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लापरवाही में 122 आशा व 12 एएनएम की नौकरी फंसी
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गोंडा। स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लापरवाही बरतने में 122 आशा व 12 एएनएम कार्रवाई के दायरे में आ गई हैं। जिलाधिकारी डॉ. नितिन बसंल ने लापरवाही का मामला समीक्षा में पकड़ा है। उन्होंने कार्रवाई शुरू कर दी हैं।
कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने पिछले तीन माह में एक भी संस्थागत प्रसव न कराने वाली 122 आशाओं के विरुद्व कार्रवाई का प्रस्ताव तलब किया है। इसके साथ ही प्रसव व अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में रूचि न लेने वाली 12 एएनएम के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों की कार्यक्रमवार गहन समीक्षा की। जिम्मेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को धरातल पर लागू करने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतें। टीकाकरण की समीक्षा में पता चला कि सीएचसी इटियाथोक व बभनजोत की स्थिति सबसे खराब है।
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वहीं सुरक्षित मातृत्व अभियान में तरबगंज, बभनजोत, काजीदेवर, हलधरमऊ का प्रदर्शन सबसे खराब है। पोषण पुनर्वास केंद्र की समीक्षा में बच्चों की अपेक्षित संख्या न आने पर उन्होंने पुनर्वास केंद्र प्रभारी से जवाब तलब किया है। निर्देश दिए हैं कि पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों के एडमिशन में व्यक्तिगत रुचि लेकर बढ़ोत्तरी करें।
कन्या सुमंगला योजना की समीक्षा में अस्पतालों से अपेक्षित आवेदन फार्म न आने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के अंदर ज्यादा से ज्यादा आवेदनों को प्राप्त कर प्रोबेशन कार्यालय में उपलब्ध कराएं।
इसके अतिरिक्त बैठक में डीएम ने जननी सुरक्षा योजनाए राष्ट्रीय अंधता कार्यक्रम, मलेरिया नियंत्रण, आरसीएच पोर्टल, हाई रिस्क प्रेगनेंसी, संस्थागत प्रसव, नशा मुक्ति अभियान सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की तथा प्रगति लाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी डॉ. नितिन बसंल ने कहा कि स्वास्थ्य योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर महीने समीक्षा होगी और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। सीएमओ और एसीएमओ फील्ड में जाएं, योजनाओं की प्रगति को बेहतर करें।
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कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी ने पिछले तीन माह में एक भी संस्थागत प्रसव न कराने वाली 122 आशाओं के विरुद्व कार्रवाई का प्रस्ताव तलब किया है। इसके साथ ही प्रसव व अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों में रूचि न लेने वाली 12 एएनएम के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य कार्यक्रमों की कार्यक्रमवार गहन समीक्षा की। जिम्मेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे स्वास्थ्य कार्यक्रमों को धरातल पर लागू करने में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतें। टीकाकरण की समीक्षा में पता चला कि सीएचसी इटियाथोक व बभनजोत की स्थिति सबसे खराब है।
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वहीं सुरक्षित मातृत्व अभियान में तरबगंज, बभनजोत, काजीदेवर, हलधरमऊ का प्रदर्शन सबसे खराब है। पोषण पुनर्वास केंद्र की समीक्षा में बच्चों की अपेक्षित संख्या न आने पर उन्होंने पुनर्वास केंद्र प्रभारी से जवाब तलब किया है। निर्देश दिए हैं कि पोषण पुनर्वास केंद्र में कुपोषित बच्चों के एडमिशन में व्यक्तिगत रुचि लेकर बढ़ोत्तरी करें।
कन्या सुमंगला योजना की समीक्षा में अस्पतालों से अपेक्षित आवेदन फार्म न आने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए सभी प्रभारी चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के अंदर ज्यादा से ज्यादा आवेदनों को प्राप्त कर प्रोबेशन कार्यालय में उपलब्ध कराएं।
इसके अतिरिक्त बैठक में डीएम ने जननी सुरक्षा योजनाए राष्ट्रीय अंधता कार्यक्रम, मलेरिया नियंत्रण, आरसीएच पोर्टल, हाई रिस्क प्रेगनेंसी, संस्थागत प्रसव, नशा मुक्ति अभियान सहित अन्य स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की तथा प्रगति लाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी डॉ. नितिन बसंल ने कहा कि स्वास्थ्य योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हर महीने समीक्षा होगी और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। सीएमओ और एसीएमओ फील्ड में जाएं, योजनाओं की प्रगति को बेहतर करें।