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1000 किसानों के 15 हजार क्विंटल धान की खरीद फंसी

Mon, 02 Dec 2019 10:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Dec 2019 10:33 PM IST
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15 thousand quintal paddy purchase of 1000 farmers stuck
गोंडा। तहसीलवार सत्यापन अधिकारियों की मनमानी से किसानों से सीधे धान खरीद करने के मुहिम के तहत संचालित मूल्य समर्थन योजना को जिले में तगड़ा झटका लगा है। तहसील अधिकारियों के जिले के 1000 किसानों का सत्यापन न किये जाने से उनकी करीब 15 हजार क्विंटल से अधिक धान के उपज की खरीद फंस गई है। किसान अपनी उपज को बेचने के लिए रोज क्रय केंद्र व तहसील दौड़कर हल्कान हैं। सत्यापन अधिकारियों के कई दूसरे काम में विजी होने से किसानों के सत्यापन पर ग्रहण लग गया है।
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जिले में कुल करीब पांच लाख किसान हैं। जिले में हर करीब दो लाख हेक्टेयर में खरीफ की फसलें बोई गईं थीं। अपने धान की उपज को बेचने के इच्छुक किसानों में से अब तक जिले के 2,740 किसानों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया है। ऑनलाइन पंजीयन के बाद संबंधित तहसील के उप जिलाधिकारियों की ओर से किसानों का सत्यापन किये जाने के बाद ही मूल्य समर्थन योजना के तहत सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद की जा सकेगी। तहसील के उप जिलाधिकारियों की ओर से सब तक कुल 590 किसानों का ही सत्यापन किया जा सका है।
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अधिकारियों के पास अभी करीब एक हजार किसानों का सत्यापन लंबित है। खाद्य विभाग के अधिकारियों की माने यदि समय से इन किसानों का सत्यापन हो जाता तो इन किसानों की ओर से अब तक करीब 15 हजार क्विंटल खाद्यान्न सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच दिया जाता है। शासन की ओर से किसानों की उपज को लाभकारी मूल्य पर क्रय करने के लिए मूल्य समर्थन योजना संचालित की गई है। अब जिले में अव्यवस्था के चलते किसानों का समय से सत्यापन न किये जाने से जिले में केंद्र की मूल्य समर्थन योजना के तहत किसानों को उनके उपज का अधिकतम मूल्य दिलाने की मंशा पर पानी फिर रहा है।
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सरकारी सिस्टम में व्यवधान का फायदा उठा रहे बिचौलिये
किसानों के धान खरीद के लिए बने सरकारी सिस्टम में आ रहे व्यवधान का फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं। पंजीयन व उसके सत्यापन के झाम को देखते हुए जरूरत मंद किसान परेशान हैं वह अपनी उपज को बिचौलियों को 1100 से 1200 रुपये में मजबूरन बेच रहे हैं। प्रशासनिक अव्यवस्था से किसानों को प्रति क्विंटल धान के पीछे 600 रुपये से लेकर 700 रुपये की चपत लग रही है। इस समय खुले बाजार व मंडियों में आढ़तियों के यहां धान बेचने के लिए किसानों की भीड़ लग रही है। जबकि सरकारी क्रय केंद्रों पर नियमों की बाधा के चलते गिने चुने किसान ही पहुंच रहे हैं तमाम क्रय केंद्रों पर तो पूरे पूरे दिन बोहनी तक नही होती है। के न्द्र के कर्मचारी किसानों का इंतजार कर रहे हैं।
उपज न बिकने से ठप हुई किसानी
धान की उपज समय से न बिकने से किसानों को पैसा नही मिल पा रहा है। पैसा न मिलने से तमाम किसानों की किसानी ठप पड़ गई है। धान जिले की प्रमुख फसलों में से एक है। अपने जरूरत से अधिक होने पर किसान धान की उपज को बेच डालते हैं। उसी पैसे से अधिकतर किसान न सिर्फ अपने परिवार के दवा, कपड़े व बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं बल्कि उसी पैसे से किसान दूसरे रबी सीजन के फसलों की तैयारी व बोवाई के काम पर खर्च करते हैं। समय से धान की बिक्री करने में आ रहे व्यवधान से किसान हलकान हैं। ऐसे में किसानों के दूसरी फसलों की बोवाई पिछड़ रही है। किसान शत्रोहन यादव, शिव कुमार, मनोहर लाल का कहना है कि सरकारी क्रय केंद्र पर धान बेचना अब काफी मुश्किल बनता जा रहा है। ऐसे में तो मजबूरन पूंजी निकालने के लिए बाजार में कम रेट पर ही सही धान को बेचना पड़ रहा है।

फैक्ट फाइल
कुल किसान - 5,00,000
कामन धान का समर्थन मूल्य - 1,815 रुपये प्रति क्विंटल
ग्रेड ए धान का समर्थन मूल्य - 1,835 रुपये प्रति क्विंटल
धान बेचने के लिए पंजीयन कराया - 2,740
कुल क्रय एजेन्सियां - 05
कुल क्रय केंद्र - 73
कुल धान खरीद लक्ष्य न - 24,800 एमटी
अब तक कुल धान खरीद - 4500.50 एमटी
कुल लाभांवित किसान - 750
सत्यापन न होने से किसान नहीं ला पा रहे धान
मूल्य समर्थन योजना के तहत उन्हीं किसानों से धान की खरीद की जानी है जिन किसानों ने सरकार की ओर से निर्धारित पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीयन कराया है। पंजीकृत किसान वास्तव में वह सही किसान है जिसके नाम से जमीन है और उसने निर्धारित रकबा के सापेक्ष धान की उपज तैयार की है इसका सत्यापन तहसीलवार एसडीएम को करना है। अब तक करीब एक हजार किसानों का ऑनलाइन सत्यापन न होने से उन किसानों का क्रय केंद्र पर उपज नही खरीदी जा सकती। किसान के उपज की खरीद का पूरा ब्यौरा ऑनलाइन कम्प्युटर से ही फीड कर उसके उपज का भुगतान आरटीजीएस के माध्यम से किया जाना है। यह तभी सम्भव है जब किसानों का ऑनलाइन सत्यापन रिपोर्ट लगाई जाएगी। सत्यापन होने से किसान धान बेचने नही आ पा रहे हैं। -लाल बहादुर गुप्ता, जिला विपणन अधिकारी गोंडा।
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