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घाघरा में ढाई लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बढ़ा, उफान की आशंका
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24-गोंडा में उमरीबेगमगंज के केवटाही मजरे में घुसा पानी
- फोटो : GONDA
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करनैलगंज(गोंडा)। घाघरा का जलस्तर बुधवार को घटकर खतरे के निशान से आठ सेंटीमीटर नीचे हो गया। मगर पहाड़ी नालों का पानी बैराज से छोड़े जाने के बाद गुरुवार को घाघरा का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने का अनुमान है। लगातार बरसात व बैराजों से छोड़े गए ढाई लाख क्यूसेक पानी के चलते गोंडा व बाराबंकी के सरहदी इलाकों में बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है।
सोमवार की सुबह से घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा तो रात तक खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। मंगलवार की शाम पानी बढ़ोत्तरी में ब्रेक लगा और बुधवार की सुबह तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 7 सेमी नीचे जा चुका था। बुधवार की दोपहर 12 बजे एल्गिन ब्रिज से आयी सूचना ने सबको एक बार फिर से चौंका दिया। नदी का जलस्तर तो खतरे के निशान से नीचे था पर शारदा व गिरिजा बैराजों सहित सरयू बैराज का कुल डिस्चार्ज 2 लाख 66 हजार 914 तक पहुंच चुका था। यह पानी बुधवार की रात से आना शुरू हो जायेगा जिससे गुरुवार तक घाघरा में एक बार फिर उफान आने की संभावना प्रबल हो चली है। फिलहाल घाघरा में जल स्तर घटने-बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार की दोपहर एल्गिन ब्रिज घाघरा घाट पर केंद्रीय जल आयोग द्वारा ली गयी माप के अनुसार नदी का जलस्तर 105 दशमलव 996 रहा। जो कि निर्धारित खतरे के निशान से करीब 8 सेमी नीचे दर्ज किया गया।
वहीं नदी में कुल डिस्चार्ज 2 लाख 66 हजार 914 क्यूसेक दर्ज किया गया। लगातार घटते-बढ़ते घाघरा के जलस्तर से गोंडा व बाराबंकी के तटवर्ती इलाकों में पानी के फैलाव में कमी नहीं आ रही। चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। बाराबंकी के राजस्व ग्राम नैपुरा, परसावल सहित मांझा रायपुर, कमियार के कई मजरों में बाढ़ का पानी भर चुका है। तो वहीं नकहरा गांव के कई मजरों पर बाढ़ के बादल मंडरा रहे हैं। कुछ लोगों का छप्पर युक्त घर गिर चुका है। कुछ लोगों का गिरने के कगार पर है। ईंधन न होने से भोजन बनाने की समस्या है। नकहरा गांव के बसंतलाल पुरवा, राधेपुरवा, दुलारेपुरवा सहित अन्य कई मजरों के संपर्क मार्ग पर पानी आ चुका है।
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स्थानीय लेखपाल तेजबहादुर सिंह राव व राजस्व निरीक्षक रामपल्टन ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नकहरा में दो नावें लगाई गई हैं तथा जहां नावों की आवश्यकता है वहां नाव लगाने की संस्तुति की जा चुकी है। एक्सईएन वीएन शुक्ला, एई अमरेश कुमार सिंह, जेई एमके सिंह लगातार बांध पर निगरानी में लगे है। उन्होंने बताया कि बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। एसडीएम ज्ञानचंद गुप्ता बताते हैं कि बाढ़ की संभावना को देखते हुए सभी तैयारियों को पूरा किया जा चुका है। बांध की निगरानी कराई जा रही है। लगातार निरीक्षण भी किया जा रहा है।
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सोमवार की सुबह से घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा तो रात तक खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। मंगलवार की शाम पानी बढ़ोत्तरी में ब्रेक लगा और बुधवार की सुबह तक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 7 सेमी नीचे जा चुका था। बुधवार की दोपहर 12 बजे एल्गिन ब्रिज से आयी सूचना ने सबको एक बार फिर से चौंका दिया। नदी का जलस्तर तो खतरे के निशान से नीचे था पर शारदा व गिरिजा बैराजों सहित सरयू बैराज का कुल डिस्चार्ज 2 लाख 66 हजार 914 तक पहुंच चुका था। यह पानी बुधवार की रात से आना शुरू हो जायेगा जिससे गुरुवार तक घाघरा में एक बार फिर उफान आने की संभावना प्रबल हो चली है। फिलहाल घाघरा में जल स्तर घटने-बढ़ने का सिलसिला लगातार जारी है। बुधवार की दोपहर एल्गिन ब्रिज घाघरा घाट पर केंद्रीय जल आयोग द्वारा ली गयी माप के अनुसार नदी का जलस्तर 105 दशमलव 996 रहा। जो कि निर्धारित खतरे के निशान से करीब 8 सेमी नीचे दर्ज किया गया।
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वहीं नदी में कुल डिस्चार्ज 2 लाख 66 हजार 914 क्यूसेक दर्ज किया गया। लगातार घटते-बढ़ते घाघरा के जलस्तर से गोंडा व बाराबंकी के तटवर्ती इलाकों में पानी के फैलाव में कमी नहीं आ रही। चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। बाराबंकी के राजस्व ग्राम नैपुरा, परसावल सहित मांझा रायपुर, कमियार के कई मजरों में बाढ़ का पानी भर चुका है। तो वहीं नकहरा गांव के कई मजरों पर बाढ़ के बादल मंडरा रहे हैं। कुछ लोगों का छप्पर युक्त घर गिर चुका है। कुछ लोगों का गिरने के कगार पर है। ईंधन न होने से भोजन बनाने की समस्या है। नकहरा गांव के बसंतलाल पुरवा, राधेपुरवा, दुलारेपुरवा सहित अन्य कई मजरों के संपर्क मार्ग पर पानी आ चुका है।
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स्थानीय लेखपाल तेजबहादुर सिंह राव व राजस्व निरीक्षक रामपल्टन ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। नकहरा में दो नावें लगाई गई हैं तथा जहां नावों की आवश्यकता है वहां नाव लगाने की संस्तुति की जा चुकी है। एक्सईएन वीएन शुक्ला, एई अमरेश कुमार सिंह, जेई एमके सिंह लगातार बांध पर निगरानी में लगे है। उन्होंने बताया कि बांध को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। एसडीएम ज्ञानचंद गुप्ता बताते हैं कि बाढ़ की संभावना को देखते हुए सभी तैयारियों को पूरा किया जा चुका है। बांध की निगरानी कराई जा रही है। लगातार निरीक्षण भी किया जा रहा है।