{"_id":"605a1c258ebc3ecad7079d48","slug":"300-surma-out-of-the-ground-even-before-the-fight-gonda-news-lko5710469139","type":"story","status":"publish","title_hn":"आरक्षण से पहले ही चित्त हुए 300 पंचायतों के सूरमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आरक्षण से पहले ही चित्त हुए 300 पंचायतों के सूरमा
विज्ञापन
गोंडा। पंचायत चुनाव में आरक्षण का ऐसा दांव चला कि 300 सूरमा चित हो गए हैं। 1214 पंचायतों के लिए दोबारा आई आरक्षण सूची से 300 के करीब पंचायतें प्रभावित हो गई हैं। इससे यहां ताल ठोंकने वालों के सामने संकट खड़ा हो गया है। चुनाव से पहले ही मैदान बाहर हो चुके सियासतदान अब आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। अब तक 800 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
नए सिरे से आरक्षण जारी होने के बाद गंवई सियासत एक बार फिर से गर्म हो गई है। जो आरक्षण जारी किया गया है वह लोगों को रास नहीं आ रहा है। चुनाव की तैयारी कर चुके लोगों का गणित बिगड़ा तो आपत्ति दर्ज कराने के लिए दौड़ पड़े।
सबके अपने-अपने तर्क हैं। लोगों का दावा है कि उनकी ग्राम पंचायत का आरक्षण सही नहीं हुआ है। आपत्तियों की जांच करके सही आरक्षण जारी करने की मांग की है। मंगलवार तक 800 आपत्तियां पहुंच गईं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर पहले जारी किया गया आरक्षण रद होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नए सिरे से आरक्षण जारी किया गया।
विज्ञापन
इस बार वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए आरक्षण तैयार किया गया। नए सिरे से जो आरक्षण जारी हुआ है वह अब लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। चुनाव की तैयारियां कर चुके लोगों की सीट बदल जाने से उनको जोर का झटका लगा है।
इसका अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि सोमवार व मंगलवार की सुबह दस बजे से ही विकास भवन स्थित डीपीआरओ कार्यालय में आपत्तियां दर्ज कराने के लिए लोग पहुंचे रहे।
दो दिनों में 800 से अधिक आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। विभागीय अधिकारी भी इतनी भारी संख्या में आ रही आपत्तियों को देखकर दंग हैं। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि आपत्तियां दाखिल करने वाले लोगों के अपने-अपने तर्क हैं। फिलहाल आपत्तियों को दर्ज करने के बाद इनका निस्तारण किया जाएगा।
1214 पंचायतों में 519 को हैं। जिसमें सामान्य महिलाओं के लिए 226 सीटें तय हैं। 71 पंचायतों को अनूसूचित वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किया है। साथ ही 127 पंचायतें अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
112 पंचायतों को अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। साथ ही 209 पंचायतों को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। सामान्य महिलाओं के लिए 226 पंचायतों को आरक्षित है। सामान्य वर्ग के लिए तय किए जाने वाले 469 पंचायतों पर भी है। आरक्षण तय होने पर पहली बार जारी सूची में बड़े स्तर पर बदलाव हो गए हैं।
आरक्षण पर आपत्तियां दर्ज कराने का मंगलवार को अन्तिम दिन है। मंगलवार की शाम पांच बजे तक आपत्तियां दर्ज की जाएंगी। इसके बाद आपत्तियों को एक जगह एकत्र कर इनका निस्तारण किया जाएगा। 24 व 25 मार्च को आपत्तियों का निस्तारण होना है। इसके बाद फाइनल आरक्षण जारी होगा। आरक्षण पर आए आपत्तियों की जांच के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित है।
आरक्षण जारी होने के बाद वैसे तो सबसे ज्यादा आपत्तियां ग्राम प्रधान की सीटों पर आ रही हैं। प्रधान बनने के लिए चुनाव की तैयारी कर चुके संभावित उम्मीदवारों का जब आरक्षण बदला तो अब वह आपत्तियां दाखिल कर रहे हैं। कई आपत्ति कर्ताओं ने बताया है कि उनकी सीट वर्ष 2000 से अब तक किन-किन वर्ग के लिए रही है।
