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धन कमाई का रिसर्च केन्द्र बन चुका एल्गिन चरसड़ी बांध
Updated Sun, 17 Jun 2018 10:48 PM IST
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अवैध कमाई का रिसर्च सेंटर बन गया एल्गिन चरसड़ी बांध
गोंडा। साढ़े सात करोड़ के बांध पर करीब 252 करोड़ मरम्मत पर खर्च हो गए फिर भी बाढ़ से बचाव की गारंटी नहीं है। एक बार फिर बाढ़ से क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए बांध पर नई-नई तकनीकि से मजबूती देने का काम शुरू हो गया।
एल्गिन-चरसड़ी बांध धन कमाई व नए-नए शोध का एक अच्छा साधन बन चुका है। कभी बांध बनाने, कभी बांध को मजबूत करने, कभी रिंग बांध का निर्माण तो कभी कटान रोकने के लिए स्पर, ठोकर, व कट बनाने की कवायदें की जा रही है।
बांध के नाम पर अवैध कमाई का यह खेल 11 वर्षों से हो रहा है। करीब 52 किलोमीटर लंबे इस बांध के निर्माण में 7.5 करोड का खर्च आया था। जिसकी मरम्मत और क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए नये-नये प्रयोग व शोध करके अब तक लगभग 252 करोड़ का खर्च इस बांध को बचाने व बाढ़ में हुए व्यय के रुप में किया जा चुका है।
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इस वर्ष फिर करीब 97 करोड़ रुपये बांध के लिए जारी किए गए, जिसमें करीेब पौने पांच किलोमीटर का नया बांध बनना था। जिसमें से दो किलोमीटर का बांध बनकर तैयार हो गया है।
करीब पौने दो किलोमीटर के बांध को बनाने के लिए सिंचाई विभाग के लिए नई चुनौती है। इस बांध के निर्माण में एक बार फिर बांध को मजबूत बनाने की कवायद तेज हो गई है।
फिर भी यदि इसी गति से कार्य होता रहा तो बाढ़ आने पर बांध के सहारे पूरे इलाके को बचा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा। पहले कटान को रोकने के लिए जीओ टयूब सहित ब्रिकरोरा, बालू की बोरियां, बल्ली, पायलिंग के साथ पेड़ पौधे व घास फूस तक किनारों पर डाला जाता था। मगर इस बार बांध के किनारों को पत्थरों से पिचिंग की जा रही है।
कोई जिम्मेदार अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं कि बांध सही सलामत है और अब बाढ़ से कोई खतरा नहीं। घाघरा का पानी भी धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो चुका है। जल्द ही पानी बांध तक आ जाने की पूरी उम्मीद है।
माझा वासियों के लिए नासूर बन चुके इस बांध के नाम पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये बाढ़ के पानी में बह जाता है और बाढ़ आने की सुगबुगाहट होते ही बांध की मरम्मत के लिए अधिकारियों की दौड़ शुरू हो गई है।
ग्रामीणों के विरोध से लटका 1800 मीटकर निर्माण
-इस बार बनाए जा रहे बांध में सात नए स्परों के साथ कट इन 1 व कट इन 2 का निर्माण भी कराया गया है। जिसमें कट इन 1 व कट इन 2 का कार्य पूरा हो चुका है। केवल पिचिंग का कार्य ही शेष है।
एल्गिन चरसड़ी बांध के किलोमीटर 9 से 15 तक बांध व बाढ़ बचाव कार्य के अंर्तगत सात नए स्पर, दो कट इंड के साथ नये बांध का निर्माण भी कराया जा रहा है। जिसकी लम्बांई 4.775 किलोमीटर की है। जिसमें करीब 18 सौ मीटर का बांध निर्माण कार्य ग्रामीणों के विरोध के चलते नहीं हो सका है।
चकमार्ग को किया जा रहा ऊंचा
