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सत्यापन के अभाव में अटकी 80 हजार बुजुर्गों की पेंशन
Updated Sun, 09 Jul 2017 10:03 PM IST
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सत्यापन के अभाव में अटकी 80 हजार बुजुर्गों की पेंशन
ब्लॉकों पर धूल फांक रही सत्यापन की फाइलें
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। सरकार की तरफ से बुजुर्गों को उनके जीवन यापन के लिए दी जाने वाले 400 रुपये की मासिक पेंशन अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। सत्यापन को पूरा कर उसकी रिपोर्ट देने के लिए तय की गई 30 जून की तारीख बीत चुकी है लेकिन सत्यापन का काम अभी 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो सका है। सत्यापन के अभाव में पेंशन की फाइलें ब्लाक मुख्यालयों पर धूल फांक रही हैं और अपनी पेंशन पाने के लिए बुजुर्ग ब्लाक से लेकर जिला मुख्यालय स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर की खाक छान रहे हैं।
अपने जीवन के 60 वर्ष पूरे कर चुके बुजुर्गों को किसी आश्रित के आगे हाथ न फैलाना पड़े इसके लिए सरकार की तरफ से प्रतिमाह बुजुर्गों को 4 सौ रुपयेे की पेंशन प्रदान की जाती है। इसके लिए पेंशन के पात्र व्यक्ति को समाज कल्याण विभाग में ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन पत्र मिलने के बाद समाज कल्याण विभाग बीडीओ के माध्यम से इन आवेदन पत्रों की सत्यता की जांच कराता है। वित्तीय वर्ष 2016-17 तक जिले भर के कुल 80157 बुजुर्गों ने पेंशन के लिए आवेदन किया था। आवेदन पत्रों की जांच के बाद इन बुजुर्गों को पेंशन दी जा रही थी। वित्तीय वर्ष बदलने के साथ सरकार ने इन लाभार्थियों के सत्यापन के निर्देश जारी कर किए थे। सत्यापन के काम को सभी ब्लाकों के बीडीओ को सौंपा गया था। सत्यापन के इस काम को 30 जून तक पूरा किया जाना था और इसकी रिपोर्ट जिला समाज कल्याण अधिकारी को सौंपी जानी थी लेकिन खंड विकास अधिकारियों ने सत्यापन के काम को ठंढे बस्ते में डाल दिया। इस लापरवाही के कारण सत्यापन का कार्य अधूरा रह गया। 27 जून को जब जिलाधिकारी ने वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन की समीक्षा की तो पता चला कि सत्यापन का दस फीसदी काम भी पूरा नहीं हो सका है। इस पर उन्होंने सभी बीडीओ को तीन दिवस के भीतर सत्यापन का काम पूरा करने के निर्देश जारी किए थे। डीएम की फटकार के बाद भी सत्यापन का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में बजुर्गों की पेंशन अफसरों की लापरवाही के कारण अटक गई है। जिले के नवागत जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी कुमार वर्मा ने शुक्रवार को अपना कार्यभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले वृद्धावस्था पेंशन योजना के सत्यापन की समीक्षा की।
इनसेट
45 हजार लाभार्थियों को नहीं दी चौथी किश्त
गोंडा। वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों को चार किश्तों में पेंशन की धनराशि दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में वृद्धावस्था पेंशन के 80 हजार लाभार्थियों को तीन किश्त की धनराशि तो दी गई लेकिन चौथी किश्त में देने में खेल कर दिया गया। 80 हजार लाभार्थियों में से सिर्फ 35 हजार बुजुर्गों को ही चौथी किश्त की धनराशि जारी की गई जब कि 45 हजार लाभार्थी पेंशन की चौथी किश्त से वंचित रह गए।
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वर्जन
वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन का 60 फीसदी काम पूरा हो गया है। बाकी बचे आवेदन पत्रों के सत्यापन के लिए सभी ब्लाकों के खंड विकास अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। सत्यापन का काम जल्द ही पूरा करा लिया जायेगा।
