{"_id":"5b6096814f1c1b923e8b468d","slug":"31533056641-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिंगबांध का आधा हिस्सा नदी में समाया, अन्य स्थान पर पड़ी दरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रिंगबांध का आधा हिस्सा नदी में समाया, अन्य स्थान पर पड़ी दरार
Updated Tue, 31 Jul 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रिंगबांध का आधा हिस्सा घाघरा में समाया
गोंडा। एल्गिन चरसड़ी बांध के रिंग बांध के कट जाने की स्थिति अब और तब के बीच अटकी हुई है। तेजी से हो रही कटान से बांध का आधा हिस्सा नदी में समा चुका है।
बाकी हिस्से को बचाने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा करीब सौ की संख्या में ग्रामीण कटान रोकने की जद्दोजहद कर रहे हैं। लगातार नदी में उठ रहे मसीने से बांध के करीब सौ मीटर हिस्से में दरार आ गई। इससे अनुमान है कि जल्द ही दरार वाला बंधे का भाग भी नदी में समा जाएगा।
घाघरा का जलस्तर विगत दो दिनों से कभी नीचे तो कभी ऊपर को धीरे-धीरे सरकने लगा था फिर भी खतरे के निशान से घाघरा अभी भी 26 सेंटीमीटर ऊपर है। सोमवार को घाघरा नदी का जलस्तर 106.226 था तो वहीं मंगलवार को जलस्तर बढ़कर 106.266 पर आ गया।
विज्ञापन
एल्गिन ब्रिज पर मंगलवार की दोपहर दो बजे ली गयी माप के अनुसार अब नदी में पानी का डिस्चार्ज 2 लाख 20 हजार था। घाघरा नदी की खासियत है कि जब इसका जलस्तर घटता या बढ़ता है तो उस वक्त नदी से होने वाली कटान तेज हो जाती है। मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा बंधे पर नजर आया।
जब नदी में उठे मसीने से बांध के दो हिस्सों में करीब सौ मीटर में बड़ी-बड़ी दरार आ गई। नकहरा निवासी अयोध्या यादव के खेत के पास बांध में आई दरार से लगातार नदी का पानी बांध की मिट्टी को निशाना बना रहा है।
जिससे दरार वाला हिस्सा कब नदी में समा जाए, नहीं कहा जा सकता। हालांकि सिंचाई विभाग के लोग बंधे को बचाने की पुरजोर कोशिश में लगे हैं। लेकिन उनकी मेहनत कितना रंग लाती है तो यह तो समय ही बताएगा।
बांध बचाने के लिए महज खरपतवार के साथ बांस-बल्ली से नदी के पानी को रोकने की कोशिशें हो रही हैं। अब दो किलोमीटर लंबे इस अस्थाई रिंगबांध का नदी की तरफ वाला हिस्सा लगातार नदी में समाता जा रहा है।
जिससे अब करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम नकहरा, काशीपुर, घरकुंइयां, प्रतापपुर सहित अन्य कई गांव नदी के निशाने पर आ गए हैं। बांध में तेजी से हो रही कटान के मद्देनजर ग्राम नकहरा के अधिकांश ग्रामीण अपना बोरिया बिस्तर बांध कर पलायन के लिए तैयारी कर चुके हैं।
प्रशासनिक स्तर पर उन्हें किसी सुरक्षित स्थान को अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, जबकि बांध कटने की नौबत पर आ चुका है। इसके साथ ही नकहरा गांव में बांध निर्माण को लेकर एक ग्रामीण द्वारा लगातार उसका विरोध किया जा रहा था।
मौजूदा समय में बांध की मरम्मत कार्य के दौरान भी उस व्यक्ति द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। जिसकी वजह से बांध के मरम्मत कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।
बांध पर मौजूद सहायक अभियंता अमरेश सिंह व अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि एक व्यक्ति द्वारा बांध की मरम्मत तथा उसको कटान से रोकने के लिए लगातार विरोध किया जा रहा है।
बाकी गांव के समस्त ग्रामीण बांध की मरम्मत में लगातार सहयोग कर रहे हैं। बिना ग्रामीणों के सहयोग के बिना बांध को बचा पाना मुश्किल है।
विज्ञापन
गोंडा। एल्गिन चरसड़ी बांध के रिंग बांध के कट जाने की स्थिति अब और तब के बीच अटकी हुई है। तेजी से हो रही कटान से बांध का आधा हिस्सा नदी में समा चुका है।
बाकी हिस्से को बचाने के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा करीब सौ की संख्या में ग्रामीण कटान रोकने की जद्दोजहद कर रहे हैं। लगातार नदी में उठ रहे मसीने से बांध के करीब सौ मीटर हिस्से में दरार आ गई। इससे अनुमान है कि जल्द ही दरार वाला बंधे का भाग भी नदी में समा जाएगा।
विज्ञापन
घाघरा का जलस्तर विगत दो दिनों से कभी नीचे तो कभी ऊपर को धीरे-धीरे सरकने लगा था फिर भी खतरे के निशान से घाघरा अभी भी 26 सेंटीमीटर ऊपर है। सोमवार को घाघरा नदी का जलस्तर 106.226 था तो वहीं मंगलवार को जलस्तर बढ़कर 106.266 पर आ गया।
विज्ञापन
एल्गिन ब्रिज पर मंगलवार की दोपहर दो बजे ली गयी माप के अनुसार अब नदी में पानी का डिस्चार्ज 2 लाख 20 हजार था। घाघरा नदी की खासियत है कि जब इसका जलस्तर घटता या बढ़ता है तो उस वक्त नदी से होने वाली कटान तेज हो जाती है। मंगलवार को कुछ ऐसा ही नजारा बंधे पर नजर आया।
जब नदी में उठे मसीने से बांध के दो हिस्सों में करीब सौ मीटर में बड़ी-बड़ी दरार आ गई। नकहरा निवासी अयोध्या यादव के खेत के पास बांध में आई दरार से लगातार नदी का पानी बांध की मिट्टी को निशाना बना रहा है।
जिससे दरार वाला हिस्सा कब नदी में समा जाए, नहीं कहा जा सकता। हालांकि सिंचाई विभाग के लोग बंधे को बचाने की पुरजोर कोशिश में लगे हैं। लेकिन उनकी मेहनत कितना रंग लाती है तो यह तो समय ही बताएगा।
बांध बचाने के लिए महज खरपतवार के साथ बांस-बल्ली से नदी के पानी को रोकने की कोशिशें हो रही हैं। अब दो किलोमीटर लंबे इस अस्थाई रिंगबांध का नदी की तरफ वाला हिस्सा लगातार नदी में समाता जा रहा है।
जिससे अब करनैलगंज क्षेत्र के ग्राम नकहरा, काशीपुर, घरकुंइयां, प्रतापपुर सहित अन्य कई गांव नदी के निशाने पर आ गए हैं। बांध में तेजी से हो रही कटान के मद्देनजर ग्राम नकहरा के अधिकांश ग्रामीण अपना बोरिया बिस्तर बांध कर पलायन के लिए तैयारी कर चुके हैं।
प्रशासनिक स्तर पर उन्हें किसी सुरक्षित स्थान को अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है, जबकि बांध कटने की नौबत पर आ चुका है। इसके साथ ही नकहरा गांव में बांध निर्माण को लेकर एक ग्रामीण द्वारा लगातार उसका विरोध किया जा रहा था।
मौजूदा समय में बांध की मरम्मत कार्य के दौरान भी उस व्यक्ति द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा है। जिसकी वजह से बांध के मरम्मत कार्य में दिक्कतें आ रही हैं।
बांध पर मौजूद सहायक अभियंता अमरेश सिंह व अवर अभियंता एमके सिंह ने बताया कि एक व्यक्ति द्वारा बांध की मरम्मत तथा उसको कटान से रोकने के लिए लगातार विरोध किया जा रहा है।
बाकी गांव के समस्त ग्रामीण बांध की मरम्मत में लगातार सहयोग कर रहे हैं। बिना ग्रामीणों के सहयोग के बिना बांध को बचा पाना मुश्किल है।