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ये पूंजीवाद के ढांचे की बुनियादी खराबी है
Updated Sat, 21 Oct 2017 10:18 PM IST
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ये पूंजीवाद के ढांचे की बुनियादी खराबी है...
परसपुर (गोंडा)। लगी है होड़ सी देखो अमीरी औ गरीबी में, ये पूंजीवाद के ढांचे की बुनियादी खराबी है। तुम्हारी मेज चांदी की, तुम्हारे जाम सोने के, यहां जुम्मन के घर में आज भी फूटी रकाबी है।
परसपुर के एक छोटे से गांव में जन्मे जिले से शायर व कवि अदम गोंडवी आज हमारे बीच भले न हों, लेकिन उनकी लिखी पंक्तियां आज भी हमारे जीवन में जीवंत हैं। रविवार को अदम के गांव आटा गजराजपुरवा में उनकी याद में जयंती मनाई जाएगी।
जिसमें गैरजनपदों से आने वाले शायर-कवि व तमाम गणमान्य उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए अपनी-अपनी श्रद्धांजलि देंगे।
महज तनख्वाह से निपटेंगे क्या नखरे लुगाई के, हजारों रास्ते है सिन्हा साहब की कमाई के। मिसेज सिन्हा के हाथों में जो बेमौसम खनकते हैं, पिछली बाढ़ के तोहफे हैं ये कंगन कलाई के।
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अपनी कविताओं के माध्यम से आम जनता के दर्द को उकेरने वाले शायर अदम गोंडवी ने जिले को जो पहचान साहित्य में दिलाई। उसके आज भी लोग मरीद हैं जनवादी कवि व शायर रामनाथ सिंह अदम गोंडवी की याद में हर साल उनके गांव आटा गजराजपुरवा में कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है।
जिसका आयोजन गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी उनके गांव में किया गया है। जिसमें जिलाधिकारी जेबी सिंह, एडीएम रत्नाकर मिश्र के अलावा एसपी समेत गैरजनपदों से आने वाले कवि व शायर हिस्सा लेंगे। इस दौरान एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा। जबकि मुशायरा व कवि सम्मेलन भी होगा।
प्राथमिक विद्यालय गजराजपुरवा आंटा में अदम गोंडवी के समाधि स्थल पर यह सारे कार्यक्रम रविवार को होंगे। रामनाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी जिले के परसपुर में आटा गजराजपुरवा गांव की मिट्टी में जन्मे। जिन्हें अपनी लेखनी के लिए दुष्यंत कुमार अलंकरण के सम्मान से नवाजा जा चुका है।
अदम गोंडवी की मौत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी राम बहादुर ने उनके गांव की काया पलटने के लिए तमाम प्रस्ताव बनाए। जिसमें से कुछ धरातल के हकीकत पर उतरे भी, जबकि तमाम काम अभी भी धरातल पर होने बाकी हैं।
अदम गोंडवी ने गंवई व्यवस्था को लेकर जो लाइनें लिखी थी, उसमें एक लाइन तुम्हारी फाइलों में गावं का मौसम गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे है ये दावा किताबी है। भी शामिल है।
परसपुर (गोंडा)। लगी है होड़ सी देखो अमीरी औ गरीबी में, ये पूंजीवाद के ढांचे की बुनियादी खराबी है। तुम्हारी मेज चांदी की, तुम्हारे जाम सोने के, यहां जुम्मन के घर में आज भी फूटी रकाबी है।
परसपुर के एक छोटे से गांव में जन्मे जिले से शायर व कवि अदम गोंडवी आज हमारे बीच भले न हों, लेकिन उनकी लिखी पंक्तियां आज भी हमारे जीवन में जीवंत हैं। रविवार को अदम के गांव आटा गजराजपुरवा में उनकी याद में जयंती मनाई जाएगी।
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जिसमें गैरजनपदों से आने वाले शायर-कवि व तमाम गणमान्य उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए अपनी-अपनी श्रद्धांजलि देंगे।
महज तनख्वाह से निपटेंगे क्या नखरे लुगाई के, हजारों रास्ते है सिन्हा साहब की कमाई के। मिसेज सिन्हा के हाथों में जो बेमौसम खनकते हैं, पिछली बाढ़ के तोहफे हैं ये कंगन कलाई के।
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अपनी कविताओं के माध्यम से आम जनता के दर्द को उकेरने वाले शायर अदम गोंडवी ने जिले को जो पहचान साहित्य में दिलाई। उसके आज भी लोग मरीद हैं जनवादी कवि व शायर रामनाथ सिंह अदम गोंडवी की याद में हर साल उनके गांव आटा गजराजपुरवा में कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाता है।
जिसका आयोजन गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी उनके गांव में किया गया है। जिसमें जिलाधिकारी जेबी सिंह, एडीएम रत्नाकर मिश्र के अलावा एसपी समेत गैरजनपदों से आने वाले कवि व शायर हिस्सा लेंगे। इस दौरान एक पुस्तक का भी विमोचन किया जाएगा। जबकि मुशायरा व कवि सम्मेलन भी होगा।
प्राथमिक विद्यालय गजराजपुरवा आंटा में अदम गोंडवी के समाधि स्थल पर यह सारे कार्यक्रम रविवार को होंगे। रामनाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी जिले के परसपुर में आटा गजराजपुरवा गांव की मिट्टी में जन्मे। जिन्हें अपनी लेखनी के लिए दुष्यंत कुमार अलंकरण के सम्मान से नवाजा जा चुका है।
अदम गोंडवी की मौत के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी राम बहादुर ने उनके गांव की काया पलटने के लिए तमाम प्रस्ताव बनाए। जिसमें से कुछ धरातल के हकीकत पर उतरे भी, जबकि तमाम काम अभी भी धरातल पर होने बाकी हैं।
अदम गोंडवी ने गंवई व्यवस्था को लेकर जो लाइनें लिखी थी, उसमें एक लाइन तुम्हारी फाइलों में गावं का मौसम गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे है ये दावा किताबी है। भी शामिल है।