-अंजनी कुमार वर्मा, समाज कल्याण अधिकारी
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ब्लॉकों पर धूल फांक रही सत्यापन की फाइलें
अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा। सरकार की तरफ से बुजुर्गों को उनके जीवन यापन के लिए दी जाने वाले 400 रुपये की मासिक पेंशन अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। सत्यापन को पूरा कर उसकी रिपोर्ट देने के लिए तय की गई 30 जून की तारीख बीत चुकी है लेकिन सत्यापन का काम अभी 50 फीसदी भी पूरा नहीं हो सका है। सत्यापन के अभाव में पेंशन की फाइलें ब्लाक मुख्यालयों पर धूल फांक रही हैं और अपनी पेंशन पाने के लिए बुजुर्ग ब्लाक से लेकर जिला मुख्यालय स्थित समाज कल्याण विभाग के दफ्तर की खाक छान रहे हैं।
अपने जीवन के 60 वर्ष पूरे कर चुके बुजुर्गों को किसी आश्रित के आगे हाथ न फैलाना पड़े इसके लिए सरकार की तरफ से प्रतिमाह बुजुर्गों को 4 सौ रुपयेे की पेंशन प्रदान की जाती है। इसके लिए पेंशन के पात्र व्यक्ति को समाज कल्याण विभाग में ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन पत्र मिलने के बाद समाज कल्याण विभाग बीडीओ के माध्यम से इन आवेदन पत्रों की सत्यता की जांच कराता है। वित्तीय वर्ष 2016-17 तक जिले भर के कुल 80157 बुजुर्गों ने पेंशन के लिए आवेदन किया था। आवेदन पत्रों की जांच के बाद इन बुजुर्गों को पेंशन दी जा रही थी। वित्तीय वर्ष बदलने के साथ सरकार ने इन लाभार्थियों के सत्यापन के निर्देश जारी कर किए थे। सत्यापन के काम को सभी ब्लाकों के बीडीओ को सौंपा गया था। सत्यापन के इस काम को 30 जून तक पूरा किया जाना था और इसकी रिपोर्ट जिला समाज कल्याण अधिकारी को सौंपी जानी थी लेकिन खंड विकास अधिकारियों ने सत्यापन के काम को ठंढे बस्ते में डाल दिया। इस लापरवाही के कारण सत्यापन का कार्य अधूरा रह गया। 27 जून को जब जिलाधिकारी ने वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन की समीक्षा की तो पता चला कि सत्यापन का दस फीसदी काम भी पूरा नहीं हो सका है। इस पर उन्होंने सभी बीडीओ को तीन दिवस के भीतर सत्यापन का काम पूरा करने के निर्देश जारी किए थे। डीएम की फटकार के बाद भी सत्यापन का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में बजुर्गों की पेंशन अफसरों की लापरवाही के कारण अटक गई है। जिले के नवागत जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी कुमार वर्मा ने शुक्रवार को अपना कार्यभार ग्रहण करने के बाद सबसे पहले वृद्धावस्था पेंशन योजना के सत्यापन की समीक्षा की।
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45 हजार लाभार्थियों को नहीं दी चौथी किश्त
गोंडा। वृद्धावस्था पेंशन के लाभार्थियों को चार किश्तों में पेंशन की धनराशि दी जाती है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में वृद्धावस्था पेंशन के 80 हजार लाभार्थियों को तीन किश्त की धनराशि तो दी गई लेकिन चौथी किश्त में देने में खेल कर दिया गया। 80 हजार लाभार्थियों में से सिर्फ 35 हजार बुजुर्गों को ही चौथी किश्त की धनराशि जारी की गई जब कि 45 हजार लाभार्थी पेंशन की चौथी किश्त से वंचित रह गए।
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वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन का 60 फीसदी काम पूरा हो गया है। बाकी बचे आवेदन पत्रों के सत्यापन के लिए सभी ब्लाकों के खंड विकास अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। सत्यापन का काम जल्द ही पूरा करा लिया जायेगा।
-अंजनी कुमार वर्मा, समाज कल्याण अधिकारी