फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   बांध निर्माण में अपनी जमीन देने से 24 किसानों ने खड़े किए हाथ

बांध निर्माण में अपनी जमीन देने से 24 किसानों ने खड़े किए हाथ

Sun, 09 Jun 2019 10:32 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Jun 2019 10:32 PM IST
विज्ञापन
बांध निर्माण में अपनी जमीन देने से 24 किसानों ने खड़े किए हाथ
करनैलगंज (गोंडा)। करनैलगंज तहसील क्षेत्र के नकहरा गांव में बांध के लिए जमीन न देने पर अड़े 34 किसानों से मिलने वाली मात्र सवा 2 हेक्टेयर जमीन का खामियाजा साढ़े तीन लाख लोगों को बाढ़ की आपदा झेलकर भुगतना पड़ सकता है। एक सप्ताह के भीतर यदि किसानों से जमीन प्राप्त नहीं होती है और बांध का निर्माण नहीं पूरा होता है तो करनैलगंज व आसपास क्षेत्र की 92 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का आना तय माना जा रहा है। जैसा कि प्रतिवर्ष लगभग 20 जून से घाघरा नदी में जलस्तर का बढ़ना शुरू हो जाता है।
विज्ञापन


जून से मानसूनी बारिश शुरू हो जाती है। केरल तक मानसून पहुंच भी चुका है। इसी माह के उत्तरार्ध में घाघरा व सरयू का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है और पहाड़ी नालों व नदियों के उफान के कारण करनैलगंज क्षेत्र में पिछले दस सालों से बाढ़ की त्रासदी बनी हुई है। बीते दो वर्षों से एल्गिन-चरसड़ी बांध के किलोमीटर 9 से 15 के बीच बांध का पक्का निर्माण कराए जाने की कोशिशें चल रही हैं। जिसमें 4.8 किलोमीटर का बांध बनाया जाना था। पिछले वर्ष किसानों से पूरी जमीन न मिल पाने के कारण करीब पौने दो किलोमीटर बांध का निर्माण अधूरा रह गया था। जिसका खामियाजा करीब 90 ग्राम पंचायतों की तीन लाख आबादी को बाढ़ की आपदा से जूझकर भुगतना पड़ा। इस वर्ष हालात लगभग वैसे ही हैं। अभी भी करीब 12 सौ मीटर का बांध निर्माण अधर में लटका हुआ है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक 299 किसानों से 18 हेक्टेयर जमीन लेकर बांध का निर्माण कराया जा चुका है। उसके बावजूद 34 किसानों से मिलने वाली करीब सवा दो हेक्टेयर जमीन न मिलने के कारण बांध का निर्माण पूरा नहीं हो पा रहा है। जिससे बाढ़ का खतरा क्षेत्र में लगातार मंडरा रहा है। दो सप्ताह पूर्व तक सरकार और सरकारी अमले के अधिकारी पूरी तरह चुनाव के रंग में सराबोर थे।
विज्ञापन


प्रशासन का ध्यान बाढ़ या बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की तरफ नहीं था। उसके बाद से जमीन न देने एवं बांध का निर्माण गांव के बाहर कराने की जिद पर अड़े 34 किसानों को मनाने का सिलसिला शुरू हुआ तो जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, सिंचाई विभाग के एक्सईएन, अवर अभियंता, सहायक अभियंता लगातार किसानों को मनाने में जुटे हैं। मगर अभी तक सफलता हाथ नहीं लगी है। वहीं 20 जून की तारीख भी लगातार नजदीक आती जा रही है। बांध का निर्माण कराने वाली संस्था सिंचाई विभाग के पास जमीन और बांध के निर्माण का धन भी पर्याप्त है। उसके बावजूद बांध निर्माण के लिए 34 किसान रोड़ा बने हुए हैं। बांध निर्माण व मरम्मत के लिए 97.35 करोड़ रुपये पिछले वर्ष ही सिंचाई विभाग को शासन द्वारा अवमुक्त कर दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाढ़ आने के बाद सरकारी खजाने से खर्च होने वाला धन भी कम नहीं है। इसके बावजूद बाढ़ को रोकने के लिए प्रशासनिक कवायदें नाकाफी साबित हो रही हैं। सिंचाई विभाग के एक्सईएन विश्वनाथ शुक्ला कहते हैं कि मात्र 34 किसानों की जमीन के लिए प्रशासन और सिंचाई विभाग के सारे अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं। मगर सामूहिक रूप से 34 किसान एकजुट होकर जमीन न देने की जिद पर अड़े हैं। जिन्हें मनाने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यदि उन्हें अभी भी जमीन उपलब्ध करा दी जाए। तो बाढ़ को रोकने भरका बांध मौजूदा समय में तैयार करवा सकते हैं। उन्होंने कहा कि नकहरा गांव के किसान वर्ष 2017 से ही लगातार बांध बनाने का विरोध कर रहे हैं, जबकि उन्हें जमीन का सर्किल रेट से चार गुना अधिक धन भी दिया जा रहा है। उसके बावजूद जमीन देने को तैयार नहीं है।


बाढ़ से बचाव में खर्च हो चुके 42 करोड़
अब तक बांध और बाढ़ के नाम पर करीब तीन सौ करोड़ का व्यय राजस्व व सिंचाई विभाग द्वारा किया जा चुका है। वर्ष 2010 से 18 तक आई बाढ़ में करीब 42 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जिसमें मानव मृत्यु 42, पशु मृत्यु कुल 127 के साथ ही घर गिरने व राहत सामग्री की खरीद पर व्यय हुआ है। वर्ष 2017 में आई बाढ़ में प्रशासन द्वारा 7 करोड़ 21 लाख 96 हजार 989 रुपये का खर्च दिखाया गया। जिसमे मानव मृत पांच, फसल, आवास, नाव किराया, राहत सामग्री, डीजल, टेंट, भूषा का पैसा दिया गया। इसी तरह वर्ष 2018 में 2 करोड़ 92 लाख 33 हजार 716 कुल खर्चा आया। जिसमे 4 मानव मृत का चार चार लाख दिया गया। बाकी पैसा बाढ़ में राहत सामग्री व नाव किराया आदि में खर्च हुआ। (कुल व्यय केवल गोंडा जिले का है)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed