{"_id":"4bc8a4a293256194d39e2f069addc7af","slug":"20-thousand-students-are-wandering-for-admission-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दाखिले के लिए भटक रहे 20 हजार स्टूडेंट्स","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दाखिले के लिए भटक रहे 20 हजार स्टूडेंट्स
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2015 10:46 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिन महाविद्यालयों में स्नातक की कक्षाओं में प्रवेश के लिए अंतिम क्षणों तक दरवाजे खुले रहते थे, आज वहां हाउस फुल का बोर्ड लग गया है। स्नातक कक्षाओं में प्रवेश में मेरिट का खेल सिर चढ़कर काम कर गया। कुलपति विश्वविद्यालय के नियमों का कड़ाई से पालन कराने में पास भी हो गए, लेकिन इंटरमीडिएट के हजारों मेधावी स्नातक कक्षाओं में प्रवेश लेने से फेल हो गए। यही कारण है कि 20 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं प्रवेश के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
जिले में यूपी बोर्ड व सीबीएसई इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या 40 हजार है। जिले में व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों समेत 52 महाविद्यालय संचालित हैं। इंटर पास छात्र-छात्राओं को स्नातक की कक्षाओं में अभी तक प्रवेश लेने के लिए कोई दिक्कत नहीं होती थी, लेकिन इस बार विश्वविद्यालय के नियमों से महाविद्यालयों में प्रवेश को लेकर हाउस फुल के बोर्ड लग गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सांइस व कॉमर्स की कक्षाओं में प्रवेश को लेकर आ रही है।
पूर्व में महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में प्रवेश की सीटें वहां के प्राध्यापकों की संख्या के आधार पर फिक्स होती रहीं। ऐसे प्राध्यापकों की संख्या बढ़ती रहती और प्रवेश की सीटों में इजाफा हो जाता। लेकिन, इस बार डॉ. राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के कुलपति जीसीआर जायसवाल ने विवि के मानकों का कड़ाई से पालन कराने की ठान ली और जिले के महाविद्यालयों में सीटें ही सीमित हो गईं।
विज्ञापन
अब प्रति विषय पर 80 छात्र-छात्राओं के हिसाब से प्रवेश हो सकेगा। जैसे साइंस साइड में यहां पांच विषय ही मूल रूप से संचालित हैं। ऐसे में विज्ञान वर्ग की कक्षाओं में यहां 400 विद्यार्थियों को ही प्रवेश मिल पाएगा। इसी तरह जिस महाविद्यालय में कला वर्ग में जितने विषय होंगे, उसी के अनुपात में वहां प्रवेश लिया जा सकेगा।
जिला मुख्यालय पर राजकीय/अनुदानित महाविद्यालयों में केवल लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय शामिल है। पिछले वर्ष तक इस महाविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष की कक्षाओं में करीब 2080 विद्यार्थियों का प्रवेश हो रहा था और विज्ञान वर्ग में 640 व कॉमर्स में 300 छात्र-छात्राओं का प्रवेश हो जाता था।
इस बार ये सीटें बहुत कम हो गईं हैं। बीए प्रथम वर्ष में 888 व विज्ञान वर्ग में 400 बच्चों का ही प्रवेश हो पाया है। यहां प्रवेश लेने के लिए आवेदन करने वाले करीब तीन हजार बच्चों को मायूस होना पड़ा।
वर्ष 2014-15 की स्नातक की परीक्षाओं के दौरान कुलपति ने निर्धारित सीट से अधिक प्रवेश लेने वाले महाविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब चार हजार बच्चों की परीक्षा पर रोक लगा दी थी। बाद में न्यायालय के आदेश पर सभी को परीक्षा देने का मौका मिला है।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के मुख्य नियंता डॉ. ओंकार पाठक ने बताया कि प्राचार्य डॉ. डीपी सिंह स्नातक कक्षाओं में सीटें बढ़वाने की मांग को लेकर कुलपति से मिलने गए हैं। सीटें निर्धारित होने से हजारों बच्चों को यहां प्रवेश नहीं दिया जा सका।
