{"_id":"5b8583f042c7924639037b7f","slug":"151535476720-gonda-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरे के निशान से 87 सेमी पर हुई घाघरा, तबाही तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरे के निशान से 87 सेमी पर हुई घाघरा, तबाही तेज
Updated Tue, 28 Aug 2018 11:05 PM IST
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30 गांवों के 700 बीघा खेत घाघरा में समाए
गोंडा। इस वर्ष की बाढ़ में घाघरा अब तक के सर्वाधिक उफान पर पहुंच गई है। घाघरा की बाढ़ से हर तरफ बस पानी ही पानी है। लोगों की पल पल बढ़ रही परेशानी का सबब घाघरा बन बन चुकी है।
लगातार बढ़ रहा घाघरा का जलस्तर मंगलवार की सुबह खतरे के निशान से 87 सेंटीमीटर ऊपर तक पहुंच चुका है। मंगलवार को घाघरा का रौद्र रूप दिखाई दिया। 30 गांवों की करीब 700 बीघा जमीन घाघरा में समा गई।
करनैलगंज क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए बनाया गया अस्थाई रिंग बांध घाघरा की धारा में समा चुका है। जिससे पानी का सैलाब और नदी का रुख करनैलगंज क्षेत्र की तरफ हो चुका है।
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अब बाढ से प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि मंगलवार दोपहर से घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से घटने लगा और करनैलगंज इलाके में बाढ़ के पानी का फैलाव भी तेज गति से हो रहा है। सीमावर्ती जिले की ग्राम बांसगांव भी बाढ़ की चपेट में आ गया है।
विगत कई सप्ताह से बाढ़ का कहर झेल रहे करनैलगंज के तहसील इलाके सहित बाराबंकी के सरहदी इलाकों के करीब डेढ़ सौ से अधिक मजरों में अब हालात बहुत ही खराब हो चुके है।
जिससे लोग अपना घरबार छोड़कर बांध व सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे है। उधर घाघरा से जुड़े बैराजों से पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी है। लगातार बारिश से अब घाघरा बेहद उफान पर आ चुकी है। मंगलवार को घाघरा का जलस्तर 106 से 946 सीजन में सबसे अधिक रिकार्ड किया गया।
उफ नाई घाघरा से अब तक खाली पड़ी जमीन और कच्चे घरों को निगलना शुरू कर दिया है। बाढ़ के पानी से गौरा सिंहपुर में बनाया गया बाढ़ राहत केंद्र भी बाढ़ की चपेट में आ चुका है।
यहां कैम्प कर रही फ्लड पीएसी अपना सारा सामान समेटे इधर उधर भागती नजर आ रही है। घाघरा नदी के जलस्तर का लगातार बढना जारी है। अस्थाई बांध के कटान वाले हिस्से से आ रहा पानी का फैलाव भी तेजी से हो रहा है। जिसमें अधिकांश मजरे ऐसे हैं जिन्हें पानी ने चारों तरफ से घेर लिया है।
बाढ़ राहत केन्द्रों से नदारद रहते हैं कर्मचारी
मंगलवार को पाल्हापुर बाढ़ राहत केन्द्र पर मात्र सफाई कर्मी ही ड्यूटी पर उपस्थित पाये गये। पशुपालन विभाग का कैंप खाली मिला। बाढ़ प्रभावित इलाके से आये जगन्नाथ निवासी नकहरा ने बताया कि उनको कुत्ते ने काट लिया है। जिसका इंजेक्शन लगवाने के लिए डॉक्टरों को खोज रहे हैं।
तो वहीं चन्द्रभानपुर निवासी गुरू प्रसाद ने बताया कि उनकी गाय बीमार है। मगर पशुपालन विभाग के कर्मचारी व डाक्टर का पता नहीं है। अशोक की लड़की विकलांग है जिसे बाढ़ राहत केन्द्र तक नहीं लाया जा सकता। वह बीमार है दवा के लिए चक्कर लगा रहे है।
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गोंडा। इस वर्ष की बाढ़ में घाघरा अब तक के सर्वाधिक उफान पर पहुंच गई है। घाघरा की बाढ़ से हर तरफ बस पानी ही पानी है। लोगों की पल पल बढ़ रही परेशानी का सबब घाघरा बन बन चुकी है।
लगातार बढ़ रहा घाघरा का जलस्तर मंगलवार की सुबह खतरे के निशान से 87 सेंटीमीटर ऊपर तक पहुंच चुका है। मंगलवार को घाघरा का रौद्र रूप दिखाई दिया। 30 गांवों की करीब 700 बीघा जमीन घाघरा में समा गई।
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करनैलगंज क्षेत्र को बाढ़ से बचाने के लिए बनाया गया अस्थाई रिंग बांध घाघरा की धारा में समा चुका है। जिससे पानी का सैलाब और नदी का रुख करनैलगंज क्षेत्र की तरफ हो चुका है।
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अब बाढ से प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि मंगलवार दोपहर से घाघरा नदी का जलस्तर तेजी से घटने लगा और करनैलगंज इलाके में बाढ़ के पानी का फैलाव भी तेज गति से हो रहा है। सीमावर्ती जिले की ग्राम बांसगांव भी बाढ़ की चपेट में आ गया है।
विगत कई सप्ताह से बाढ़ का कहर झेल रहे करनैलगंज के तहसील इलाके सहित बाराबंकी के सरहदी इलाकों के करीब डेढ़ सौ से अधिक मजरों में अब हालात बहुत ही खराब हो चुके है।
जिससे लोग अपना घरबार छोड़कर बांध व सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे है। उधर घाघरा से जुड़े बैराजों से पानी छोड़े जाने का सिलसिला जारी है। लगातार बारिश से अब घाघरा बेहद उफान पर आ चुकी है। मंगलवार को घाघरा का जलस्तर 106 से 946 सीजन में सबसे अधिक रिकार्ड किया गया।
उफ नाई घाघरा से अब तक खाली पड़ी जमीन और कच्चे घरों को निगलना शुरू कर दिया है। बाढ़ के पानी से गौरा सिंहपुर में बनाया गया बाढ़ राहत केंद्र भी बाढ़ की चपेट में आ चुका है।
यहां कैम्प कर रही फ्लड पीएसी अपना सारा सामान समेटे इधर उधर भागती नजर आ रही है। घाघरा नदी के जलस्तर का लगातार बढना जारी है। अस्थाई बांध के कटान वाले हिस्से से आ रहा पानी का फैलाव भी तेजी से हो रहा है। जिसमें अधिकांश मजरे ऐसे हैं जिन्हें पानी ने चारों तरफ से घेर लिया है।
बाढ़ राहत केन्द्रों से नदारद रहते हैं कर्मचारी
मंगलवार को पाल्हापुर बाढ़ राहत केन्द्र पर मात्र सफाई कर्मी ही ड्यूटी पर उपस्थित पाये गये। पशुपालन विभाग का कैंप खाली मिला। बाढ़ प्रभावित इलाके से आये जगन्नाथ निवासी नकहरा ने बताया कि उनको कुत्ते ने काट लिया है। जिसका इंजेक्शन लगवाने के लिए डॉक्टरों को खोज रहे हैं।
तो वहीं चन्द्रभानपुर निवासी गुरू प्रसाद ने बताया कि उनकी गाय बीमार है। मगर पशुपालन विभाग के कर्मचारी व डाक्टर का पता नहीं है। अशोक की लड़की विकलांग है जिसे बाढ़ राहत केन्द्र तक नहीं लाया जा सकता। वह बीमार है दवा के लिए चक्कर लगा रहे है।