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अकेले शिक्षकों के जिम्मे पर स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था
Updated Mon, 21 Aug 2017 11:48 PM IST
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अकेले शिक्षकों के जिम्मे पर शिक्षण व्यवस्था
शिक्षामित्रों के स्कूल बहिष्कार और लखनऊ कूच से पढ़ाई चौपट
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। शिक्षामित्रों के स्कूल बहिष्कार ने परिषदीय स्कूलों के संचालन पर संकट खड़ा कर दिया है। दो हजार शिक्षामित्रों के स्कूल न जाने तथा विरोध करने के कारण शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। कई स्कूलों में शिक्षक अकेले अध्यापन का कार्य कर रहे हैं जिससे स्कूलों में बच्चों को संभालने के लिए शिक्षकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। शिक्षामित्रों के स्कूल बहिष्कार से विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षक पर ही सैकड़ों बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी आ गई है।
दो वर्ष पहले जिले के करीब दो हजार शिक्षामित्रों को समायोजित कर सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दी गई थी। इनकी तैनाती के बाद कई बंद स्कूलों का ताला भी खुल गया था और शैक्षिक माहौल में भी सुधार आया था। लेकिन 12 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट ने इनके समायोजन को अवैध मानते हुए इसे रद्द कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी लेकिन वहां से भी इन्हें कोई राहत नही मिली और 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को जायज ठहरा दिया। सहायक अध्यापक पद के समायोजन रद्द होने तथा सरकार से वार्ता विफल होने के कारण शिक्षामित्रों ने स्कूलों का बहिष्कार कर आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया है। इस आंदोलन के कारण जिले के करीब दो हजार समायोजित शिक्षामित्र स्कूल नहीं जा रहे हैं जिससे प्राथमिक स्कूलों की शैक्षिक व्यवस्था चरमराने लगी है। जिस स्कूल में शिक्षामित्र समेत दो अध्यापकों की तैनाती थी वहां शिक्षामित्रों के बहिष्कार के बाद अब सिर्फ एक शिक्षक की तैनाती ही बएी है। ऐसे में स्कूल की व्यवस्था अब अकेले शिक्षक को ही संभालनी पड़ रही है। कहीं कहीं छात्र संख्या अधिक होने के कारण शिक्षक बच्चों को संभालने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।
केस-एक
प्राथमिक विद्यालय चौरी हरसोपट्टी-झंझरी
गोंडा। झंझरी शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चौरी हरसोपट्टी में दो समायोजित शिक्षामित्र अवधेश मणि मिश्रा तथा सुषमा पांडेय व एक शिक्षिका स्वाती समेत तीन अध्यापकों की तैनाती है। विद्यालय में करीब 100 छात्र छात्राओं को ना मांकन है। समायोजन निरस्त होने के बाद शिक्षामित्र अवधेश मणि मिश्रा व सुषमा पांडेय ने स्कूल का बहिष्कार कर दिया है। ऐसे में विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी अब स्वाती के जिम्मे आ गई है। स्वाती का कहना है कि अकेले 100 बच्चों को संभालने में उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।
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केस-दो
प्राथमिक विद्यालय गढ़ी- पिपरी रोहुआ तरबगंज
गोंडा। तरबगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गढ़ी में भी यही हालात है।यहां 140 छात्र छात्राओं का नामांकन है लेकिन अकेले शिक्षक के भरोसे स्कूल का संचालन हो रहा है। विद्यालय के सहायक अध्यापक सुधीर तिवारी के मुताबिक उनके अलावा इस स्कूल में शिक्षामित्र से समायोजित होकर आए धनपय सोनी व भीमसेन की तैनाती थी। धनपय सोनी ही विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक भी थे लेकिन समायोजन निरस्त होने के बाद दोनो लोगो ने स्कूल का बहिष्कार कर दिया है। ऐसे में उन्हे अकेले ही 140 बच्चों के साथ जूझना पड़ रहा है।
केस-तीन
प्राथमिक विद्यालय सोनवरसा-तरबगंज
गोंडा। तरबगंज के ही प्राथमिक विद्यालय सोनवरसा की हालत और भी खराब है। वर्ष 2014 में यह स्कूल बंद था। समायोजन होने के बाद अध्यापक बनकर आए गयाप्रसाद वर्मा ने इस सकूल का ताला खोला और संचालन शुरु किया। बाद में एक और शिक्षामित्र राजकुमारी देवी समायोजित होकर इस स्कूल में पहुंच गई। तीसरे शिक्षक के रुप में हाल ही में नवीन प्रताप सिंह की तैनाती हुई है। समायोजन निरस्त होने के बाद दोनो समायोजित शिक्षक चले गए हैं। अब नवीन कुमार सिंह ही अकेले 105 बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
वर्जन
हमारे सभी स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में तैनाती है। इसलिए शिक्षामित्रों के बहिष्कार का बहुत ज्यादा प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर नहीं पड़ा है। सभी स्कूल सुचारु रूप से संचालित हो रहे हैं। अगर किसी स्कूल में समस्या सामने आती है तो उसका समाधान किया जायेगा।
-संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए
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शिक्षामित्रों के स्कूल बहिष्कार और लखनऊ कूच से पढ़ाई चौपट
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। शिक्षामित्रों के स्कूल बहिष्कार ने परिषदीय स्कूलों के संचालन पर संकट खड़ा कर दिया है। दो हजार शिक्षामित्रों के स्कूल न जाने तथा विरोध करने के कारण शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। कई स्कूलों में शिक्षक अकेले अध्यापन का कार्य कर रहे हैं जिससे स्कूलों में बच्चों को संभालने के लिए शिक्षकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। शिक्षामित्रों के स्कूल बहिष्कार से विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षक पर ही सैकड़ों बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी आ गई है।
दो वर्ष पहले जिले के करीब दो हजार शिक्षामित्रों को समायोजित कर सहायक अध्यापक पद पर तैनाती दी गई थी। इनकी तैनाती के बाद कई बंद स्कूलों का ताला भी खुल गया था और शैक्षिक माहौल में भी सुधार आया था। लेकिन 12 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट ने इनके समायोजन को अवैध मानते हुए इसे रद्द कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी लेकिन वहां से भी इन्हें कोई राहत नही मिली और 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को जायज ठहरा दिया। सहायक अध्यापक पद के समायोजन रद्द होने तथा सरकार से वार्ता विफल होने के कारण शिक्षामित्रों ने स्कूलों का बहिष्कार कर आंदोलन का रास्ता अख्तियार किया है। इस आंदोलन के कारण जिले के करीब दो हजार समायोजित शिक्षामित्र स्कूल नहीं जा रहे हैं जिससे प्राथमिक स्कूलों की शैक्षिक व्यवस्था चरमराने लगी है। जिस स्कूल में शिक्षामित्र समेत दो अध्यापकों की तैनाती थी वहां शिक्षामित्रों के बहिष्कार के बाद अब सिर्फ एक शिक्षक की तैनाती ही बएी है। ऐसे में स्कूल की व्यवस्था अब अकेले शिक्षक को ही संभालनी पड़ रही है। कहीं कहीं छात्र संख्या अधिक होने के कारण शिक्षक बच्चों को संभालने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं।
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केस-एक
प्राथमिक विद्यालय चौरी हरसोपट्टी-झंझरी
गोंडा। झंझरी शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय चौरी हरसोपट्टी में दो समायोजित शिक्षामित्र अवधेश मणि मिश्रा तथा सुषमा पांडेय व एक शिक्षिका स्वाती समेत तीन अध्यापकों की तैनाती है। विद्यालय में करीब 100 छात्र छात्राओं को ना मांकन है। समायोजन निरस्त होने के बाद शिक्षामित्र अवधेश मणि मिश्रा व सुषमा पांडेय ने स्कूल का बहिष्कार कर दिया है। ऐसे में विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी अब स्वाती के जिम्मे आ गई है। स्वाती का कहना है कि अकेले 100 बच्चों को संभालने में उसे कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है।
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केस-दो
प्राथमिक विद्यालय गढ़ी- पिपरी रोहुआ तरबगंज
गोंडा। तरबगंज क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गढ़ी में भी यही हालात है।यहां 140 छात्र छात्राओं का नामांकन है लेकिन अकेले शिक्षक के भरोसे स्कूल का संचालन हो रहा है। विद्यालय के सहायक अध्यापक सुधीर तिवारी के मुताबिक उनके अलावा इस स्कूल में शिक्षामित्र से समायोजित होकर आए धनपय सोनी व भीमसेन की तैनाती थी। धनपय सोनी ही विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक भी थे लेकिन समायोजन निरस्त होने के बाद दोनो लोगो ने स्कूल का बहिष्कार कर दिया है। ऐसे में उन्हे अकेले ही 140 बच्चों के साथ जूझना पड़ रहा है।
केस-तीन
प्राथमिक विद्यालय सोनवरसा-तरबगंज
गोंडा। तरबगंज के ही प्राथमिक विद्यालय सोनवरसा की हालत और भी खराब है। वर्ष 2014 में यह स्कूल बंद था। समायोजन होने के बाद अध्यापक बनकर आए गयाप्रसाद वर्मा ने इस सकूल का ताला खोला और संचालन शुरु किया। बाद में एक और शिक्षामित्र राजकुमारी देवी समायोजित होकर इस स्कूल में पहुंच गई। तीसरे शिक्षक के रुप में हाल ही में नवीन प्रताप सिंह की तैनाती हुई है। समायोजन निरस्त होने के बाद दोनो समायोजित शिक्षक चले गए हैं। अब नवीन कुमार सिंह ही अकेले 105 बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
वर्जन
हमारे सभी स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या में तैनाती है। इसलिए शिक्षामित्रों के बहिष्कार का बहुत ज्यादा प्रभाव शिक्षा व्यवस्था पर नहीं पड़ा है। सभी स्कूल सुचारु रूप से संचालित हो रहे हैं। अगर किसी स्कूल में समस्या सामने आती है तो उसका समाधान किया जायेगा।
-संतोष कुमार देव पांडेय, बीएसए