प्रति विषय पर 80 बच्चों की सीटें महाविद्यालयों को निर्धारित कर दी गईं है। निर्धारित सीट से अधिक प्रवेश लेने वाले बच्चों का प्रवेश मान्य नहीं होगा। - डॉॅ. एसएन शुक्ल, जनसंपर्क अधिकारी, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय
विज्ञापन
जिले में यूपी बोर्ड व सीबीएसई इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या 40 हजार है। जिले में व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों समेत 52 महाविद्यालय संचालित हैं। इंटर पास छात्र-छात्राओं को स्नातक की कक्षाओं में अभी तक प्रवेश लेने के लिए कोई दिक्कत नहीं होती थी, लेकिन इस बार विश्वविद्यालय के नियमों से महाविद्यालयों में प्रवेश को लेकर हाउस फुल के बोर्ड लग गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी सांइस व कॉमर्स की कक्षाओं में प्रवेश को लेकर आ रही है।
विज्ञापन
पूर्व में महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में प्रवेश की सीटें वहां के प्राध्यापकों की संख्या के आधार पर फिक्स होती रहीं। ऐसे प्राध्यापकों की संख्या बढ़ती रहती और प्रवेश की सीटों में इजाफा हो जाता। लेकिन, इस बार डॉ. राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय के कुलपति जीसीआर जायसवाल ने विवि के मानकों का कड़ाई से पालन कराने की ठान ली और जिले के महाविद्यालयों में सीटें ही सीमित हो गईं।
विज्ञापन
अब प्रति विषय पर 80 छात्र-छात्राओं के हिसाब से प्रवेश हो सकेगा। जैसे साइंस साइड में यहां पांच विषय ही मूल रूप से संचालित हैं। ऐसे में विज्ञान वर्ग की कक्षाओं में यहां 400 विद्यार्थियों को ही प्रवेश मिल पाएगा। इसी तरह जिस महाविद्यालय में कला वर्ग में जितने विषय होंगे, उसी के अनुपात में वहां प्रवेश लिया जा सकेगा।
जिला मुख्यालय पर राजकीय/अनुदानित महाविद्यालयों में केवल लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय शामिल है। पिछले वर्ष तक इस महाविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष की कक्षाओं में करीब 2080 विद्यार्थियों का प्रवेश हो रहा था और विज्ञान वर्ग में 640 व कॉमर्स में 300 छात्र-छात्राओं का प्रवेश हो जाता था।
इस बार ये सीटें बहुत कम हो गईं हैं। बीए प्रथम वर्ष में 888 व विज्ञान वर्ग में 400 बच्चों का ही प्रवेश हो पाया है। यहां प्रवेश लेने के लिए आवेदन करने वाले करीब तीन हजार बच्चों को मायूस होना पड़ा।
वर्ष 2014-15 की स्नातक की परीक्षाओं के दौरान कुलपति ने निर्धारित सीट से अधिक प्रवेश लेने वाले महाविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब चार हजार बच्चों की परीक्षा पर रोक लगा दी थी। बाद में न्यायालय के आदेश पर सभी को परीक्षा देने का मौका मिला है।
लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के मुख्य नियंता डॉ. ओंकार पाठक ने बताया कि प्राचार्य डॉ. डीपी सिंह स्नातक कक्षाओं में सीटें बढ़वाने की मांग को लेकर कुलपति से मिलने गए हैं। सीटें निर्धारित होने से हजारों बच्चों को यहां प्रवेश नहीं दिया जा सका।
प्रति विषय पर 80 बच्चों की सीटें महाविद्यालयों को निर्धारित कर दी गईं है। निर्धारित सीट से अधिक प्रवेश लेने वाले बच्चों का प्रवेश मान्य नहीं होगा। - डॉॅ. एसएन शुक्ल, जनसंपर्क अधिकारी, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय