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बाढ़ की चपेट में 40 हजार आबादी
अमर उजाला/गोंडा
Updated Mon, 01 Aug 2016 11:40 PM IST
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सड़क पर भरा पानी
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा व सरयू के कछार पर बसीं दस ग्राम पंचायतों के करीब 70 मजरे बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। यहां की करीब 40 हजार आबादी कोे पेयजल व बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से अभी तक केवल नावें उपलब्ध करायी गई हैं। मेडिकल टीमों का भ्रमण हो रहा है, लेकिन कुछ ऐसे मजरे हैं, जहां टीम के सदस्य पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। ऐसे में लोग बुखार आदि से जूझ रहे हैं।
सबसे बड़ा संकट पशुओं के चारे तथा शुद्ध पेयजल का है। बाढ़ के पानी से घिरे हैंडपंपों का ही पानी ग्रामीणों को मिल रहा है। ऐसे में किसी भयावह संक्रामक रोग से जूझना पड़ सकता है। इन मजरों की करीब 500 एकड़ फसल नष्ट हो चुकी है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है, जो कभी भी हादसे का सबब बन सकता है।
तरबगंज तहसील क्षेत्र की छह ग्राम पंचायतों के 57 मजरे पूरी तरह सरयू की बाढ़ से घिर चुके हैं। बिजली न होने की वजह से पीड़ितों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है। इन पीड़ितों को मिट्टी तेल का वितरण भी नहीं किया गया है। ऐसे में अब इनके घरों में ढिबरी भी नहीं जल पा रही है।
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जैतपुर माझा के सोहनपुरवा गांव निवासी महेश निषाद ने बताया कि सरयू की बाढ़ में यहां लगभग सभी घर बीते कई सालों मेें नदी में समा चुके हैं। इस पुरवे पर केवल उनका घर बचा है। यहां एक मात्र नल है, जो पानी से घिर गया है। इसी नल का दूषित पानी पीना मजबूरी है।
जैतपुर के ही भुटकुन पुरवा निवासी छेदी ने बताया कि गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी है। मवेशियों को चारा नहीं मिल रहा है। दुल्लापुर ग्राम पंचायत के खालेपुरवा निवासी ज्वाला निषाद ने बताया कि गांव पूरी तरह बाढ़ से घिर गया है। यहां तक मेडिकल टीम भी नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में गांव में करीब एक दर्जन लोगों को बुखार है। साखीपुर ग्राम पंचायत के रेता गांव निवासी शोभा ने बताया कि उनका गांव नदी के बीचोबीच बसा है।
एक तरफ टेढ़ी नदी तो दूसरी तरफ सरयू है। दोनों के मध्य गांव होने के नाते पूरा गांव संकट में है। यहां न मिट्टी तेल बंटा है और न किसी प्रकार की सुविधा दी गई है। प्रशासन की ओर से दो नावें दी गई हैं जिससे बच्चों को उस पार होकर स्कूल जाना पड़ता है।
इसी तरह करनैलगंज तहसील क्षेत्र का चंदापुर किटौली के तीन मजरे घाघरा की बाढ़ से घिर गए हैं। इसके अलावा घाघरा के इस पार बाराबंकी की तीन ग्राम पंचायतें परसावल, रायपुर व नैपुर के सभी मजरे पानी से घिरे हैं। नवाबगंज विकास खंड के बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों में प्रशासन की ओर से 26 नावें लगाई गई हैं। जैतपुर माझा में पांच, माझाराठ में छह, दुर्गागंज में छह, दुल्लापुर में चार, साखीपुर में दो तथा तुलसीपुर माझा में पांच नावें लगाई गई हैं। एसडीएम जेपीसिंह ने बताया कि मेडिकल टीम व बाढ़ चौकियों पर राहत कर्मियों को कैंप करने का निर्देश दिया गया है।
नवाबगंज के इन छह ग्राम पंचायतों में 12 में से दो विद्यालयों में पानी घुस जाने के कारण यहां पढ़ाई पूरी तरह ठप हैं। जबकि 10 स्कूलों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। जैतपुर व माझा राठ के दो स्कूलों में पानी भर गया है। तुलसीपुर माझा के सात स्कूलों में बच्चे व शिक्षक दहशत में हैं। यहां शिक्षक तो किसी तरह पहुंच कर स्कूल खोल देते हैं, लेकिन बाढ़ के मुहाने पर होने के नाते यहां भी पढ़ाई ठप है।
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सबसे बड़ा संकट पशुओं के चारे तथा शुद्ध पेयजल का है। बाढ़ के पानी से घिरे हैंडपंपों का ही पानी ग्रामीणों को मिल रहा है। ऐसे में किसी भयावह संक्रामक रोग से जूझना पड़ सकता है। इन मजरों की करीब 500 एकड़ फसल नष्ट हो चुकी है। बच्चों को स्कूल जाने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है, जो कभी भी हादसे का सबब बन सकता है।
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तरबगंज तहसील क्षेत्र की छह ग्राम पंचायतों के 57 मजरे पूरी तरह सरयू की बाढ़ से घिर चुके हैं। बिजली न होने की वजह से पीड़ितों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ रही है। इन पीड़ितों को मिट्टी तेल का वितरण भी नहीं किया गया है। ऐसे में अब इनके घरों में ढिबरी भी नहीं जल पा रही है।
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जैतपुर माझा के सोहनपुरवा गांव निवासी महेश निषाद ने बताया कि सरयू की बाढ़ में यहां लगभग सभी घर बीते कई सालों मेें नदी में समा चुके हैं। इस पुरवे पर केवल उनका घर बचा है। यहां एक मात्र नल है, जो पानी से घिर गया है। इसी नल का दूषित पानी पीना मजबूरी है।
जैतपुर के ही भुटकुन पुरवा निवासी छेदी ने बताया कि गांव के चारों तरफ बाढ़ का पानी है। मवेशियों को चारा नहीं मिल रहा है। दुल्लापुर ग्राम पंचायत के खालेपुरवा निवासी ज्वाला निषाद ने बताया कि गांव पूरी तरह बाढ़ से घिर गया है। यहां तक मेडिकल टीम भी नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में गांव में करीब एक दर्जन लोगों को बुखार है। साखीपुर ग्राम पंचायत के रेता गांव निवासी शोभा ने बताया कि उनका गांव नदी के बीचोबीच बसा है।
एक तरफ टेढ़ी नदी तो दूसरी तरफ सरयू है। दोनों के मध्य गांव होने के नाते पूरा गांव संकट में है। यहां न मिट्टी तेल बंटा है और न किसी प्रकार की सुविधा दी गई है। प्रशासन की ओर से दो नावें दी गई हैं जिससे बच्चों को उस पार होकर स्कूल जाना पड़ता है।
इसी तरह करनैलगंज तहसील क्षेत्र का चंदापुर किटौली के तीन मजरे घाघरा की बाढ़ से घिर गए हैं। इसके अलावा घाघरा के इस पार बाराबंकी की तीन ग्राम पंचायतें परसावल, रायपुर व नैपुर के सभी मजरे पानी से घिरे हैं। नवाबगंज विकास खंड के बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों में प्रशासन की ओर से 26 नावें लगाई गई हैं। जैतपुर माझा में पांच, माझाराठ में छह, दुर्गागंज में छह, दुल्लापुर में चार, साखीपुर में दो तथा तुलसीपुर माझा में पांच नावें लगाई गई हैं। एसडीएम जेपीसिंह ने बताया कि मेडिकल टीम व बाढ़ चौकियों पर राहत कर्मियों को कैंप करने का निर्देश दिया गया है।
नवाबगंज के इन छह ग्राम पंचायतों में 12 में से दो विद्यालयों में पानी घुस जाने के कारण यहां पढ़ाई पूरी तरह ठप हैं। जबकि 10 स्कूलों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। जैतपुर व माझा राठ के दो स्कूलों में पानी भर गया है। तुलसीपुर माझा के सात स्कूलों में बच्चे व शिक्षक दहशत में हैं। यहां शिक्षक तो किसी तरह पहुंच कर स्कूल खोल देते हैं, लेकिन बाढ़ के मुहाने पर होने के नाते यहां भी पढ़ाई ठप है।