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Gonda News: 232 करोड़ का सीवर लाइन का प्रस्ताव फाइलों में उलझा
Mon, 29 May 2023 11:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Mon, 29 May 2023 11:21 PM IST
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गोंडा के जानकीनगर मोहल्ले में जलभराव में खड़ीं कारों की फाइल फोटो। -संवाद
गोंडा। साल 2012 के बाद तीसरी बार शहर की सरकार ने विकास की शपथ ली। मगर शहर का सबसे बड़ा मुद्दा ज्यों का त्यों बना हुआ है। 27 वार्डों की करीब पांच लाख आबादी जलभराव की समस्या से जूझ रही है। बरसात के समय शहर तालाब में तब्दील हो जाता है। इसके बावजूद तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब की ओर से तैयार किया गया 232 करोड़ से सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव फाइलों में ही उलझा है।
शहर में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 38 नाले थे। इनमें से 22 से अधिक का अस्तित्व समाप्त हो गया। इसके चलते मामूली बरसात में भी मोहल्ले जलमग्न हो जाते हैं। पिछले साल अक्तूबर में लगातार चार दिन तक मूसलाधार बारिश होने से शहर तालाब बन गया था। पानी में तैरती कारों का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। जबकि शहर में जलनिकासी की व्यवस्था के लिए 11 साल पहले ही प्रस्ताव तैयार कर भेजा जा चुका है।
वर्ष 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने शहर में शहर में सीवर लाइन के लिए प्रस्ताव तैयार कराया था। 232 करोड़ रुपये लागत के इस प्रस्ताव में 25 मिलियन लीटर प्रतिदिन की क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट, 232.697 किलोमीटर की सीवर लाइन, एक अदद इंटरमीडिएट पंप स्टेशन, 325 मीटर की रायजिग मेंस, तीन स्टाफ क्वार्टर, 270.50 मीटर की बाउंड्रीवाल व 60 मीटर की एप्रोच रोड शामिल है। इस प्रस्ताव पर बाद में काम करके उसे बढ़ाया गया मगर जमीन नहीं उपलब्ध हो पाने के कारण इसे स्वीकृति ही नहीं मिल सकी। इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने भी इसे लेकर कोई प्रयास नहीं किए। ऐसे में शहर में जलभराव की समस्या जस की तस है।
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बरसात के दौरान शहर के आम लोगों को ही नहीं बल्कि सांसद व विधायकों को भी दिक्कत होती है। टाॅमसन स्कूल के सामने गोनार्द लॉन कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह और सदर विधायक प्रतीक भूूषण सिंह का आवास व कार्यालय है। बारिश में यहां भी जलभराव हो जाता है। मेहनौन विधायक विनय द्विवेदी के सिंचाई विभाग के सामने स्थित आवास के सामने भी पानी भर जाता है। दीवानी कचहरी के सामने गोंडा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के कार्यालय जयमहल के दोनों प्रवेश गेट पर भी पानी भर जाता है। गौरा विधायक प्रभात कुमार वर्मा के सिविल लाइंस स्थित आवास के पास भी जलभराव होता है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष उज्मा राशिद का देहात कोतवाली के पास स्थित आवास भी जलभराव की परेशानी से अछूता नहीं है। इसके बावजूद सीवर लाइन को लेकर किसी जनप्रतिनिधि की दिलचस्पी नहीं दिखाई पड़ रही है।
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शहर में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 38 नाले थे। इनमें से 22 से अधिक का अस्तित्व समाप्त हो गया। इसके चलते मामूली बरसात में भी मोहल्ले जलमग्न हो जाते हैं। पिछले साल अक्तूबर में लगातार चार दिन तक मूसलाधार बारिश होने से शहर तालाब बन गया था। पानी में तैरती कारों का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। जबकि शहर में जलनिकासी की व्यवस्था के लिए 11 साल पहले ही प्रस्ताव तैयार कर भेजा जा चुका है।
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वर्ष 2012 में तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब ने शहर में शहर में सीवर लाइन के लिए प्रस्ताव तैयार कराया था। 232 करोड़ रुपये लागत के इस प्रस्ताव में 25 मिलियन लीटर प्रतिदिन की क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट, 232.697 किलोमीटर की सीवर लाइन, एक अदद इंटरमीडिएट पंप स्टेशन, 325 मीटर की रायजिग मेंस, तीन स्टाफ क्वार्टर, 270.50 मीटर की बाउंड्रीवाल व 60 मीटर की एप्रोच रोड शामिल है। इस प्रस्ताव पर बाद में काम करके उसे बढ़ाया गया मगर जमीन नहीं उपलब्ध हो पाने के कारण इसे स्वीकृति ही नहीं मिल सकी। इसके बाद जनप्रतिनिधियों ने भी इसे लेकर कोई प्रयास नहीं किए। ऐसे में शहर में जलभराव की समस्या जस की तस है।
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बरसात के दौरान शहर के आम लोगों को ही नहीं बल्कि सांसद व विधायकों को भी दिक्कत होती है। टाॅमसन स्कूल के सामने गोनार्द लॉन कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह और सदर विधायक प्रतीक भूूषण सिंह का आवास व कार्यालय है। बारिश में यहां भी जलभराव हो जाता है। मेहनौन विधायक विनय द्विवेदी के सिंचाई विभाग के सामने स्थित आवास के सामने भी पानी भर जाता है। दीवानी कचहरी के सामने गोंडा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के कार्यालय जयमहल के दोनों प्रवेश गेट पर भी पानी भर जाता है। गौरा विधायक प्रभात कुमार वर्मा के सिविल लाइंस स्थित आवास के पास भी जलभराव होता है। वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष उज्मा राशिद का देहात कोतवाली के पास स्थित आवास भी जलभराव की परेशानी से अछूता नहीं है। इसके बावजूद सीवर लाइन को लेकर किसी जनप्रतिनिधि की दिलचस्पी नहीं दिखाई पड़ रही है।