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गोंडा के दामन पर लगा गंदगी का दाग धुला
Updated Sat, 23 Jun 2018 10:32 PM IST
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गोंडा पर लगा गंदगी का दाग पड़ा हल्का
गोंडा। साल भर पहले तक जिस गोंडा शहर का नाम देश के सबसे गंदे शहरों में लिया जाता था। आज वही गोंडा शहर स्वच्छता के मामले में देश के बाकी शहरों के लिए एक नजीर बनकर सामने आया है।
साल भर पहले देश के 434 शहरों के किए गए स्वच्छता सर्वे में इसी गोंडा शहर को आखिरी पायदान 434वें नम्बर पर जगह मिली थी। जबकि हाल में हुए भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में गोंडा 228वें नम्बर का एक ऐसा शहर बनकर उभरा है, जो स्वच्छता की रैंकिंग में इलाहाबाद, गोरखपुर से कहीं आगे है।
जबकि साफ-सफाई के मामले में गोंडा नगर पालिका ने सूबे के 650 नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत) में 10वें नम्बर तो 198 नगर पालिकाओं में तीसरे स्थान पर अपनी आमद दर्ज कराई है।
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गोंडा के लोगों को साल भर पहले 4 मई 2017 का वह दिन आज भी याद है। जब गंदगी को लेकर इस शहर की फजीहत पूरे देश में हुई थी। इंटरनेट हो या फिर अखबार हर जगह गोंडा का नाम इस कदर बदनाम हुआ कि गोंडा वासियों से लोग सवाल करने लगे कि उनका शहर इतना गंदा कैसे।
जिसके बाद जिले के लोगों ने भारत सरकार की ओर से कराए गए स्वच्छता सर्वेक्षण के अभियान पर तंज कसते हुए इसे सवालों के घेरे में भी खड़ा किया था। लेकिन अब जो नतीजे स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 को लेकर सामने आए हैं।
उसे देखने के बाद लोगों को यह यकीन ही नहीं हो रहा कि उनका शहर इतना साफ कैसे। आखिर 365 दिनों में ऐसा क्या हो गया, जिससे देश के सबसे गंदे शहरों में शुमार गोंडा स्वच्छता की 206 सीढ़ियों को चढ़कर सीधे 228वें पायदान पर पहुंच गया।
इस तरह बदली शहर की सूरत
इस बारे में जब अमर उजाला ने गोंडा नगर पालिका चेयरमैन उज्मा राशिद से बात की तो उनका कहना था कि गोंडा शहर में उनकी सरकार का गठन सितंबर महीने में हुआ था।
नपाप गोंडा की सरकार बनने के बाद से ही उनका पूरा ध्यान गोंडा के दामन पर लगे गंदगी के दाग को धुलना था। जिसके लिए नगर पालिका के एक-एक कर्मचारी, अधिकारी, जिला प्रशासन और विधायक ने जो कुछ भी उनके स्तर से हो सकता था, वह सब किया।
शहर के 27 वार्डों से निकलने वाले कूड़े की रोज उठान कराने के लिए 30 बड़ी 4500 लीटर की डस्टबिनें, 2500 लीटर की छोटी डस्टबिनें लगाई गई। जहां से नियमित रूप से रोजाना कूड़ा उठाया जा रहा है।
जबकि नालों की सफाई एक अभियान के तहत रात-दिन की गई। यही सब कारण थे कि आज गोंडा अपने दामन पर लगे दाग को धुलने में पूरी तरह कामयाब रहा।
सबने दिया साथ, तब धुला माथे पर लगा दाग
नगर पालिका के सभी 27 वार्डों के लोगों ने पालिका के इस अभियान में सहयोग देते हुए अपने घरों का गंदगी नियमित रूप से कूड़ेदानों में डालनी शुरू की। अपने आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा बनाया।
नियमित तौर पर साफ-सफाई के लिए चलने वाले अभियानों में अपनी आहुति दी। जिसकी बदौलत गोंडा आज अपने दामन पर लगे दाग को धुलने में कामयाब रहा। शनिवार को इसी के मद्देनजर पालिकाध्यक्ष की ओर से नगर पालिका में एक कार्यक्रम भी रखा गया। जिसमें शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए सभी का आभार जताया गया।
साल भर पहले गंदगी का जो दाग गोंडा के दामन पर लगा था। आज वह दाग भारत सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण की आई रिपोर्ट में पूरी तरह से साफ हो चुका है। इसमें सबसे बड़ा योगदान यहां के लोगों का है। जिसके लिए उन्होंने स्वच्छता अपनाने में कहीं कोई कमी अपने स्तर से नहीं छोड़ी है। अगली बार वह इससे बेहतर रैंक लेकर सामने आएंगी।
-उज्मा राशिद, चेयरमैन गोंडा नगर पालिका
गोंडा। साल भर पहले तक जिस गोंडा शहर का नाम देश के सबसे गंदे शहरों में लिया जाता था। आज वही गोंडा शहर स्वच्छता के मामले में देश के बाकी शहरों के लिए एक नजीर बनकर सामने आया है।
साल भर पहले देश के 434 शहरों के किए गए स्वच्छता सर्वे में इसी गोंडा शहर को आखिरी पायदान 434वें नम्बर पर जगह मिली थी। जबकि हाल में हुए भारत सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 में गोंडा 228वें नम्बर का एक ऐसा शहर बनकर उभरा है, जो स्वच्छता की रैंकिंग में इलाहाबाद, गोरखपुर से कहीं आगे है।
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जबकि साफ-सफाई के मामले में गोंडा नगर पालिका ने सूबे के 650 नगरीय निकायों (नगर निगम, नगर पालिका व नगर पंचायत) में 10वें नम्बर तो 198 नगर पालिकाओं में तीसरे स्थान पर अपनी आमद दर्ज कराई है।
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गोंडा के लोगों को साल भर पहले 4 मई 2017 का वह दिन आज भी याद है। जब गंदगी को लेकर इस शहर की फजीहत पूरे देश में हुई थी। इंटरनेट हो या फिर अखबार हर जगह गोंडा का नाम इस कदर बदनाम हुआ कि गोंडा वासियों से लोग सवाल करने लगे कि उनका शहर इतना गंदा कैसे।
जिसके बाद जिले के लोगों ने भारत सरकार की ओर से कराए गए स्वच्छता सर्वेक्षण के अभियान पर तंज कसते हुए इसे सवालों के घेरे में भी खड़ा किया था। लेकिन अब जो नतीजे स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 को लेकर सामने आए हैं।
उसे देखने के बाद लोगों को यह यकीन ही नहीं हो रहा कि उनका शहर इतना साफ कैसे। आखिर 365 दिनों में ऐसा क्या हो गया, जिससे देश के सबसे गंदे शहरों में शुमार गोंडा स्वच्छता की 206 सीढ़ियों को चढ़कर सीधे 228वें पायदान पर पहुंच गया।
इस तरह बदली शहर की सूरत
इस बारे में जब अमर उजाला ने गोंडा नगर पालिका चेयरमैन उज्मा राशिद से बात की तो उनका कहना था कि गोंडा शहर में उनकी सरकार का गठन सितंबर महीने में हुआ था।
नपाप गोंडा की सरकार बनने के बाद से ही उनका पूरा ध्यान गोंडा के दामन पर लगे गंदगी के दाग को धुलना था। जिसके लिए नगर पालिका के एक-एक कर्मचारी, अधिकारी, जिला प्रशासन और विधायक ने जो कुछ भी उनके स्तर से हो सकता था, वह सब किया।
शहर के 27 वार्डों से निकलने वाले कूड़े की रोज उठान कराने के लिए 30 बड़ी 4500 लीटर की डस्टबिनें, 2500 लीटर की छोटी डस्टबिनें लगाई गई। जहां से नियमित रूप से रोजाना कूड़ा उठाया जा रहा है।
जबकि नालों की सफाई एक अभियान के तहत रात-दिन की गई। यही सब कारण थे कि आज गोंडा अपने दामन पर लगे दाग को धुलने में पूरी तरह कामयाब रहा।
सबने दिया साथ, तब धुला माथे पर लगा दाग
नगर पालिका के सभी 27 वार्डों के लोगों ने पालिका के इस अभियान में सहयोग देते हुए अपने घरों का गंदगी नियमित रूप से कूड़ेदानों में डालनी शुरू की। अपने आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा बनाया।
नियमित तौर पर साफ-सफाई के लिए चलने वाले अभियानों में अपनी आहुति दी। जिसकी बदौलत गोंडा आज अपने दामन पर लगे दाग को धुलने में कामयाब रहा। शनिवार को इसी के मद्देनजर पालिकाध्यक्ष की ओर से नगर पालिका में एक कार्यक्रम भी रखा गया। जिसमें शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए सभी का आभार जताया गया।
साल भर पहले गंदगी का जो दाग गोंडा के दामन पर लगा था। आज वह दाग भारत सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण की आई रिपोर्ट में पूरी तरह से साफ हो चुका है। इसमें सबसे बड़ा योगदान यहां के लोगों का है। जिसके लिए उन्होंने स्वच्छता अपनाने में कहीं कोई कमी अपने स्तर से नहीं छोड़ी है। अगली बार वह इससे बेहतर रैंक लेकर सामने आएंगी।
-उज्मा राशिद, चेयरमैन गोंडा नगर पालिका