उनके हिसाब से सीट क्या होनी चाहिए यह भी बता रहे हैं। आपत्तियां ब्लॉक, जिला पंचायत कार्यालय में भी पहुंच रही हैं। हालांकि जिला पंचायत राज अधिकारी सभाजीत पांडेय का कहना है कि सभी आपत्तियों की जांच करने के बाद इनका निस्तारण किया जाएगा। आरक्षण पूरी तरह पारदर्शिता के साथ किया गया है।
विज्ञापन
नए सिरे से आरक्षण जारी होने के बाद गंवई सियासत एक बार फिर से गर्म हो गई है। जो आरक्षण जारी किया गया है वह लोगों को रास नहीं आ रहा है। चुनाव की तैयारी कर चुके लोगों का गणित बिगड़ा तो आपत्ति दर्ज कराने के लिए दौड़ पड़े।
विज्ञापन
सबके अपने-अपने तर्क हैं। लोगों का दावा है कि उनकी ग्राम पंचायत का आरक्षण सही नहीं हुआ है। आपत्तियों की जांच करके सही आरक्षण जारी करने की मांग की है। मंगलवार तक 800 आपत्तियां पहुंच गईं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर पहले जारी किया गया आरक्षण रद होने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नए सिरे से आरक्षण जारी किया गया।
विज्ञापन
इस बार वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए आरक्षण तैयार किया गया। नए सिरे से जो आरक्षण जारी हुआ है वह अब लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। चुनाव की तैयारियां कर चुके लोगों की सीट बदल जाने से उनको जोर का झटका लगा है।
इसका अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि सोमवार व मंगलवार की सुबह दस बजे से ही विकास भवन स्थित डीपीआरओ कार्यालय में आपत्तियां दर्ज कराने के लिए लोग पहुंचे रहे।
दो दिनों में 800 से अधिक आपत्तियां दर्ज हो चुकी हैं। विभागीय अधिकारी भी इतनी भारी संख्या में आ रही आपत्तियों को देखकर दंग हैं। विभागीय अधिकारी बताते हैं कि आपत्तियां दाखिल करने वाले लोगों के अपने-अपने तर्क हैं। फिलहाल आपत्तियों को दर्ज करने के बाद इनका निस्तारण किया जाएगा।
1214 पंचायतों में 519 को हैं। जिसमें सामान्य महिलाओं के लिए 226 सीटें तय हैं। 71 पंचायतों को अनूसूचित वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किया है। साथ ही 127 पंचायतें अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हैं।
112 पंचायतों को अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। साथ ही 209 पंचायतों को पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं। सामान्य महिलाओं के लिए 226 पंचायतों को आरक्षित है। सामान्य वर्ग के लिए तय किए जाने वाले 469 पंचायतों पर भी है। आरक्षण तय होने पर पहली बार जारी सूची में बड़े स्तर पर बदलाव हो गए हैं।
आरक्षण पर आपत्तियां दर्ज कराने का मंगलवार को अन्तिम दिन है। मंगलवार की शाम पांच बजे तक आपत्तियां दर्ज की जाएंगी। इसके बाद आपत्तियों को एक जगह एकत्र कर इनका निस्तारण किया जाएगा। 24 व 25 मार्च को आपत्तियों का निस्तारण होना है। इसके बाद फाइनल आरक्षण जारी होगा। आरक्षण पर आए आपत्तियों की जांच के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित है।
आरक्षण जारी होने के बाद वैसे तो सबसे ज्यादा आपत्तियां ग्राम प्रधान की सीटों पर आ रही हैं। प्रधान बनने के लिए चुनाव की तैयारी कर चुके संभावित उम्मीदवारों का जब आरक्षण बदला तो अब वह आपत्तियां दाखिल कर रहे हैं। कई आपत्ति कर्ताओं ने बताया है कि उनकी सीट वर्ष 2000 से अब तक किन-किन वर्ग के लिए रही है।
उनके हिसाब से सीट क्या होनी चाहिए यह भी बता रहे हैं। आपत्तियां ब्लॉक, जिला पंचायत कार्यालय में भी पहुंच रही हैं। हालांकि जिला पंचायत राज अधिकारी सभाजीत पांडेय का कहना है कि सभी आपत्तियों की जांच करने के बाद इनका निस्तारण किया जाएगा। आरक्षण पूरी तरह पारदर्शिता के साथ किया गया है।