-इस बार नकहरा गांव व घाघरा नदी के बीच के एक चक मार्ग को ऊंचा किया जा रहा है। जिससे पानी गांवों की तरफ न आ सके। अगर यह जुगाड़ सफल हो जाता है तो आने वाले समय में इसी को और ऊंचा कर बांध का रूप देने की बात कही जा रही है।
पिछले वर्ष बांध कटने के बाद घाघरा नदी ने नकहरा गांव के बगल से एक नई धारा बना ली थी। जो आज भी ज्यों की त्यों बरकरार है। लोगों का कहना है कि अगर नदी का प्रेशर पुन: गांव की तरफ होता है तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कटान वाली नई धारा में अब भी हल्का पानी का बहाव रहता है।
सीएम के वादे पर भी नहीं मिला आवास
विगत वर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जब बाढ़ का जायजा लेने व बाढ़ पीड़ितों से मिलने पाल्हापुर बाढ़ केन्द्र आए थे तो उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए आवास की व्यवस्था करने की बात कही थी।
मगर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक केवल लाभार्थियों की लिस्ट बनाये जाने की बात की जा रही है। नकहरा ग्राम पंचायत से 16 लाभार्थियों की लिस्ट बनाकर भेजी गयी है। किसी भी बाढ़ पीड़ित को आवास का लाभ नहीं मिला।
- विभाग की ओर से होने वाले सभी कार्य तेजी से चल रहे हैं, बरसात शुरू हो चुकी है। बाढ़ शुरू होने के पहले विभाग अपने कार्य को पूरा करेगा लगभग कार्य पूर्ण होने वाला है। 1.8 किलोमीटर के बांध का जिम्मा प्रशासन का है।
-अमरेश सिंह, एई, सिंचाई विभाग
-बांध निर्माण पर नजर रखी जा रही है। नदी की धारा बांध से काफी दूर है। बांध निर्माण व बाढ़ से क्षेत्र को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास प्रशासन कर रहा है। बांध के समीप के गांव के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
-मायाशंकर यादव, एसडीएम करनैलगंज
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गोंडा। साढ़े सात करोड़ के बांध पर करीब 252 करोड़ मरम्मत पर खर्च हो गए फिर भी बाढ़ से बचाव की गारंटी नहीं है। एक बार फिर बाढ़ से क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए बांध पर नई-नई तकनीकि से मजबूती देने का काम शुरू हो गया।
एल्गिन-चरसड़ी बांध धन कमाई व नए-नए शोध का एक अच्छा साधन बन चुका है। कभी बांध बनाने, कभी बांध को मजबूत करने, कभी रिंग बांध का निर्माण तो कभी कटान रोकने के लिए स्पर, ठोकर, व कट बनाने की कवायदें की जा रही है।
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बांध के नाम पर अवैध कमाई का यह खेल 11 वर्षों से हो रहा है। करीब 52 किलोमीटर लंबे इस बांध के निर्माण में 7.5 करोड का खर्च आया था। जिसकी मरम्मत और क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए नये-नये प्रयोग व शोध करके अब तक लगभग 252 करोड़ का खर्च इस बांध को बचाने व बाढ़ में हुए व्यय के रुप में किया जा चुका है।
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इस वर्ष फिर करीब 97 करोड़ रुपये बांध के लिए जारी किए गए, जिसमें करीेब पौने पांच किलोमीटर का नया बांध बनना था। जिसमें से दो किलोमीटर का बांध बनकर तैयार हो गया है।
करीब पौने दो किलोमीटर के बांध को बनाने के लिए सिंचाई विभाग के लिए नई चुनौती है। इस बांध के निर्माण में एक बार फिर बांध को मजबूत बनाने की कवायद तेज हो गई है।
फिर भी यदि इसी गति से कार्य होता रहा तो बाढ़ आने पर बांध के सहारे पूरे इलाके को बचा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा। पहले कटान को रोकने के लिए जीओ टयूब सहित ब्रिकरोरा, बालू की बोरियां, बल्ली, पायलिंग के साथ पेड़ पौधे व घास फूस तक किनारों पर डाला जाता था। मगर इस बार बांध के किनारों को पत्थरों से पिचिंग की जा रही है।
कोई जिम्मेदार अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं कि बांध सही सलामत है और अब बाढ़ से कोई खतरा नहीं। घाघरा का पानी भी धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो चुका है। जल्द ही पानी बांध तक आ जाने की पूरी उम्मीद है।
माझा वासियों के लिए नासूर बन चुके इस बांध के नाम पर प्रति वर्ष करोड़ों रुपये बाढ़ के पानी में बह जाता है और बाढ़ आने की सुगबुगाहट होते ही बांध की मरम्मत के लिए अधिकारियों की दौड़ शुरू हो गई है।
ग्रामीणों के विरोध से लटका 1800 मीटकर निर्माण
-इस बार बनाए जा रहे बांध में सात नए स्परों के साथ कट इन 1 व कट इन 2 का निर्माण भी कराया गया है। जिसमें कट इन 1 व कट इन 2 का कार्य पूरा हो चुका है। केवल पिचिंग का कार्य ही शेष है।
एल्गिन चरसड़ी बांध के किलोमीटर 9 से 15 तक बांध व बाढ़ बचाव कार्य के अंर्तगत सात नए स्पर, दो कट इंड के साथ नये बांध का निर्माण भी कराया जा रहा है। जिसकी लम्बांई 4.775 किलोमीटर की है। जिसमें करीब 18 सौ मीटर का बांध निर्माण कार्य ग्रामीणों के विरोध के चलते नहीं हो सका है।
चकमार्ग को किया जा रहा ऊंचा
-इस बार नकहरा गांव व घाघरा नदी के बीच के एक चक मार्ग को ऊंचा किया जा रहा है। जिससे पानी गांवों की तरफ न आ सके। अगर यह जुगाड़ सफल हो जाता है तो आने वाले समय में इसी को और ऊंचा कर बांध का रूप देने की बात कही जा रही है।
पिछले वर्ष बांध कटने के बाद घाघरा नदी ने नकहरा गांव के बगल से एक नई धारा बना ली थी। जो आज भी ज्यों की त्यों बरकरार है। लोगों का कहना है कि अगर नदी का प्रेशर पुन: गांव की तरफ होता है तो स्थिति खतरनाक हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि इस कटान वाली नई धारा में अब भी हल्का पानी का बहाव रहता है।
सीएम के वादे पर भी नहीं मिला आवास
विगत वर्ष प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जब बाढ़ का जायजा लेने व बाढ़ पीड़ितों से मिलने पाल्हापुर बाढ़ केन्द्र आए थे तो उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए आवास की व्यवस्था करने की बात कही थी।
मगर एक वर्ष बीत जाने के बाद भी अभी तक केवल लाभार्थियों की लिस्ट बनाये जाने की बात की जा रही है। नकहरा ग्राम पंचायत से 16 लाभार्थियों की लिस्ट बनाकर भेजी गयी है। किसी भी बाढ़ पीड़ित को आवास का लाभ नहीं मिला।
- विभाग की ओर से होने वाले सभी कार्य तेजी से चल रहे हैं, बरसात शुरू हो चुकी है। बाढ़ शुरू होने के पहले विभाग अपने कार्य को पूरा करेगा लगभग कार्य पूर्ण होने वाला है। 1.8 किलोमीटर के बांध का जिम्मा प्रशासन का है।
-अमरेश सिंह, एई, सिंचाई विभाग
-बांध निर्माण पर नजर रखी जा रही है। नदी की धारा बांध से काफी दूर है। बांध निर्माण व बाढ़ से क्षेत्र को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास प्रशासन कर रहा है। बांध के समीप के गांव के लोगों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
-मायाशंकर यादव, एसडीएम करनैलगंज