की जाती है। आमतौर पर इन फसलों के अच्छे उत्पादन के लिए किसान डीएपी, यूरिया, पोटाश, सुपर फास्फेट, एनपीके, जिंक सल्फेट, माइक्रोन्यूट्रियन्ट के अलावा कुछ जैविक खाद का प्रयोग करते हैं।
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जिले में इन खाइ की बिक्री साधन सहकारी समितियों व निजी खाद विक्रेताओं के जरिये किया जाता है। तम्बाकू जैसे फसलों को चार गुना खाद का प्रयोग होता है। इसके अलावा पड़ोसी देश में इसकी बड़ी डिमांड होने से खाद की कालाबाजारी भी बड़े पैमाने पर होती है।
शासन ने खाद की कालाबाजारी व ओवर रेटिंग को रोकने के लिए पीओएस मशीन के जरिये वास्तविक किसानों को ही उर्वरक बिक्री करने की व्यवस्था की है। सभी उर्वरक दुकानदारों के लिए पीओएस मशीन अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके अलावा उन्हें अब अपने दुकान के स्टाक को अपलोड करने के लिए 31 जनवरी तक की मोहलत दी गई है ताकि उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता बनी रहे। वहीं जिले के उवर्रक की कालाबाजारी करने वालों को नई व्यवस्था रास नही आ रही है। कई लोगों ने मुश्किल से पीओएस मशीन ली है लेकिन अब वह उस पर डाटा अपलोड नही कर रहे हैं। हालांकि विभाग उनपर कार्रवाई का शिकंजा कसने जा रहा है।
इनसेट
जिले में लाइसेंसी व पीओएस मशीन धारक खाद दुकानदारों की स्थिति
कुल पंजीकृत दुकानदार - 2000
कुल वैद्य लाइसेंसी दुकानदार- 1607
कुल पीओएस मशीन धारक दुकानदार - 1450
गोंडा। शासन के निर्देश पर कृषि विभाग ने दुकानदारों को प्वांइट आफ सेल (पीओएस) मशीन का वितरण कर दिया है। जिले में पीओएस मशीन 1450 दुकानदारों को तो वितरण कर दिया है लेकिन दुकानदार पीओएस मशीन में अपने दुकान गोदाम के खाद स्टाक को अपलोड करने से कतरा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि दुकानदार अपने दुकान का स्टाक पीओएस मशीन में फीड करने से कतरा रहे हैं। उनके स्टाक की स्थिति आनलाइन न दिखे और वह खाद की कृतिम किल्लत बनाकर किसानों को लूटते रहें, इसके लिए व अपने स्टाक को आनलाइन नही करना चाह रहे हैं। जिले में विभाग की ओर से 1450 दुकानदारों को पीओएस मशीन बांटा जा चुका है।
लेकिन इनमें से अभी तक मात्र 450 दुकानदारों ने ही अपने गोदाम दुकान के सक की स्थिति को अपलोड किया है। शासन की ओर से इसके लिए 31 जनवरी तक का समय दिया गया है। इसके बावजूद अभी तक आधे लोगों ने भी फीडिंग नही की हैं।
इनसेट
जिले में प्रयोग होने वाले उर्वरक
* यूरियां * डीएपी * पोटाश * एनपीके * जिंक सल्फेट * माइक्रो न्युट्रियन्ट * सुपर फास्फेट * जैविक उर्वरक किट * सल्फर ।
इनसेट
सूचना अपडेट न रखने वाले दुकानदारों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। जिले में अब तक 1450 दुकानदारों ने पीओएस मशीन लिया है। सभी दुकानदारों को 31 जनवरी तक अपने दुकान व गोदाम के खाद का स्टाक अपलोड करना जरूरी है।
बिना पीओएस मशीन व नियमानुसार आनलाइन अपडेट डाटा न रखने वालों पर कार्रवाई होगी। जिले में इस समय उर्वरक की कोई कमी नही है। रबी फसलों के लिए यूरिया की और डिमांड भेजी गई है। ’
- विनय सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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गोंडा। जिले में अब सभी खाद की दुकानों पर प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) के जरिये ही उर्वरकों की बिक्री की जाएगी। सभी दुकानदारों को पीओएस मशीन में 31 जनवरी तक अपने दुकान गोदाम के पूरे खाद के स्टाक को पीओएस मशीन में अपलोड करना होगा।
