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हाकिम, हम पीड़ितों को ऐसे न तरसाइए,बस एक बार चले आइ77ए
Updated Sun, 13 Aug 2017 10:47 PM IST
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हम गरीबों को ऐसे न तरसाइए, बस एक बार चले आइए
दूसरी बार सीएम योगी का निरीक्षण टलने से बाढ़ पीड़ितों में निराशा
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज गोंडा। हाकिम, हम गरीबों को वैसे भी बहुत दर्द मिल चुका है। घाघरा नदी की त्रासदी झेलकर बाढ़ पीड़ित वैसे भी तबाह हो चुके हैं। अफसर पीड़ितों को राहत पहुंचाने के नाम पर आंकड़ों की बाजीगरी करने में जुटे हुए हैं। जब जब आपके आने की आहट मिलती है मुख्यालय से दौड़कर सीधे बाढ़ क्षेत्र में आ धमकते हैं और जरूरत मंदों की सहायता करने के बजाय यह पता लगाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में अब एक आपसे ही आखिरी उम्मीद बची है। अब हम पीड़ितों के धैर्य की और परीक्षा न लीजिए बस एक बार चले आइए और अफसरों की बाजीगरी को अपनी आंखों से देेख लीजिए। यह दर्द करनैलगंज के उन बाढ़ पीड़ितों के है जो पिछले दो बार से मुख्यमंत्री के आने की सूचना पर खुश होते है लेकिन जैसे ही कार्यक्रम टलता है वैसे ही उनकी खुशी निराशा में बदल जाती है।
करनैलगंज क्षेत्र में घाघरा नदी का पानी व्यापक तबाही मचा चुका है। अब तक 64 ग्राम पंचायतों के 468 मजरे बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। दिन ब दिन बाढ़ की विनाशलीला बढ़ती जा रही है लेकिन अफसर इन सबसे बेफिक्र होकर सबकुछ नियंत्रण में होने का दावा कर रहे हैं। दिन के उजाले में किसी तरह से समय काटने के बाद अंधेरे में रात बिताना बाढ़ पीड़ितों के लिए दुष्कर साबित हो रहा है। माताएं अपने बच्चों के साथ बंधे पर एक तिरपाल के नीचे बैठकर रात के बीतने का दुआ करती हैं। बच्चों के सो जाने पर उन्हे विषैले जीव जंतुओंसे बचाने के लिए रात रात भर जाग रही हैं लेकिन इन्हें राहत के नाम पर रोजमर्रा की जरुरत की सामान भी मुहैया नही हो पा रहा है। चार दिन पहले प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी के निरीक्षण में राहत सामग्री के वितरण की हकीकत सामने आ चुकी है। राहत वितरण की जिम्मेदारी संभालने वाला लेखपाल मंत्री को बाढ़ प्रभावित गांव का रास्ता तक नहीं बता सका। बाढ़ पीड़ित अगर राहत सामग्री के लिए अफसरों तक पहुंच भी जाए तो रास्ता न जानने वाले नायब तहसीलदार जैसे अफसर से उसे राशन की जगह थप्पड़ खाना पड़ता है। इसके बावजूद अफसरों की संवेदना नहीं जाग रही है। ऐसे में अब बाढ़ पीड़ितों की एकमात्र उम्मीद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ही बची है। मुख्यमंत्री के न आने से निराश बाढ़ पीड़ित रामसखे यादव, कुमकुम देवी, दीनानाथ, रामेश्वर, शिवशंकर समेत अन्य का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री आ जाते तो अफसरों की इस बाजीगरी को अपनी आंखों से देख लेते।
इनसेट
अफसरों ने ली राहत की सांस
रविवार को दूसरी बार जैसे ही मुख्यमंत्री के निरीक्षण का कार्यक्रम टला वैसे ही अफसरों के मुरझाए चेहरे खिल उठे। सुबह नौ बजे तक जिले के सभी आला अधिकारियों के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं, अधिकारी पसीने से सराबोर थे। अचानक एक फोन काल आने के बाद उनके चेहरों पर खुशी की ऐसी हंसी निकली कि कोई भांप भी नहीं पाया और अधिकारियों का पलायन हेलीपैड से बाढ़ राहत केंद्र की ओर हो गया।
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इनसेट
सीएम नहीं तो प्रभारी मंत्री ने किया निरीक्षण
करनैलगंज। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थगित होने के बाद जिले के प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी बाढ़ क्षेत्र में पहुंचे और बहुवन मदार मांझा सहित अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों का मोटरबोट से निरीक्षण किया। उनके साथ डीएम जेबी सिंह, एसपी उमेश कुमार सिंह, एसडीएम अर्चना वर्मा सहित तमाम अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे। प्रभारी मंत्री ने बाढ़ पीड़ितों से मिलकर उनकी समस्याओं को भी सुना तथा सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन दिया।
इनसेट
पहली बार कैंप लगाकर बांटी राहत सामग्री
करनैलगंज। सीएम के आने पर कहीं कोई शिकायत न हो पाये इसके लिए भी जोरदार तैयारिंया की गई थीं। बाढ़ पीड़ितों को बाढ़ आने के बाद रविवार को पहली बार मिट्टी के तेल का वितरण किया गया। बाढ़ पीड़ितों को सीएम के पास तक न पहुंचने के लिए और भी उपाय किए गये। लंच पैकेट व्यवस्था एवं तिरपाल केरोसिन वितरण का काम शुुरू करा दिया गया। जिससे भीड़ वितरण स्थल पर ही जमीं रही। हेलीपैड़ एवं राहत केंद्र के आसपास महज अधिकारियों का ही जमावड़ा देखने को मिला।
दूसरी बार सीएम योगी का निरीक्षण टलने से बाढ़ पीड़ितों में निराशा
अमर उजाला ब्यूरो
करनैलगंज गोंडा। हाकिम, हम गरीबों को वैसे भी बहुत दर्द मिल चुका है। घाघरा नदी की त्रासदी झेलकर बाढ़ पीड़ित वैसे भी तबाह हो चुके हैं। अफसर पीड़ितों को राहत पहुंचाने के नाम पर आंकड़ों की बाजीगरी करने में जुटे हुए हैं। जब जब आपके आने की आहट मिलती है मुख्यालय से दौड़कर सीधे बाढ़ क्षेत्र में आ धमकते हैं और जरूरत मंदों की सहायता करने के बजाय यह पता लगाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में अब एक आपसे ही आखिरी उम्मीद बची है। अब हम पीड़ितों के धैर्य की और परीक्षा न लीजिए बस एक बार चले आइए और अफसरों की बाजीगरी को अपनी आंखों से देेख लीजिए। यह दर्द करनैलगंज के उन बाढ़ पीड़ितों के है जो पिछले दो बार से मुख्यमंत्री के आने की सूचना पर खुश होते है लेकिन जैसे ही कार्यक्रम टलता है वैसे ही उनकी खुशी निराशा में बदल जाती है।
करनैलगंज क्षेत्र में घाघरा नदी का पानी व्यापक तबाही मचा चुका है। अब तक 64 ग्राम पंचायतों के 468 मजरे बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं। दिन ब दिन बाढ़ की विनाशलीला बढ़ती जा रही है लेकिन अफसर इन सबसे बेफिक्र होकर सबकुछ नियंत्रण में होने का दावा कर रहे हैं। दिन के उजाले में किसी तरह से समय काटने के बाद अंधेरे में रात बिताना बाढ़ पीड़ितों के लिए दुष्कर साबित हो रहा है। माताएं अपने बच्चों के साथ बंधे पर एक तिरपाल के नीचे बैठकर रात के बीतने का दुआ करती हैं। बच्चों के सो जाने पर उन्हे विषैले जीव जंतुओंसे बचाने के लिए रात रात भर जाग रही हैं लेकिन इन्हें राहत के नाम पर रोजमर्रा की जरुरत की सामान भी मुहैया नही हो पा रहा है। चार दिन पहले प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी के निरीक्षण में राहत सामग्री के वितरण की हकीकत सामने आ चुकी है। राहत वितरण की जिम्मेदारी संभालने वाला लेखपाल मंत्री को बाढ़ प्रभावित गांव का रास्ता तक नहीं बता सका। बाढ़ पीड़ित अगर राहत सामग्री के लिए अफसरों तक पहुंच भी जाए तो रास्ता न जानने वाले नायब तहसीलदार जैसे अफसर से उसे राशन की जगह थप्पड़ खाना पड़ता है। इसके बावजूद अफसरों की संवेदना नहीं जाग रही है। ऐसे में अब बाढ़ पीड़ितों की एकमात्र उम्मीद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ही बची है। मुख्यमंत्री के न आने से निराश बाढ़ पीड़ित रामसखे यादव, कुमकुम देवी, दीनानाथ, रामेश्वर, शिवशंकर समेत अन्य का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री आ जाते तो अफसरों की इस बाजीगरी को अपनी आंखों से देख लेते।
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अफसरों ने ली राहत की सांस
रविवार को दूसरी बार जैसे ही मुख्यमंत्री के निरीक्षण का कार्यक्रम टला वैसे ही अफसरों के मुरझाए चेहरे खिल उठे। सुबह नौ बजे तक जिले के सभी आला अधिकारियों के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं, अधिकारी पसीने से सराबोर थे। अचानक एक फोन काल आने के बाद उनके चेहरों पर खुशी की ऐसी हंसी निकली कि कोई भांप भी नहीं पाया और अधिकारियों का पलायन हेलीपैड से बाढ़ राहत केंद्र की ओर हो गया।
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सीएम नहीं तो प्रभारी मंत्री ने किया निरीक्षण
करनैलगंज। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम स्थगित होने के बाद जिले के प्रभारी मंत्री उपेंद्र तिवारी बाढ़ क्षेत्र में पहुंचे और बहुवन मदार मांझा सहित अन्य बाढ़ प्रभावित गांवों का मोटरबोट से निरीक्षण किया। उनके साथ डीएम जेबी सिंह, एसपी उमेश कुमार सिंह, एसडीएम अर्चना वर्मा सहित तमाम अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे। प्रभारी मंत्री ने बाढ़ पीड़ितों से मिलकर उनकी समस्याओं को भी सुना तथा सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन दिया।
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पहली बार कैंप लगाकर बांटी राहत सामग्री
करनैलगंज। सीएम के आने पर कहीं कोई शिकायत न हो पाये इसके लिए भी जोरदार तैयारिंया की गई थीं। बाढ़ पीड़ितों को बाढ़ आने के बाद रविवार को पहली बार मिट्टी के तेल का वितरण किया गया। बाढ़ पीड़ितों को सीएम के पास तक न पहुंचने के लिए और भी उपाय किए गये। लंच पैकेट व्यवस्था एवं तिरपाल केरोसिन वितरण का काम शुुरू करा दिया गया। जिससे भीड़ वितरण स्थल पर ही जमीं रही। हेलीपैड़ एवं राहत केंद्र के आसपास महज अधिकारियों का ही जमावड़ा देखने को मिला।