फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   कहीं फिर से तबाही का इंतजार तो नहीं कर रही घाघरा

कहीं फिर से तबाही का इंतजार तो नहीं कर रही घाघरा

Tue, 18 Jul 2017 09:31 PM IST
Updated Tue, 18 Jul 2017 09:31 PM IST
विज्ञापन
कहीं फिर से तबाही का इंतजार तो नहीं कर रही घाघरा

विज्ञापन
कहीं फिर से तबाही की इबारत लिखने को बेताब तो नहीं घाघरा
पिछले 32 घंटे से एक ही जगह पर रुकी घाघरा बढ़ रही बेचैनी
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। पिछले 32 घंटों से घाघरा नदी एक ही जगह पर रुकी है। न तो उसका जलस्तर बढ़ रहा है न ही घट रहा है। अलबत्ता नदी में डिस्चार्ज होने वाला पानी जरूर घट-बढ़ रहा है। इसे लेकर बाढ़ क्षेत्र करनैलगंज में रह रहे लोगों की बेचैनी काफी बढ़ी है। क्योंकि माना जा रहा है कि अगर नेपाल से पानी छोड़ा जाता है तो नदी का जलस्तर फिर से बढ़ जाएगा। जिससे नदी खतरे के निशान के आंकड़े को कितना पार करते हुए कहां तक पहुंच जाएगी। कह पाना मुश्किल है। क्योंकि मौजूदा समय नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज 10 सेमी नीचे 105.906 मीटर है। ऐसे मे किसी बैराज से पानी छोड़े जाने पर जलस्तर में 40 से 50 सेमी की बढ़ोत्तरी होना लाजिमी है।
जुलाई की शुरूआत के साथ ही घाघरा नदी ने जिले में तांडव मचा रखा है। तहसील करनैलगंज के एक दर्जन गांवों के 80 से ऊपर मजरे अभी भी बाढ़ के पानी की गिरफ्त में है। हालांकि नदी का जलस्तर कम होने से कई गांवों का पानी नीचे जरूर उतरा है। लेकिन जो गांव नदी के किनारे बसे हैं, वह अभी भी बाढ़ के पानी में घुटनों से लेकर कमर तक डूबे हुए हैं। इस बार अभी तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.07 से अधिकतम 22 सेमी ऊपर 106.29 तक ही पहुंचा है। जबकि पहाड़ों पर होने वाली बरसात लगातार जारी है। वहीं एक खास बात यह भी है कि अभी तक जितनी बार जिले में घाघरा नदी से बाढ़ आई है, उसकी शुरूआत ज्यादातर अगस्त महीने में ही हुई है। जबकि महीना अभी जुलाई का ही चल रहा है। जानकारों की मानें तो नदी का जलस्तर पहले से ही खतरे के निशान के काफी नजदीक है। ऐसे में अब अगर कहीं घाघरा नदी में पानी छोड़ा जाता है तो वह सीधे-सीधे कटे हुए बांध से करनैलगंज के गांवों में ही भरेगा। जिसके लिए नदी को नए सिरे से रास्ता बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि नदी का पानी पहले से ही गांवों में घुसने का रास्ता बना चुका है। हालांकि नदी के कम हुए जलस्तर के बाद नदी की जिस धार से करनैलगंज इलाके में पानी भरने के आसार बाढ़ नियंत्रण खंड को नजर आ रहे हैं वहां पानी को रोक कर रखने की पहल विभाग ने तेज कर दी है। लेकिन इसका कितना लाभ लोगों को मिलता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
विज्ञापन

इनसेट
बाढ़ क्षेत्र में बीमारों का आंकड़ा पहुंचा 4 हजार के पार
बाढ़ क्षेत्र करनैलगंज मे भले ही घाघरा नदी न बढ़ रही हो, लेकिन पानी रुकने और तमाम गांवों के पानी में जलमग्न होने से यहां रहने वाले लोग अलग-अलग तरह की बीमारी से जरूर बीमार पडने लगे हैं। करनैलगंज में बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाई गई 5 बाढ़ चौकियों, जहां से बाढ़ पीड़ितों का इलाज किया जा रहा है, वहां इलाज कराने के लिए आने वाले मरीजों की संख्या का आंकड़ा 4 हजार के पार पहुंच चुका है। पाल्हापुर बाढ़ केंद्र पर तैनात डाक्टर फखरे आलम की मानें तो बाढ़ क्षेत्र में ज्यादातर लोग बाढ़ का पानी भरे होने से इससे होने वाली एलर्जी से पीड़ित हैं। जिसके कारण उनके पैर और उसके ऊपर के हिस्से में सड़ांध होने लगी है। फोड़ा, फुंसी के साथ ही दाद, खाज, खुजली जैसी बीमारियों से यहां के सैकड़ों लोग परेशान हैं। जिनका बाढ़ राहत केंद्र पर बनाए गए स्वास्थ्य शिविर पर उपचार किया जा रहा है। रोजाना करीब 80 से 85 मरीज इलाज के लिए कैंप पर आते हैं। वहीं भटपुरवा, शाहपुर, गौरसिंहपुर में बनाए गए स्वास्थ्य कैंपों पर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। सभी केन्द्रों पर अबतक मिलाकर करीब 4 हजार बाढ पीड़ितों का उपचार किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed