{"_id":"579653874f1c1b697d21e363","slug":"36-villages-made-island-floods","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ के चलते 36 गांव बने टॉपू ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ के चलते 36 गांव बने टॉपू
अमर उजाला/बलरामपुर
Updated Mon, 25 Jul 2016 11:29 PM IST
विज्ञापन
कटान करती नदी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राप्ती नदी का उफान तो सोमवार को थम गया है, लेकिन तटवर्ती गांवों में नदी ने कटान तेज कर दी है। नदी की धारा में लोगों की कीमती जमीन लगातार समाहित हो रही है। नदी के करीब बसे गांव के लोग भी अपना आशियाना उजाड़कर पलायन कर रहे हैं।
बाढ़ से राहत व बचाव का प्रशासनिक कार्य महज कागजों तक ही सीमित है। चौका कला के किसानों की करीब 200 बीघा जमीन राप्ती नदी की धारा में समा चुकी है। उतरौला तहसील के करीब 36 गांव राप्ती नदी की बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। इन गांवों के खेत-खलिहान तथा रास्तों पर पानी भरा हुआ है।
सोमवार को सदर तहसील के चौका कला गांव निवासी जोगेंद्र ने बताया कि उनका 40 बीघा खेत न
दी में समाहित हो गया है। इसी तरह सियाराम का 35 बीघा, दुुर्गा प्रसाद का 10 बीघा, जय जयराम, संतराम, शिव प्रसाद, महादेव, रामरंग व रामदेव का 15-15 बीघा, दशरथ, बाबूराम व ननके का 10-10 बीघा, छोटे तथा साधू का 5-5 बीघा व हब्बा का तीन बीघा खेत नदी में विलीन हो चुका है।
विज्ञापन
गांव के कई लोग नदी की कटान को देखते हुए अपना आशियाना उजाड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। उतरौला तहसील के नंदमहरा गांव में सोमवार को लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए नाव भेजी गई है। लखमा, पचौथा, कटरा, अमारेभरिया, टिकुइया, बारम, सकरा पाठक, परसौना, पिपरा, बरायल, तेंदुआ, रसूलपुर चांद, बांकभवानी, टेढ़वा तप्पाबांक, चिचूड़ी, मस्जिदिया, तिलहर व बिरदा बनियाभारी समेत करीब 36 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
इन गांवों के खेतों, खलिहानों तथा रास्तों पर बाढ़ का पानी भर गया है। मटियरिया कर्मा गांव के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि प्रशासन की सारी कार्रवाई महज जुबानी व कागजी घोड़े तक ही सीमित है।
विज्ञापन
बाढ़ से राहत व बचाव का प्रशासनिक कार्य महज कागजों तक ही सीमित है। चौका कला के किसानों की करीब 200 बीघा जमीन राप्ती नदी की धारा में समा चुकी है। उतरौला तहसील के करीब 36 गांव राप्ती नदी की बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। इन गांवों के खेत-खलिहान तथा रास्तों पर पानी भरा हुआ है।
विज्ञापन
सोमवार को सदर तहसील के चौका कला गांव निवासी जोगेंद्र ने बताया कि उनका 40 बीघा खेत न
दी में समाहित हो गया है। इसी तरह सियाराम का 35 बीघा, दुुर्गा प्रसाद का 10 बीघा, जय जयराम, संतराम, शिव प्रसाद, महादेव, रामरंग व रामदेव का 15-15 बीघा, दशरथ, बाबूराम व ननके का 10-10 बीघा, छोटे तथा साधू का 5-5 बीघा व हब्बा का तीन बीघा खेत नदी में विलीन हो चुका है।
विज्ञापन
गांव के कई लोग नदी की कटान को देखते हुए अपना आशियाना उजाड़कर सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। उतरौला तहसील के नंदमहरा गांव में सोमवार को लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए नाव भेजी गई है। लखमा, पचौथा, कटरा, अमारेभरिया, टिकुइया, बारम, सकरा पाठक, परसौना, पिपरा, बरायल, तेंदुआ, रसूलपुर चांद, बांकभवानी, टेढ़वा तप्पाबांक, चिचूड़ी, मस्जिदिया, तिलहर व बिरदा बनियाभारी समेत करीब 36 गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं।
इन गांवों के खेतों, खलिहानों तथा रास्तों पर बाढ़ का पानी भर गया है। मटियरिया कर्मा गांव के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। प्रभावित लोगों का कहना है कि प्रशासन की सारी कार्रवाई महज जुबानी व कागजी घोड़े तक ही सीमित है।