जिले में अभी 157 पंजीकृत खाद विक्रेताओं की ओर से पीओएस मशीन नही लिया गया है। इसके अलावा कुल 1450 दुकानदारों में से अभी तक मात्र 450 दुकानदारों ने ही अपने स्टाक को पीओएस मशीन में अपलोड किया है। नियमों के पालन में मनमानी करने वाले इन दुकानदारों पर कार्रवाई हो सकती है।
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जिले में रबी, खरीफ, जायद सीजन के अलावा गन्ना, मेन्था, केला जैसी कुछ नकदी फसलों की खेती की जाती है। आमतौर पर इन फसलों के अच्छे उत्पादन के लिए किसान डीएपी, यूरिया, पोटाश, सुपर फास्फेट, एनपीके, जिंक सल्फेट, माइक्रोन्यूट्रियन्ट के अलावा कुछ जैविक खाद का प्रयोग करते हैं।
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जिले में इन खाइ की बिक्री साधन सहकारी समितियों व निजी खाद विक्रेताओं के जरिये किया जाता है। तम्बाकू जैसे फसलों को चार गुना खाद का प्रयोग होता है। इसके अलावा पड़ोसी देश में इसकी बड़ी डिमांड होने से खाद की कालाबाजारी भी बड़े पैमाने पर होती है।
शासन ने खाद की कालाबाजारी व ओवर रेटिंग को रोकने के लिए पीओएस मशीन के जरिये वास्तविक किसानों को ही उर्वरक बिक्री करने की व्यवस्था की है। सभी उर्वरक दुकानदारों के लिए पीओएस मशीन अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके अलावा उन्हें अब अपने दुकान के स्टाक को अपलोड करने के लिए 31 जनवरी तक की मोहलत दी गई है ताकि उर्वरकों की बिक्री में पारदर्शिता बनी रहे। वहीं जिले के उवर्रक की कालाबाजारी करने वालों को नई व्यवस्था रास नही आ रही है। कई लोगों ने मुश्किल से पीओएस मशीन ली है लेकिन अब वह उस पर डाटा अपलोड नही कर रहे हैं। हालांकि विभाग उनपर कार्रवाई का शिकंजा कसने जा रहा है।
इनसेट
जिले में लाइसेंसी व पीओएस मशीन धारक खाद दुकानदारों की स्थिति
कुल पंजीकृत दुकानदार - 2000
कुल वैद्य लाइसेंसी दुकानदार- 1607
कुल पीओएस मशीन धारक दुकानदार - 1450
गोंडा। शासन के निर्देश पर कृषि विभाग ने दुकानदारों को प्वांइट आफ सेल (पीओएस) मशीन का वितरण कर दिया है। जिले में पीओएस मशीन 1450 दुकानदारों को तो वितरण कर दिया है लेकिन दुकानदार पीओएस मशीन में अपने दुकान गोदाम के खाद स्टाक को अपलोड करने से कतरा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि दुकानदार अपने दुकान का स्टाक पीओएस मशीन में फीड करने से कतरा रहे हैं। उनके स्टाक की स्थिति आनलाइन न दिखे और वह खाद की कृतिम किल्लत बनाकर किसानों को लूटते रहें, इसके लिए व अपने स्टाक को आनलाइन नही करना चाह रहे हैं। जिले में विभाग की ओर से 1450 दुकानदारों को पीओएस मशीन बांटा जा चुका है।
लेकिन इनमें से अभी तक मात्र 450 दुकानदारों ने ही अपने गोदाम दुकान के सक की स्थिति को अपलोड किया है। शासन की ओर से इसके लिए 31 जनवरी तक का समय दिया गया है। इसके बावजूद अभी तक आधे लोगों ने भी फीडिंग नही की हैं।
इनसेट
जिले में प्रयोग होने वाले उर्वरक
* यूरियां * डीएपी * पोटाश * एनपीके * जिंक सल्फेट * माइक्रो न्युट्रियन्ट * सुपर फास्फेट * जैविक उर्वरक किट * सल्फर ।
इनसेट
सूचना अपडेट न रखने वाले दुकानदारों का लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। जिले में अब तक 1450 दुकानदारों ने पीओएस मशीन लिया है। सभी दुकानदारों को 31 जनवरी तक अपने दुकान व गोदाम के खाद का स्टाक अपलोड करना जरूरी है।
बिना पीओएस मशीन व नियमानुसार आनलाइन अपडेट डाटा न रखने वालों पर कार्रवाई होगी। जिले में इस समय उर्वरक की कोई कमी नही है। रबी फसलों के लिए यूरिया की और डिमांड भेजी गई है। ’
- विनय सिंह, जिला कृषि अधिकारी